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इन बजहों से अच्‍छी होती है ग्रीन टी!

इन बजहों से अच्‍छी होती है ग्रीन टी!

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एंटी ऑक्‍सीडेंट्स से भरी ग्रीन टी कोलेस्‍ट्रोल और ब्‍लड प्रेशर को कम करने में मदद करती हैं। सेहत के प्रति सजग रहने वाले लोग ग्रीन टी का सेवन विशेष रूप से करते हैं। यह शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी होती है। गीन टी में पॉलीफिनॉल्‍स भरपूर मात्रा में होता है। पॉलीफिनॉल्‍स असल में एंटी ऑक्‍सीडेंट्स एवं एंटी इंफ्लेमेटरी होते हैं। मधुमेह रोगियों के लिए ग्रीन टी को बहुत उपयोगी बताया गया है। इसके अलावा ग्रीन टी वजन कम करने में भी सहायक होती है। दिल के रोगियों को भी ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए। जानते हैं ग्रीन टी से मिलने वाले स्‍वास्‍थ्‍य लाभ:- स्‍किन इंफलेमेशन में त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए ग्रीन टी का सेवन लाभकारी है। यह सोरायसिस एवं डेंड्रफ की समस्‍याओें को दूर करने में मददगार हो सकती है। कुछ एनिमल स्‍टडीज से सामने आया है कि इंफ्लेमेटरी स्‍किन डिजीज से त्‍वचा में रूखापन, लाल ह
सर्दी के मौसम में सूप जरूर पीएं!

सर्दी के मौसम में सूप जरूर पीएं!

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हमें अपने खानपान में पौष्टिक चीजों को अहमियत देनी चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि हमारे रूटीन के खानपान में पौष्टिक तत्‍व शामिल हों। खानपान में एक महत्‍वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह मौसम के मुताबिक होना चाहिए। मौसम के अनुसार खानपान हमारे लिए अधिक फायदेमंद होता है। सर्दी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे में हमें भी सर्दी से जुड़े खानपान पर ध्‍यान देना चाहिए। सर्दी के खानपान में सूप को भी प्राथमिकता से शामिल करना चाहिए। सूप हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए काफी फायदेमंद होता है। स्‍वीट कॉर्न सूप स्‍वीट कॉर्न सूप न्‍यूट्रीएंट्स और एंटीऑक्‍सीडेंट्स तत्‍वों से भरपूर होता है। यह सूप हार्ट आर्टरीज के ब्‍लॉकेज दूर करने में मददगार होता है। हाइपर टेंशन को कम कर साइलेंट हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है। फेफड़ों को स्‍वस्‍थ रखने में मददगार होता है। सांस संबंधी समस्‍याओं में राहत देता है। मस्तिष्‍क की नसों क
चावल का पानी बालों को झड़ना रोकेगा स्किन बनाएगा मुलायम

चावल का पानी बालों को झड़ना रोकेगा स्किन बनाएगा मुलायम

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बालों की हर समस्‍या दूर करने के लिए चावल का पानी फायदेमंद है। जो लोग बालों के झड़ने या डैंड्रफ से परेशान हैं, वे इस पानी का इस्‍तेमाल करें तो लाभ होता है। बालों के लिए फायदे:- » पोषक तत्‍वों से भरपूर। चावल के पानी में मौजूद अमीनों एसिड से हेयर फॉल की समस्‍या दूर होती है। इस पानी में विटामिन-बी, सी और ई मौजूद है, जो बालों को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप बाल धोने के बाद चावल के पानी से एक बार फिर बालों को धो लें इससे कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आने लगेगा।» दो मुंहे बाल होंगे कम। इस मौसम में बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं। ऐसे में आपके बालों को भरपूर मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है। जो चावल के पानी में मौजूद रहता है। इससे दो मुंहे बालो की प्रॉब्‍लम भी दूर होती है।» शाइनिंग बढ़ाता है। बालों को चमहदार बनाने के लिए आप चावल के पानी का हेयर मास्‍क इस्‍तेमाल क
स्‍लीप योग- नींद पूरी लें, शरीर करता है अंदरूनी तंत्र की सफाई

स्‍लीप योग- नींद पूरी लें, शरीर करता है अंदरूनी तंत्र की सफाई

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प्रकृति के चक्र की तरह ही नींद का भी चक्र होता है। शरीर तय समय पर आराम चाहता है। नींद पूरी नहीं होने से थकान, चेहरे पर झुरियां, आंखों के नीचे काला घेरा, शरीर में दर्द, अपच, कब्‍ज, तनाव व वजन बढ़ने जैसी समस्‍याएं होती हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घटती है।जब हम सोते हैं तो शरीर के अंदरूनी अंग विषाक्‍त पदार्थों को साफ करने का काम करते हैं। यही वजह है कि जब सुबह हम उठते हैं तो हल्‍का महसूस करते हैं। नींद सिर्फ अंदरूनी अंगों ही नहीं त्‍वचा को भी तरोताजा रखती है। उम्र के अनुसार नींद:- नवजात (0-3 माह) 14 से 17 घंटे घ्‍यान दें: 19 घंटे से ज्‍यादा न सोने दें।शिशु (4-11 माह) 12 से 15 घंटे जरूरी बात: 10 घंटे से कम व 18 घंटे से अधिक न सोने दें।बच्‍चा (1-2) 11 से 14 घंटे जरूर जानें: 9 घंटे से कम, 16 घंटे से अधिक नुकसानदेय।स्‍कूल पूर्व की उम्र (3-5 साल) 10 से 13 घंट
सर्दी के मौसम की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सलाह!

सर्दी के मौसम की स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी सलाह!

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बाइक से चलें तो हेलमेट के साथ मास्‍क भी लगाएं। सर्दी की शुरूआत में नमी से संक्रमण बढ़ता है। पसीना आना, ठंड लगना मौसमी बीमारी के मुख्‍य कारणों में से एक है। सर्दी-खांसी-जुकाम जल्‍दी होने लगाता है। युवा बाइक से चलें तो हेलमेट के साथ मास्‍क लगाएं। 5 साल से कम उम्र के बच्‍चों को नहलाने के बजाय उसे कपड़ा गीला कर पोंछें।इस मौसम में दिन-रात के तापमान का अंतर तेजी से कम हो जाता है। इस वजह से एलर्जी व वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, गला खराब होने जैसी दिक्‍कतें होती हैं। इसका सबसे ज्‍यादा असर अब युवाओं में देखने को मिल रहा है। उन्‍हें एलर्जी सहित कई शरीरिक समस्‍याएं होती हैं। बुजुर्गों में युवाओं की जुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे में उनमें खून की कमी, मधुमेह, हृदय संबंधी समस्‍या होने के कारण संक्रमण की आशंका ज्‍यादा रहती है। उच्‍च रक्‍तचाप से दि
रिसर्च स्‍टोरीज एंड एक्‍सपर्ट कमेंट!!

रिसर्च स्‍टोरीज एंड एक्‍सपर्ट कमेंट!!

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वायु प्रदूषण का इंसुलिन पर असर। लैंसेट प्‍लैनेट्री हेल्‍थ जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक बाहरी प्रदूषण की वजह से भी डायबीटीज हो सकता है। हवा में मौजूद प्रदूशित पार्टिक्‍यूलेट मैटर, डस्‍ट, स्‍मोक, लिक्किड ड्रॉपलेट जैसी चीजें सांस के जरिए हमारे शरीर के अंदर पहुंचकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती हैं और उसके बाद खून में पहुंचकर स्‍ट्रोक, किडनी, कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता हैं। डायबीटीज भी प्रदूषण की वजह से शरीर में जलन और सूजन महसूस होने लगती है, जिससे इंसुलिन का उत्‍पादन कम हो जाता है और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। एक्‍सपर्ट कमेंट। प्रदूषण का कई अंगों पर गलत प्रभाव पड़ता है। यह पैंक्रियाज को भी प्रभावित करता है। बीटासेल जो इंसुलिन बनाता है। उसका नंबर कम हो जाता है। प्रदूषण से शरीर में इंसुलिन रजिस्‍टेंस बढ़ने लगता है। इस वजह से किसी व्‍यक्ति को डायबिटीज हो सकता है।
खाना पचाने में मददगार आदतें!!

खाना पचाने में मददगार आदतें!!

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डिनर के 30 मिनट बाद टहलें व 45 मिनट बाद पानी पीएं पौष्टिक व लजीज भोजन करने का मतलब सिर्फ पेट भरने से नहीं होता है। अच्‍दी तरह से हजम हो, कोई तकलीफ न दे यह भी जरूरी है। भोजन से मिलने वाले पोषण पर ही हमारी सेहत की बुनियाद टिकी रहती हैस्‍वास्‍थ्‍य सिर्फ पोष्टिक भोजन पर ही निर्भर नहीं करता। यह इस पर भी निर्भर करता है कि शरीर भोजन को कितना अच्‍छे से पचाता है। पाचन वह प्रक्रिया है, जिससे शरीर ग्रहण किए गए भोजन और पेय पदार्थ को ऊर्जा में बदलता है। पाचन तंत्र के ठीक काम न करने पर भोजन बिना पचा रह जाता है, जो शरीर की प्रतिरोधाक क्षमता पर असर डालता है। इसके लिए जरूरी है रात दस बजे तक सोना, 6-8 घंटे की गहरी नींद, जंकफूड, तैलीय, उच्‍च कैलोरी वाले आहार लेने से बचें। ऐसे काम करता पाचन तंत्र भोजन जब अंदर जाता है तो वह गैस्ट्रिक जूस में मिक्‍स होता है। पेट की दीवारों पर मांसपेशियों की तीन परतें होत
पाइल्‍स की समस्‍या से बच सकते हैं!!

पाइल्‍स की समस्‍या से बच सकते हैं!!

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14 प्रतिशत शहरी लोग कब्‍ज से परेशान हैं। 10 प्रतिशत लोग पूरी दुनिया में कब्‍ज पीडि़त100 में से 70-80 प्रतिशत महिलाओं को होती है यह समस्‍या। मुख्‍य कारण पेल्विक फ्लोर मसल्‍स का प्रसव बाद कमजोर होना है।मरीज को पाइल्‍स का पता नहीं चलता, खारिश महसूस होना, मस्‍से व जोर लगाने पर खून आ सकता है। बी अवेयर कब्‍ज पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्‍यक्ति का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्‍याग में कठिनाई होती है। पेट साफ नहीं हो पाता है। ज्‍यादा जोर लगाने से भी स्‍टूल पास नहीं होता है। महिलाओं में प्रसव बाद कूल्‍हे व आस-पास की नसें कमजोर होती हैं। इसलिए पाइल्‍स की आशंका ज्‍यादा रहती है।असमय खानपान, मिर्च-मसालेदार चीजें खाने, तनाव, खराब जीवन शैली की वजह से दिक्‍कत होती है। भोजन में फाइबर व प्रोटीन युक्‍त चीजें लें। जैसी मौसमी, हरी सब्जियां, सोयाबीन, दालें, दानामेथी, अलसी के
विरुद्ध आहार भी करता है बीमार!!

विरुद्ध आहार भी करता है बीमार!!

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आयुर्वेद के अनुसार विपरीत गुण वाली चीजें एकसाथ खाने से बचें हैल्‍दी ईटिंग विरूद्ध आहार का मतलब खाने-पीने की वे चीजें जिन्‍हें एक साथ लेने से सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। घर के बुजु्र्ग भी इसीलिए कुछ चीजें एकसाथ खाने-पीने से रोकते-टोकते हैं।आहार हमारे जीवन का आधार है, लेकिन खानपान की लापरवाही के कारण अक्‍सर बीमार पड़ते हैं। स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छी जीवन शैली के साथ संतुलित भोजन बेहत जरूरी है जानते हैं आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय :- विरूद्ध आहार का मतलब - 9 गुण होते हैं हमारे भोजन में। जब इसके नौ गुणों का अवरोध-विरोध पाया जाता है तो इसे विरुद्ध आहार कहते हैं। 13 प्रकार के विटामिन, खनिज तत्व, प्रोटीन और फाइटो विटामिंस की खाने में प्रतिदिन होती है शरीर को जरूरत।चक्‍कर स्‍वाद का हो या फिर जानकारी का अभाव। जाने-अनजानें में हम कई बार विरूद्ध आहार ले लेते हैं। यदि नियमित रूप से विरूद
काम की बात – बीमारियों से बचाते हैं ये सुपरफूड!!

काम की बात – बीमारियों से बचाते हैं ये सुपरफूड!!

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सुंदर दिखने के लिए नौजवान क्‍या नहीं करते, जिम जाने, डाइट का ध्‍यान रखते हैं। स्लिम रहने के लिए लड़कियां ही नहीं गृहणियां भी तरह-तरह के फूड आजमाती है। किनुआ दक्षिण अमरीका से किनुआ आयात होता है। अमरीका में इसे सभी अनाजों की मां कहा जाता है। यह धान से छोटे आकार का होता है। इसके छिलके के नीचे चावल जैसा अनाज होता है जिसे उबालकर खाते है। इसमें वसा और ग्‍लूटन नहीं होते। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मैग्‍नीशियम, फास्‍फोरस, आयरन और जस्‍ता भी होता है। बेरीज स्‍ट्राबेरी, ब्‍लूबेरी, क्रैनबेरी स्‍वास्‍थयवर्धक होती हैं। यह मैगनीज, विटामिन सी व के और फाइबर से भरपूर हैं। डायबिटीज व वजन घटाने में फायदेमंद है। इनमें एंटीऑक्‍सीडेंट होते है, जिससे त्‍वचा निखरती है। यह कैंसर व हृदय रोगियों के लिए लाभ्‍दायक है। इसको खाने से वजन नियंत्रित रहता है। बीमारियों से भी बचाव होता है। नद्स बादाम, अखरोट, पिस्‍ता
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