बात पते की – गुस्से में अनजाने रिश्ते ना तोड़े!!

अक्सर इंसान को जब गुस्सा आता हैं, वह अपने आगे पीछे की सब भूल जाता हैं। कोई भी दूसरा इन्सान अगर गुस्से वाले से बात करे तो जो मुँह में आये जवाब दे देता हैं। अगर सामने वाला उसका अपना हैं तो २-४ बार सुन भी लेगा और उसे माफ़ कर देगा, वही अगर गुस्से में इन्सान किसी पराये या अनजान आदमी को बोल दे तो वह सामने वाले की नजर में हमेशा के लिए गिर जाता हैं। लोग उसे गुसैल के नाम से बोलने लग जाते हैं।

कभी-कभी इंसान को भावनात्मक गुस्सा रहता हैं, यह वह गुस्सा होता है- जो उसे अपनों से उम्मीद जितना प्रेम न मिलने के कारण, या अपनों कि उम्मीद पर खरा न उतरने के कारण, किसी पारिवारिक समस्या कि वजह से होता हैं, जिसका समाधान खोजना अक्सर कठिन और अपनों से उलझा हुआ होता है- ऐसे में इंसान गुस्सा तेज बोल कर नहीं दिखता, सिर्फ अन्दरूनी सोच मे रहता हैं, मन मे कश्मकश चलती रहती है।

ऐसे मे इन्सान से कोई बात का DISCUSS किया जाये तो वह जल्दी गुस्सा हो जाता है, ऐसे गुस्से मे इंसान को ध्यान रखना चाहिए कि कोई अपना जो आपके उस गुस्से का कारण नहीं है, फिर भी आपकी परेशानी से दुःखी होता हैं, जिसका आपसे निस्वार्थ रिश्ता हैं, ऐसे इन्सान को कभी आप ऐसा जवाब मत दो जो कि उसका दिल तोड़ दे।

जैसे:-

१. आप ऑफिस मे हैं, और आपके साथ वाले कर्मचारी ने किसी काम के लिए आपसे दो बात कि और आपका गुस्सा उस निकल जाये – कि तुम्हे काम आता नहीं क्या, इतने दिनों से क्या कर रहे हो, हर बात बतानी पड़ती है क्या ?? आदि । ऐसे मे आप सहकर्मी हो सकता हैं ज्यादा गुस्से मे आ जाये और आप दोनों कि गंभीर लड़ाई हो जाये। हो सकता हैं वह एक-दो बार आपको माफ़ भी कर दे.. परन्तु आप ऑफिस मे गुस्सैल के रूप मे जाने जाओगे, या फिर आप काम सही से नहीं कर पाए तो लोग आपको Mentally Tensed बोलने लग जायेंगे।

२. अगर आपका मित्र है, वह आपको शांत और दुःखी देख कर आपके दर्द का कारण पूछे और गुस्से आप मुँह उठा के बोल दो कि- “हर बात क्या तुझे बताऊ क्या?? तू अपने काम कि बात कर ना!! तुझे क्या लेना है यार, मेरी प्रॉब्लम हैं मै कर लूंगा”, do not interfere… आदि।

इस तरह का जवाब सुन के हो सकता है आपका दोस्त टूट जाये!! उसे एक दम से परायेपन का अहसास हो!! दोस्त भी समझते हैं कि हर बात शेयर नहीं होती परन्तु प्रेम से जवाब देके वह अपने दोस्त कि ख़ुशी का ध्यान रख सकता हैं। दोस्त से अपने दिल कि बात अगर उलझन ज्यादा हो तो शेयर भी कर सकता हैं। और न भी बता पाए तो गुस्से मे भी बोल सकता हैं कि यार टेंशन ज्यादा हैं, गुस्सा आ रहा ह यार खुद पर, पता नहीं क्या करूँगा… तू टेंशन ना ले दोस्त… २-४ दिन मे प्रॉब्लम सुलझा लूंगा और जरुरत लगी तो, तू हैं ना समझाने के लिए।

इन्सान से जुड़े सब रिश्तों का नाम हैं, कुदरती है, परन्तु दोस्ती और सहकर्मी हमें जीवन की राह मे साथ चलते हुए मिलते हैं। कुछ सहकर्मी छूट जाते है कुछ जीवन भर साथ काम करते हैं। कुछ दोस्त जिंदगी होते है और कुछ दोस्त EASY GOING होते हैं। सच्चे दोस्तों को तुम्हारे गुस्से से कभी फर्क नहीं पड़ेगा, पर वह अन्दर से जरूर टूट जायेंगे क्यूकि तब तक वह समझ जायेंगे की दोस्ती में विश्वास नहीं बचा, सिर्फ एक तरफा दोस्ती निभानी है।


Writer Shweta Jhanwar Bhilwara

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