Tuesday, October 16
Home>>Stories>>अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)
Good & Bad Achai aur Burai Short Moral Hindi Story
Stories

अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)

उभरती बुराई ने दबती सी अच्छाई से कहा, कुछ भी हो, लाख मतभेद हो पर है तू मेरी सहेली। मुझे अपने सामने तेरा दबना अच्छा नही लगता। अलग खड़ी न हो मुझमें मिल जा। मै तुझे भी अपने साथ बढ़ा लूंगी, समाज में फैला लूंगी। भलाई ने शांति से उत्तर दिया, तुम्हारी हमदर्दी के लिए धन्यवाद, पर रहना मुझे तुमसे अलग ही है। क्यो? आश्चर्य भरी अप्रसन्नता से बुराई ने पूछा।

अच्छाई ने और भी शांत होकर जवाब दिया। बात यह है कि मैं तुमसे मिल जांऊ तो फिर मैं कहां रहूंगी? तब तो तुम ही तुम होगी सब जगह। गुस्से से उफनकर बुराई ने अपनी झाड़ी अच्छाई के चारों ओर फैलाकर जकड़ लिया और फुंफकारकर कहा ले भोग मेरे निमंत्रण को ठुकराने का नतीजा! अब पड़ी रह मिट्टी में मुंह दुबकाए, दुनिया में तेरे फैलने का अब कोई मार्ग नही।

अच्छाई ने अपने नन्हे अंकुर की आंख से जहां भी झांका उसे बुराई की जकड़ बंध, झाड़ी के तेज कांटे, भाले के समान तने हुए दिखाई दिए। फिर भी पूरे आत्मविश्वास से अच्छाई ने कहा तुम्हारा फैलाव बहुत व्यापक है, बहिन, इस फैलाव से अपने अस्तित्व को बचाकर मुझे वृद्धि और प्रसार पाने में पूरा संघर्ष करना पड़ेगा, पर तुम यह न भूलना कि कांटे-कांटे के बीच से गुजर कर जब मैं तुम्हारी झाड़ी के ऊपर पहुंचूंगी तो मेरे कोमल फूलों की महक चारों ओर फैल जाएगी, तब तेरा अस्तित्व ओझल ही रहेगा।

बुराई गंभीर हो गई और उसे लगा कि उसके कांटों की शक्ति स्वयंमेव पहले से कम होती जा रही है और अच्छाई का अंकुर तेजी से वृद्धि पा रहा है।



1 Comments

  1. Life is KARMA
    Burai chahe kitna bhi karlo wapis aaphi ke paas aani hai
    Isi liye kabhi burai nahi chahiye
    Acche karm kare

Leave a Reply

error: Content is protected !!