एक चुटकी ज़हर रोजाना!!

गीता नामक एक युवती का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास के साथ अपने ससुराल में रहने लगी। कुछ ही दिनों बाद गीता को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। सास पुराने ख़यालों की थी और बहू नए विचारों वाली। गीता और उसकी सास का आये
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एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति अपने गुरु जी के पास पहुंचा और बोला:- “गुरूजी जी मैं जिंदगी से बहुत परेशान हूँ, मेरी जिंदगी में बहुत परेशानियां और तनाव के आलावा कुछ भी नहीं है। कृपया मुझे सही राह दिखाइये!”गुरुजी ने एक गिलास में पानी भरा और उसमें एक मुट्ठी नमक डाल दिया, फिर
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एक आदमी एक सेठ की दुकान पर नौकरी करता था। वह बेहद ईमानदारी और लगन से अपना काम करता था। उसके काम से सेठ बहुत प्रसन्न था और सेठ द्वारा मिलने वाली तनख्वाह से उस आदमी का गुज़ारा आराम से हो जाता था। ऐसे ही दिन गुज़र रहे थे। एक दिन वह आदमी बिना बताए
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एक बार यूनान के मशहूर दार्शनिक सुकरात भ्रमण करते हुए एक नगर में गए। वहां उनकी मुलाकात एक वृद्ध सज्जन से हुई, दोनों आपस में काफी घुलमिल गए। वृद्ध सज्जन आग्रहपूर्वक सुकरात को अपने निवास पर ले गए। भरा-पूरा परिवार था उनका, घर में बहु-बेटे, पौत्र-पौत्रियां सभी थे। सुकरात ने बुजुर्ग से पूछा:- ‘आपके घर
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देवदूत ने सृष्टि के निर्माता के कक्ष में आते हुए कहा:- “भगवान क्या लिख रहे हो, इतनी देर से?” भगवान् ने उसकी तरफ ध्यान दिए बगैर लिखना चालू रखा। देवदूत ने कहा:- “सो जाइये भगवान् कई दिनों से आपने तनिक भी विश्राम नहीं किया, क्या लिख रहे है आप?” भगवान् :- “भाग्य” देवदूत :- “किसका?”
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एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया। मुझसे कहा- आज माँ का श्राद्ध है, माँ को लड्डू बहुत पसन्द है, इसलिए लड्डू लेने आया हूँ! मैं आश्चर्य में पड़ गया, अभी पाँच मिनिट पहले तो मैं उसकी माँ से सब्जी मंडी में मिला था (मैं कुछ और कहता उससे पहले ही खुद उसकी माँ
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एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। वह बैल घंटों ज़ोर-ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था;
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बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था। उनमे
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एक बालक अपनी दादी मां को एक पत्र लिखते हुए देख रहा था। अचानक उसने अपनी दादी मां से पूंछा, “दादी मां!, क्या आप मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हैं? आप मेरे बारे में लिख रही हैं, ना” यह सुनकर उसकी दादी माँ रुकीं और बोलीं, बेटा मैं लिख तो तुम्हारे बारे में
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एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला… अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला “अरे छोटू, कहाँ जा रहे हो तुम?” “मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ “, चीता रोमांचित होते हुए बोला! हा-हा-हा लकड़बग्घा हंसा और बोला अभी तो तुम्हारे खेलने-कूदने
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