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करवा चौथ व्रत की पूजन विधि एवं कथा !!

करवा चौथ व्रत की पूजन विधि एवं कथा !!

Festivals / Tyohar
करवा चौथ व्रत:- कार्तिक मास के कृष्‍ण पक्ष की चंद्रोदय व्‍यापिनी चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है। पति के स्‍वस्‍थ रहने, दीर्घायु होने एवं अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति के लिए इस दिन चंद्रमा की पूजा-अर्चना की जाती है। करवा चौथ व्रत को 'कर्क चतुर्दशी' के नाम से भी जाना जाता है। उत्‍तरी भारत में यह व्रत आज श्रद्धा व विश्‍वास की सीमाओं से आगे निकलकर, नए रंग में रंग गया है। करवा चौथ आज अपने प्रेमी, होने वाले पति और जीवनसाथी के प्रति भावनाएं प्रदर्शित करने का पर्याय बन गया है। आज यह केवल एक सुहागन का व्रत ही न रहकर, पति के द्वारा अपनी पत्‍नी के लिए रखा जाने वाला पहला व्रत बन गया है। करवा चौथ के व्रत ने बाजारीकरण को कितना लाभ पहुंचाया है, यह तो स्‍पष्‍ट है, परंतु यह व्रत वैवाहिक जीवन को सफल और खुशहाल बनाए रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्‍योंकि करवा चौथ अब केवल एक लोक परंपरा न
करवाचौथ व्रत में सेहत को न करें नजरअंदाज!!

करवाचौथ व्रत में सेहत को न करें नजरअंदाज!!

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करवाचौथ का व्रत निर्जला होता है यानी आपको पूरे दिन न कुछ खाना होता है और न कुछ पीना होता है तो कई महिलाएं इसके बाद बीमार हो जाती है। ऐसे में व्रत को पूरी आस्‍था से करने के बाद आपकी ऊर्जा में कमी न हो और न ही आप बीमार पड़ें, इसके लिए कुछ बातों का ध्‍यान रखना बेहत जरूरी है। अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है तो जान लें कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि आपने व्रत तो रखा लेकिन खुद की सेहत का ख्‍याल नहीं रखा। जब आप करवाचौथ का व्रत करती हैं तो उससे एक दिन पहले और व्रत खोलने के बाद आपको सही आहार लेना होता है। इससे आपके शरीर में किसी चीज की कमी नहीं होती और आप आराम से अपना व्रत पूरा कर पाती है।जानते है कि करवाचौथ व्रत से पहले और बाद में क्‍या खाना-पीना चाहिए!व्रत से पहले क्‍या न खाएं:- वैसे तो करवाचौथ के दिन सुबह उठकर अधिकतर महिलाएं चाय या दूध पीती हैं और उसके बाद निर्जला व्रत शुरू करती है। आप
हनुमान जयंती खास – हनुमानजी की ये चार बातें जीवन में उतारें!

हनुमान जयंती खास – हनुमानजी की ये चार बातें जीवन में उतारें!

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जिसका भी जन्‍म हुआ है उसकी मृत्‍यु अवश्‍य ही होगी। जन्‍म और मृत्‍यु के बीच जो भी महत्‍वपूर्ण घटनाएं घटती है वह है जीवन कहलाती है। अधिकांश लोग जान ही नहीं पाते कि जीवन को जीवन कैसेट बनाया जाए? ऐसे लोग जन्‍म और मृत्‍यु को ही जीवन का हिस्‍सा समझ लेते हैं। जीते तो पशु भी है लेकिन, जीवन को जानने की संभावना ईश्‍वर ने सिर्फ मनुष्‍य को दी है। जन्‍म-मृत्‍यु के बीच में जीवन कैसा तैयार किया जाता है, इसका जीता-जागता उदाहरण है हनुमानजी। जिस-जिस धर्म में जो-जो भी संदेश हैं वे समूचे व्‍यक्तित्‍व यानी हनुमानजी में उतरे हैं। आज उनकी जयंती है। अपने जन्‍म के उद्देश्‍य को समझने के साथ उनका जन्‍मोत्‍सव मनाया जाए। हनुमान जयंती का मतलब ही होगा कि सचमुच जान सकें कि इस धरती पर हम मनुष्‍य बनाए क्‍यों गए हैं। हनुमानजी ने बचपन में मां से पूछा था- मैं बड़ा होकर क्‍या बनूंगा? तब उनकी मां अंजनी ने कहा था कि चार काम
जानें प्रदोष व्रत के बारे में!

जानें प्रदोष व्रत के बारे में!

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प्रदोष व्रत करने के लिए उपासक को त्रयोदशी (हिंदू पंचांग की तेरहवीं तिथि को त्रयोदशी कहते हैं) के दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए। नित्‍यकर्मों से निवृत्‍त हाेकर, भगवान श्री भोलेनाथ का स्‍मरण करें। इस व्रत में आहार नहीं लिया जाता है। पूरे दिन उपवास रखने के बाद सूर्यास्‍त से एक घंटा पहले, स्‍नान आदि कर श्‍वेत वस्‍त्र धारण किए जाते हैं। ईशान कोण (घर का उत्तर-पूर्व कोना) की दिशा में किसी ए‍कांत स्‍थल को पूजा करने के लिए प्रयोग करना विशेष शुभ रहता है।पूजन स्‍थल को गंगाजल या स्‍वच्‍छ जल से शुद्ध करने के बाद गाय के गोबर से लीपकर मंडप तैयार किया जाता है। इस मंडप में पद्म पुष्‍प की आकृति पांच रंगों का उपयोग करते हुए बनाई जाती है। प्रदोष व्रत की आराधना करने के लिए कुशा के आसन का प्रयोग किया जाता है।इस प्रकार पूजन क्रिया की तैयारियां कर उत्‍तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। उपासक को
जानें होलिका पर्व और पूजा की विधि।

जानें होलिका पर्व और पूजा की विधि।

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होलिका पर्व प्रदोष व्‍यापिनी फाल्‍गुन पूर्णिमा के दिन भद्रारहित काल में होलिका दहन किया जाता है। दहन से पूर्व और भद्रा समय के बाद होली पूजन किया जाना चाहिए। भद्रा के मुख का त्‍याग करके निशा मुख में होली पूजन फलदायक होता है। दहन के बाद होलिका में जिन वस्‍तुओं की आहुति दी जाती है, उनमें कच्‍चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्‍तधान्‍य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग है। (सप्‍त धान्‍य हैं - गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल, और मसूर।)पूजा विध्‍ाि:- होलिका दहन से पहले होली की पूजा की जाती है। पूजा करते समय व्‍यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहए। पूजा के लिए निम्‍न सामग्री प्रयोग करनी चाहिए- एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्‍प, कच्‍चा सूत, गुड़, खड़ी हल्‍दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल। इसके अतिरिक्‍त नई फसल के धान्‍यों जैसे- गेहूं की बालियां भी स
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