Tuesday, September 25
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इतना व्यस्त न रहो की रिश्तों की मस्ती न रहे!!

आज के समय में एक प्रॉब्लम हर इन्सान के साथ रहती है, जब वह फ्री होते है और उसके साथ वाले व्यस्त होते है, तो पहेली शिकायत सामने वाले से होती है- “तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है” यह शिकायत एक पति-पत्नी में समय के साथ सबसे ज्यादा, पेरेंट्स की बच्चे के साथ जो अब बड़े हो गए है और अपने माता पिता को सिर्फ फ़ोन पर याद करते है या साथ में रहते है तो सिर्फ सुबह-शाम प्रणाम करते वक़्त देखते है, भाई की बहन के साथ जो अब ससुराल में है, दोस्तों में हमेशा रहती है।

एक पत्नी की अक्सर अपने पति से प्यार भरी शिकायत होती है की – मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं है, क्यू की पति दिन भर बाहर नौकरी करता है, घर पर जितना टाइम रहे उतना टाइम अपने बच्चो के साथ, अपनी पत्नी की काम में हेल्प करने में निकल देता है, और और दोनों थक के सो जाते है, जब तक दोनों साथ रहेंगे काम में व्यस्त रहेंगे, एक खाना बनाएगा तो दूसरा बच्चे को रखेगा, पति कपडे़ धोएगा उधर पत्नी बर्तन साफ़ करेगी, पति ऑफिस जायेगा तब वह खाना खा के चैन की सांस लेके थोड़ा सा आराम करेगी, वापस शाम तक पति के आने पर उसके गरम चपाती बना के खिलाएगी और काम निबटा के सोने की तैयारी.. कभी पति टाइम निकाल के उसे घूमने चलने को कहेगा तो पत्नी कोई न कोई काम बता के प्रोग्राम आगे करने को कहेगी और जब पत्नी के पास टाइम होगा तब पति को टाइम नहीं मिल रहा होगा और वह दोनों वापस एक दूजे को टाइम नहीं दे पाएंगे।

कितना प्यार भरा रिश्ता है न ये, दोनों व्यस्त है एक दूजे के लिए, पर ये व्यस्तता वक़्त के साथ ज्यादा बढ़ जाती है तो दोनों में वो रिश्तें कि मिठास भी कम होने लगती है, उम्रः के साथ एक दूसरे के लिए टाइम बढ़ना चहिये। क्यू कि उम्रः के साथ हमारी इमोशनल जरुरत बढ़ने लगती और शारीरिक थकान ज्यादा होने लगती है, ऐसे में अगर अपने का भावनात्मक सहयोग नहीं मिलता है तो ख़ुशी कि जगह एक अजीब सा खिंचाव बढ़ता चला जाता है, जो किसी रिश्तें के लिए अच्छा नहीं होता।

शिकायत वक़्त के साथ बढ़नी नहीं कम होनी चहिये,
इसके लिए प्रयास दोनों को ही करने होंगे:-

जैसे दोनों सुबह जल्दी उठे और अपने रूटीन वर्क जल्दी और थोड़ा फुर्ती से पूरा करे, पत्नी जानती है कि ऑफिस के टाइम को कम नहीं किया जा सकता सो उसे ही पति के आने तक अपना पूरा काम निबटा के साथ में डिनर करें। दोनों एक दूसरे कि ख़ुशी का ध्यान रखते हुए लंच और डिनर में पसंदीदा खाना खाये। दोनों अपने लिए क़्वालिटी टाइम निकाले। जो इच्छा है एक दूसरे की व्यक्तिगत उन्हें भी पूरा करे, जीवन सबको एक ही मिला है, जिसे अपने लोगो के साथ प्यार से जिए, ताकि जल्दी थकान नहीं बल्कि खुशिया बढे़।


Writer Shweta Jhanwar Bhilwara

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