आज के समय में हम देखते है की रिश्तों में पहले जितनी मिठास और भावनाये नहीं रही। आखिर इसकी क्या वजह है… अगर थोड़ा सा सोचे तो पाएंगे की रिश्तों में वचन बध्यता का अभाव हो रहा है। आज की पीढ़ी अपने रिश्तों को नहीं समझती और न ही रिश्तों का महत्व। अगर हम सब
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दोस्‍तों अगर आपकों अपनी जिंदगी में सफल बनना है तो, आपको मेहनत, लग्‍न के साथ साथ आपनी आदतों को भी सुधारना पडेगा क्‍योकि हमारी आदतें ही हमारें जीवन को दिशा प्रदान करती है। आपको एक छोटी सी कहानी के जरिये हम यह बताने की कोशिश करते है कि कैसे आदतें हमारी सफलता में मददगार साबित
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बहुत बार हम कुछ ऐसा कर देते हैं या बोल देते हैं जिसके लिए हमें बाद में बहुत खेद और पश्चाताप होता है। खासकर तब जब आपने किसी अपने का दिल दुखाया हो। रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय, टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाय। आपको हम 5 बातें बताते है
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घनश्याम दास जी बिड़ला (G.D. Birla) द्वारा अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला (B.K. Birla) के नाम 1934 में लिखा गया एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए। चि. बसंत… यह जो लिखता हूँ उसे बड़े होकर और बूढ़े होकर भी पढ़ना, अपने अनुभव की बात कहता हूँ। संसार में मनुष्य
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एक बार एक अध्यापक कक्षा में पढ़ा रहे थे। अध्यापक ने कागज़ के टुकडे बाँट कर सब बच्चों से कहा कि सब लोग अपने-अपने नाम की एक पर्ची बनायें। सभी बच्चों ने तेजी से अपने-अपने नाम की पर्चियाँ बना लीं और टीचर ने वो सारी पर्चियाँ लेकर एक बड़े से डब्बे में डाल दीं। अब
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बहाना 1 :- मेरे पास धन नही! जवाब :- इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे। बहाना 2 :- मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी! जवाब :- लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी। बहाना 3 :-
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श्रद्धा, विश्वासः, सबूरी कितने सुन्दर तीन शब्दः में पूरी जिंदगी का राज बता दिया – साईबाबा ने… कलयुग में यह तीन शब्दः अगर जीवन में उतर ले तो सब कुछ काफी आसान लगने लगेगा। परिवार संगठित और समाज और राष्ट्र संपन्न … श्रद्धा:- भावार्थ रूप में – हमारी आस्था, आदर, और आंतरिक झुकाव, निस्वार्थ प्रेम।
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1. जहां पहले माँ पिता के चरणों में स्वर्ग होता था। आज वहां माता पिता घर में बोझ लगते है। बच्चों को उनका होना उनकी आजादी में रुकावट लगती है। २. जहां पहले बेटियां पिता के सामने नजरे झुका के बात करती थी। आज नजर उठा के जवाब देना अपनी मोर्डेन सोच बोलती है! ३.
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आज की भागती दौड़ती जिंदगी में अगर किसी से कहे की धैर्य रखना सीखो, लोग इसे बड़े हल्के ले लेते है, उन्हें लगता है जैसे दुनिया इतनी तेज और धीरज रखने की बात करते है। पर यह वाकई अद्भुत सत्य है हम थोड़ा सा धैर्य रख के बड़ी से बड़ी समस्या सुलझा सकते है! जैसे
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