आंख फड़कने में घरेलू उपचार!!

आंख फड़कने के कारण कैफीन, स्‍ट्रेस, एलर्जी और ड्राई आई भी हो सकते हैं। आंख फड़कना सामान्‍य समस्‍या है, जो स्‍वत: ही कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, लेकिन यह समस्‍या कई दिनों तक लगातार बनी रहे तो, तो चिकित्‍सक से उचित सलाह अवश्‍य लेनी चाहिए। यह क्रोनिक मूवमेंट डिस्‍ऑर्डर भी हो सकता है।
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बथुआ (Bathua / चाकवत) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है। बथुआ की साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से तक समाप्‍त किया जा सकता है।
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तिल 3 प्रकार के होते है। सफेद, काले और लाल। आयुर्वेद के अनुसार सभी तिलों की किस्‍मों में काले तिल सर्वश्रेष्‍ठ हैं। ऐसे में कई औषधियों के निर्माण में काले तिल का सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसमें कैल्शियम काफी होता है और इसके तेल से बने पदार्थ बेहद उपयोगी होते है जो खासकर बच्‍चों
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अलसी में मौजूद पोषक तत्‍व और खूबियों को देखते हुए डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे सुपरफूड का दर्जा दिया है। अलसी के बीच में ओमेगा-3, फायबर, प्रोटीन, विटामिन-बी, मैग्‍नीशियम, आयरन, कॉपर, पोटैशियम की अच्‍छी मात्रा पाई जाती है। इसके साबुत बीज, पाउडर और तेल तीनों रूपों में लिया जा सकता है। जानते हैं इसके फायदे और इसे
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भारतीय भोजन का प्रमुख अंग है लाल मिर्च। कई लोग समझते हैं लाल मिर्च सेहत के लिए हानिकारक है लेकिन ऐसा नहीं है। लाल मिर्च में पाए जाने वाले तत्‍व सेहत के लिए फायदेमंद है। वजन कम करने में लाल मिर्च सहायक है। लाल मिर्च कैलौरी बर्न करने में मददगार होती है। इसमें ऐसे तत्‍व
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सूरजमुखी के बीज स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। दरअसल सूरजमुखी के बीजों में कोलेस्‍ट्रॉल और सोडियम की मात्रा कम होती है। साथ ही इनमें विटामिन बी6, थाइमिन, मैग्‍नीशियम, काॅपर, फॉस्‍फोरस, मैंगनीज, और सेलेनियम के अलावा विटामिन ई ( अल्‍फा टोकोफेरॉल) भी बहुत उच्‍च मात्रा में पाया जाता है। इसलिए अपनी बॉडी में
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स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति के शरीर में लोहे की मात्रा वजन के अनुसार 3-5 ग्राम होनी चाहिए। लेकिन जब शरीर में यह मात्रा कम हो जाती है तो व्‍यक्ति में हीमोग्‍लोबिन बनना कम हो जाता है जो खून की कमी दर्शाता है। मेडिकली इसे एनीमिया (Anemia) कहते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा की कमी होने के साथ
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अक्‍सर लोगों को मौसम में थोड़े से परिवर्तन से भी जुकाम जैसी समस्‍या हो जाती है और उनकी नाक बंद हो जाती है, लेकिन ऐसी स्थिति लंबे समय तक रहती है तो इसे हल्‍के में नहीं लेना चाहिए। यह साइनस की समस्‍या भी हो सकती है। साइनस में नाक बहती है, आंखों में दर्द होता
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सर्दी-जुकाम खांसी श्‍वसन प्रणाली के अवयवों से संबंधित बीमारियां हैं। सर्दी नाक से शुरू होकर गला, श्‍वास नलिकाएं कान तक पहुंचती है और फेफडों में पहुंचकर अस्‍थमा में तब्‍दील हो जाती है। ऐसे में प्राकृतिक उपचार की मदद से राहत पाई जा सकती है। क्‍या है लक्षण:- नाक में खुश्‍की, छीकों का आना, गले में
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आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में कभी न कभी हर एक व्‍यक्ति थकान से प्रभावित होता है। तो जानिए धकावट को दूर करने के कुछ घरेलू उपाय:- खजूर को खाने से शरीर की थकावट दूर हो जाती है। थकावट होने पर पैरों में ग्लिसरीन की मालिश करने से लाभ होता है। शरीर में
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