करवा चौथ व्रत:- कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की चंद्रोदय व्‍यापिनी चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है। पति के स्‍वस्‍थ रहने, दीर्घायु होने एवं अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति के लिए इस दिन चंद्रमा की पूजा-अर्चना की जाती है। करवा चौथ व्रत को ‘कर्क चतुर्दशी’ के नाम से भी जाना जाता है।
Complete Reading

करवाचौथ का व्रत निर्जला होता है यानी आपको पूरे दिन न कुछ खाना होता है और न कुछ पीना होता है तो कई महिलाएं इसके बाद बीमार हो जाती है। ऐसे में व्रत को पूरी आस्‍था से करने के बाद आपकी ऊर्जा में कमी न हो और न ही आप बीमार पड़ें, इसके लिए कुछ
Complete Reading

जिसका भी जन्‍म हुआ है उसकी मृत्‍यु अवश्‍य ही होगी। जन्‍म और मृत्‍यु के बीच जो भी महत्‍वपूर्ण घटनाएं घटती है वह है जीवन कहलाती है। अधिकांश लोग जान ही नहीं पाते कि जीवन को जीवन कैसेट बनाया जाए? ऐसे लोग जन्‍म और मृत्‍यु को ही जीवन का हिस्‍सा समझ लेते हैं। जीते तो पशु
Complete Reading

प्रदोष व्रत करने के लिए उपासक को त्रयोदशी (हिंदू पंचांग की तेरहवीं तिथि को त्रयोदशी कहते हैं) के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए। नित्‍यकर्मों से निवृत्‍त हाेकर, भगवान श्री भोलेनाथ का स्‍मरण करें। इस व्रत में आहार नहीं लिया जाता है। पूरे दिन उपवास रखने के बाद सूर्यास्‍त से एक घंटा पहले, स्‍नान
Complete Reading

होलिका पर्व प्रदोष व्‍यापिनी फाल्‍गुन पूर्णिमा के दिन भद्रारहित काल में होलिका दहन किया जाता है। दहन से पूर्व और भद्रा समय के बाद होली पूजन किया जाना चाहिए। भद्रा के मुख का त्‍याग करके निशा मुख में होली पूजन फलदायक होता है। दहन के बाद होलिका में जिन वस्‍तुओं की आहुति दी जाती है,
Complete Reading

Create Account



Log In Your Account



error: Content is protected !!