दोस्ती कहने में एक शब्दः है! (कविता)

दोस्ती कहने में एक शब्दः है.. पर हर इंसान का सबसे करीबी रिश्ता है…

दोस्ती सिर्फ शब्दः नहीं जिसका मै अर्थ बता सकू…
दोस्ती कोई चीज़ नहीं जिसे मै दिखा सकू…

दोस्ती है दिल का रिश्ता, जो हर रिश्ते से ऊपर है…
दोस्ती है वफ़ा की परिभाषा जो हर शब्दः से परे है….

दोस्ती मेरी भावनाओ का रूप, दोस्त मेरा आयना है…
दोस्ती मेरी दुआ रब से… दोस्त खुदा का नजराना है…

दोस्ती मेरी भक्ति है वफ़ा की… दोस्त मेरा वो खुदा है…
बुरे वक़्त मै जो बिन बोले हाथ थाम ले वो दोस्त मेरा है…

नोख जोकः रूठना मुस्कराना हर पल जिसके साथ…
दो पल भी लड़ के दूर रहना हो जैसे सजा ए मौत…

दोस्ती मेरी कहानी जीवन की, दोस्त कहानी का राजा है…
हर सुख दुःख का साथी वो मेरा… वो वफ़ा का सच्चा है…

हर शख्श चाहता है अच्छा दोस्त रहे जिंदगी मै…
हर पलके चाहती है… दोस्त का चेहरा रहे आँखों मै…

सीखा है हमने दोस्ती निभाना… कृष्णा और सुदामा से…
इक दिन हमे भी जानेगी दुनिया दोस्ती के पर्याय से…

(यह कविता Mere Best Friend के लिए है,
जिसने हर अच्छे बुरे वक़्त मै मेरा साथ दिया!
बिना किसी शर्त के… सिर्फ दिल से…)


Writer Shweta Jhanwar Bhilwara

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