अगर नियमित डाइट को मिस किया तो !!

Weight Loss Diet Tips in Hindi

सेहत के मामले में डायटिंग और क्रैश डाइटिंग जैसे फॉर्मूले कई बार भारी पड़ जाते हैं। जानें इनकी भ्रांतियों के बारे में:-

अगर आपको भी लगता है कि डाइट में कमी करने या खूब सारी एक्‍सरसाइज कर आप जल्‍दी अपना वजन कम कर लेंगे, तो संभल जाइए। ज्‍यादातर लोग इन भ्रांतियों को बिना परखे अपनाने लगते हैं और बदले में कई तरह की तकलीफों को निमंत्रण दे बैठते हैं।

स्लिम होने यानी वजन कम करने की चाह में ज्‍यादातर लोग बिना किसी एक्‍सपर्ट की सलाह के खाने की कई चीजें से दूरी बना लेते हैं। यहां तक कि ब्रेकफास्‍ट, लंच या डिनर तक मिस करने लगते हैं। साथ ही एक्‍सरसाइज पर जरूरत से ज्‍यादा जोर देने लगते हैं। लेकिन हकीकत में वजन कम करने का यह तरीका सही नहीं है। इससे न सिर्फ शरीर कमजोर होता है, बल्कि इम्‍यूनिटी भी कम होने लगती है। यहां हम कुछ ऐसी ही भ्रांतियों पर चर्चा कर रहे है जिसके चक्‍कर में लोग अपनी सेहत खराब कर रहे हैं।

वजन कम करना मतलब फिट रहना होता है ?
वजन कम करने का मतलब फिटनेश नहीं है। जब अस्‍वस्‍थ तरीकों जैसे क्रैश डायटिंग, ओवर एक्‍सरसाइज, वेट लॉस सप्‍लीमेंट्स आदि से वजन कर किया जाता है तो ज्‍यादातर मसल्‍स के आस-पास का फैट ही कम होता है। आंतरिक अंगों में जमा फैट ऐसे उपायों से कम नहीं होता है। फिटनेस से स्‍टेमिना बढ़ता है जबकि डायटिंग आदि से स्‍टेमिना कम होता है। अपने खानपान की बुरी आदतों और लाइफस्‍टाइल को बदलकर वजन कर किया जा सकता है।

फैट खाएंगे तो मोटापा बढ़ेगा ?
ज्‍यादा मात्रा में कार्ब, हाई कैलोरी, जंग फूड के साथ अत्‍याधिक मात्रा में फैट का सेवन करना मोटापा बढ़ाता है। जब तक कैलोरी नियंत्रित मात्रा में होती है तब तक फैट के सेवन से मोटापा नहीं बढ़ता है। कई स्‍टडीज में सामने आया है कि फैट में ज्‍यादा औश्र कार्ब में कम डाइट लेने से वजन कम होता है।

दुबले पतले लोग ज्‍यादा हैल्‍दी होते है ?
यह सही है कि मोटापा से कई तरह की गंभीर बीमारियां जैसे टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी, ब्‍लड प्रेशर आदि जुड़ी होती है। हालांकि कई लोग मोटे होने के बाद भी स्‍वस्‍थ होते है और कई पतले लोगों को कई तरह की गंभीर बीमारियां होती है। दरअसल पेट या अंगों के आस-पास ज्‍यादा फैट जमा होने पर बीमारियों की आशंका बढ़ने लगती है।

कार्ब से बढ़ता है मोटापा ?
ज्‍यादातर लोग यही सोच कर कार्ब को अपनी डाइट से दूर कर देते हैं लेकिन हकीकत में लो-कार्ब डाइट यानी कम कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट वजन कम करने में मददगार होती है। कार्ब की मात्रा कम होने और प्रोटीन की मात्रा ज्‍यादा होने से वजन कम होता है। रिफाइन्‍ड कार्ब जैसे रिफाइन्‍ड अनाज और चीनी वचन बढ़ाते है जबकि होल फूड में कार्ब अत्‍यधिक मात्रा होती है जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी होता है।

देर रात खाने से भी बढ़ता है वजन ?
अगर आप खाते रहेंगे और कैलोरी बर्न करने के लिए किसी तरह की शारीरिक क्रिया नहीं करेंगे तो वजन बढ़ेगा। देर रात खाना और खाते ही सो जाने से वजन पर नहीं बल्कि पाचन प्रक्रिया पर असर पड़ता है। ज्‍यादा खाने और एक्‍सरसाइज न करने से अतिरिक्‍त कैलोरी फैट के रूप में शरीर में जमा होने लगता है।

डायटिंग से वजन जल्‍दी कम होता है इसलिए कम खाना चाहिए?
खाने में कमी करने से वजन कम होता है। इस सोच से ज्‍यादातर लोग नाश्‍ता या लंच या डिनर स्किप करने लगते हैं। लेकिन कहीकत में इसका असर स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। दरअसल जरूरत से कम डाइट से शरीर का मेटाबॉलिज्‍म कम हो जाता है। साथ ही भूख लगे होने पर तुलनात्‍मक रूप से आप ज्‍यादा खो जाते हैं। यही वजह है कि एक्‍सपर्ट्स रोजाना तीन समय खाने पर जोर देते हैं। वजन कम करने के दौरान कुछ नहीं खाने की बजाय हर तीन घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाना चाहिए।

वजन कम करने में न्‍यूट्रीशनल सप्‍लीमेंट्स होते हैं कारगर ?
ज्‍यादातर वजन कम करने वाले सप्‍लीमेंट्स मल त्‍याग करने की फ्रीक्‍वेंसी बढ़ाते हैं। इससे प्राकृतिक तरीके से मल त्‍याग करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और डिहाइड्रेशन होने लगता है। साथ ही इससे कई तरह के पोषक तत्‍वों की भी कमी होने लगती है। कई सप्‍लीमेंट्स हमारी डाइट से पूरी तरह से फैट को हटा देते हैं यानी मल के जरिए पूरी तरह फैट हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है, जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए सही नहीं होता है। दरअसल इसमें कई तरह के जरूरी फैटी एसिड होते है जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी होते है।

सभी तरह की कैलोरी एक जैसी होती है ?
ज्‍यादातर लोग सभी कैलोरी को वजन बढाने वाला मानकर उससे दूरी बना लेते है। हकीकत में हर तरह के स्त्रोत से मिलने वाली कैलोरी का स्‍वास्‍थ्‍य और वजन पर एक जैसा प्रभाव नहीं होता है। सभी तरह के खाने की अलग मेटाबॉलिक प्रक्रिया होती है, जिसका भूख व वजन को नियत्रित करने वाले हॉमोंन पर अलग-अलग असर पड़ता है। यही वजह है कि फैट या कार्ब की बजाय प्रोटीन कैलेरी का इस्‍तेमाल करें। इससे मेटाबॉलिज्‍म बढ़ने के साथ ही भूख और खाने की इच्‍छा कम होती है।

मोटापा जेनेटिक होता है?
हकीकत में फैट से संबंधित कोई ऐसा जीन नही होता है जो पीढ़ी दर पीढ़ी स्‍थानांतरित होता रहता है। दरअसल पेरंट्स की अस्‍वस्‍थ जीवनशैली और खानपान की गलत आदतें बच्‍चों को भी प्रभावित करती हैं। इससे बच्‍चों में भी मोटापा बढ़ता है।

20-30% वजन कंट्रोल हो सकता है खानपान से।
वजन बढ़ने पर न सिर्फ शरीर का फैट बढ़ता है बल्कि कुछ मसल्‍स भी बढ़ जाती है। मसल्‍स के उत्‍तक कैलोरी बर्न करते हैं। यानी जितना ज्‍यादा मसल्‍स उतना ज्‍यादा मोटाबॉलिक रेट।


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