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Teacher Student Relationship Short Moral Stories in Hindi

एक प्राथमिक स्कूल मे अंजलि नाम की एक शिक्षिका थीं वह कक्षा 5 की क्लास टीचर थी उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा मे आते ही हमेशा "LOVE YOU ALL" बोला करतीं थी।मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं बोल रही । वह कक...

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दो लघु कथाएँ – अन्‍नदाता का अधिकार & वे चार।

कथा 1 - अन्‍नदाता का अधिकार मिश्राजी अपने दोस्‍त के यहां आए थे। उनकी बेटी से बोले- 'बेटा अब एमबीबीएस कंप्‍लीट होने के बाद आपको सरकारी अस्‍पताल में जॉइनिंग मिल गई है। पोस्टिंग कहां हुई है?'" ग्राम

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यह रिश्ता क्या कहलाता है?

यह कहानी नहीं एक सच्चाई है, आज के रिश्तों की..एक व्यक्ति रामकिशन जिसने 14 साल की उम्रः से एक छोटे से किराना के काम से व्यवसाय शुरू किया। पिता की मृत्‍यु चूँकि पहले ही हो चुकी थी, उनके नाना ने उन्ह...

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किसी के प्रति कोई निर्णय लेने से पहले सौ बार सोचें!

एक समय की बात है...एक सन्त प्रात: काल भ्रमण हेतु समुद्र के तट पर पहुँचे...समुद्र के तट पर उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था!पास में शराब की खाली बोतल पड़...

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चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

एक 5 साल का लड़का और 3 साल लड़की जो की भाई-बहन थे दोनों साथ में बाजार से गुजर रहे थे। अचानक लड़के को लगा कि, उसकी छोटी बहन पीछे रह गई है। उसने रुकाकर, पीछे पलटकर देखा तो उसे दिखा कि उसकी उसकी बहन एक ख...

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कर्मों का लेखा जोखा!!

एक बार एक बीबी थी। बहुत ज्यादा भजन सिमरन करना सेवा करनी किसी को कभी गलत न बोलना, सब से प्रेम से मिलकर रहना उस की आदत बन चुकी थी। वो सिर्फ एक चीज़ से दुखी थी के उस का आदमी उस को रोज़ किसी न किसी बात पर...

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हंस और हंसिनी की कहानी (जरूर पढ़ें)

ये कहानी आपको झकझोर देगी 2 मिनट में एक अच्छी सीख अवश्य पढ़ें...एक बार की बात है 1 हंस और 1 हंसिनी थी वे दोनो हरिद्वार में रहते थे। वे दोनों एक बार भटकते-भटकते एक उजड़े व बहुत ही वीरान से रेगिस्ता...

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मृत्यु को याद रखें!!

एक धनवान व्यक्ति था, वह बडा ही विलासी था। हर समय ही उसके मन में भोग विलास सुरा-सुंदरियों के विचार ही आते रहते। वह खुद भी इन विचारों से बहुत परेशान था, उसने बहुत प्रयास किये की वे विचार उसे छोड़ दें पर...

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वसीयत और नसीहत! Short Moral Story

एक बहुत ही दौलतमंद व्‍यक्ति ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, कि बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, यह मेरी इक्छा जरूर पूरी करना।पिता के मरते ही नहलाने...

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अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)

उभरती बुराई ने दबती सी अच्छाई से कहा, कुछ भी हो, लाख मतभेद हो पर है तू मेरी सहेली। मुझे अपने सामने तेरा दबना अच्छा नही लगता। अलग खड़ी न हो मुझमें मिल जा। मै तुझे भी अपने साथ बढ़ा लूंगी, समाज में फैला लू...

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