Health Care

तोहफा – सविता मिश्रा

तोहफा -सविता मिश्राडोरबेल बजी जा रही थी। रामसिंह भुनभुनाए 'इस बुढ़ापे में यह डोरबेल भी बड़ी तकलीफ देती है। 'दरवाजा खोलते ही डाकिया पोस्‍टकार्ड और एक लिफाफा पकड़ा गया।लिफाफे पर बड़े अक्षरो

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नसीहत – लघुकथा

नसीहत मुंबई स्‍टेशन पर खड़ी ट्रेन का इंजतार कर रही थी। मैं प्‍लेटफॉर्म पर बैठी पत्रिका पढ़ने का प्रयास कर रही थी। एक बच्‍चे की गिड़गिड़ाहट ने तन्‍मयता भंग की। सुबू को भूक्‍खा हैं मेम साब! पेट के वास...

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पढे़ं दो लघुकथाएं असली चेहरा और ज्ञान!

असली चेहरा! अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस पर सोसाइटी की चार वायोव़द्ध महिलाओं को संमानित करके सोसाइटी के सचिव भरत जी ने तमाम महिलाओं के मन में अपनी एक खास जगह बना ली थी। अपने उद्बोधन में जब उन्‍होंने कहा

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बासी रोटी! – हृदय को छूने वाली एक छोटी कहानी!

रात के दो बजे एक कुत्ता झोपड़ी के आगे उदास बैठा था!दूसरा कुत्ता आया और बोला:- रोज तो खूब भौकता है, आज चुप क्‍यों बैठा है?उदास कुत्ता बोला:- रोटी तो कई बार नहीं मिलती है.... सामने वाली उस झोप

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गूंज – लधु कथा!

बीती रात तनाव भरी गुजरने की वजह से सुबह आंख करीब दस बजे खुली। बच्‍चे कॉलेज जा चुके थे। बॉस के शब्‍द अभी भी उसके कानों में गूंज रहे थे '' प्रकाश जी आप आदमी हैं या गधे, एक काम आपसे ढंग से नही होता!'' उ

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