पढ़ें सालों से अपनायी जाने वाली होम रेमेडीज़, घरेलू नुस्खों से कैसे कर सकते हैं असाध्य बीमारियों का ईलाज Home Remedies in Hindi के फायदे, Gharelu Nuskhe in Hindi,

बथुआ (Bathua / चाकवत) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है। बथुआ की साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से तक समाप्‍त किया जा सकता है।
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तिल 3 प्रकार के होते है। सफेद, काले और लाल। आयुर्वेद के अनुसार सभी तिलों की किस्‍मों में काले तिल सर्वश्रेष्‍ठ हैं। ऐसे में कई औषधियों के निर्माण में काले तिल का सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसमें कैल्शियम काफी होता है और इसके तेल से बने पदार्थ बेहद उपयोगी होते है जो खासकर बच्‍चों
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अलसी में मौजूद पोषक तत्‍व और खूबियों को देखते हुए डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे सुपरफूड का दर्जा दिया है। अलसी के बीच में ओमेगा-3, फायबर, प्रोटीन, विटामिन-बी, मैग्‍नीशियम, आयरन, कॉपर, पोटैशियम की अच्‍छी मात्रा पाई जाती है। इसके साबुत बीज, पाउडर और तेल तीनों रूपों में लिया जा सकता है। जानते हैं इसके फायदे और इसे
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नीम का पेड़ न केवल छाया देने के काम आता है बल्कि इसकी पत्तियां व टहनियां आपको रोगों से बचाने में उपयोगी हो सकती हैा • नीम एक प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में काम करता है। इसके कोई द़ष्‍प्रभाव नहीं होते हैं। यह शरीर के रक्‍त को शुद्ध करने का काम करता है। • नीम
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यूं तो हिचकी आना सामान्‍य बात होती है, लेकिन लगातार हिचकी आना एक तरह की बीमारी होती है। ऐसी हिचकी को रोकना मुश्‍किल होता है। कई बार गले में कुछ फंसने, मौसम में बदलाव या तेज मिर्च मसाला खाने से हिचकियां शुरू हो जाती हैं। इससे बचने के लिए कुछ घरेलु नुस्‍खे अपनाए जा सकते
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गिलोय उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने के लिए शर्करा का स्‍तर बनाए रखने में मदद करती है। यह दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है। आयुर्वेद हो या एलोपैथी गिलोय के फायदों पर सभी एकमत हैं। दुनिया भर में हुए शोधों में साबित हो चुका है कि गिलोय किसी अमृत से कम
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काले चने साबुत या अंकुरित दोनों ही फायदेमंद है। कब्‍ज, डायबिटीज, एनिमिया, हृदय रोगियों के लिए काला चना लाभदायक है तो त्‍वचा निखारता है और कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर घटाता है। कई शोधों में यह साबित हो गया है कि काले चने का अगर नियमित सेवन किया जाए तो कई बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है।
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जानें वायरल बुखार का घरेलू उपचार वर्तमान में अभी मौसमी बुखार से पूरा प्रदेश ग्रसित है। इस वायरस का प्रभाव समाप्‍त होने के बाद होता है। इसमें आयुर्वेद के अनुसार शरीर में कफ पित का प्रकोप होता है। जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है और मानव मौसमी बुखार (वायरल) की चपेट में आ जाता
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70 फीसदी महिलाओं को यूरिन में इंफेक्‍शन होना आम है। यह स्त्रियों को होने वाली सबसे आम समस्‍या है जिसके कई कारण हो सकते हैं। लक्षणों के रूप में यूरिन करते समय जलन होना, बार-बार यूरिन जाने की इच्‍छा होना, कमर व पीठ के आसपास दर्द होना। ऐसे में सावधानी बरतने के अलावा कुछ घरेलू
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आयुर्वेद के खजाने में एक दवा यानी की हरड़ में कई बीमारियों को मात देने की क्षमता है। इन रोगों में लाभदायक:- त्‍वचा के रोग, गला बैइ जाना, पुराना बुखार, सिर के रोग, आंखों के रोग, खून की कमी, हृदय रोग, पीलिया, शरीर में सोज पड़ना, प्रमेह रोग, उल्‍टी आना, पेट में कीड़े होना, दमा,
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