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सर्दी-जुकाम में घरेलू नुस्‍खे!

सर्दी-जुकाम में घरेलू नुस्‍खे!

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इन दिनों सर्दी का प्रभाव तेज है। तेज सर्दी जहां ठिठुरन पैदा कर देती है, वहीं बीमारियों का कारण भी बनती है। तेज सर्दी की वजह सर्दी, जुकाम, गले में खराश आदि के मामले भी अधिक देखने को मिलते है। खांसी और गले में खिचखिच तो मानो इस मौसम में आम बात है। लेकिन यह सर्दी और गले की परेशानी हमें बेचैन कर देती है। ऐसे में इस परेशानी में अगर हम घरेलू नुस्‍खे भी आजमाते हैं तो यह हमारे लिए फायदेमंद हो सकते है। आइए जानते हैं सदी, खांसी की चपेट में आने पर हम इन घरेलू नुस्‍खों को अपनाकर राहत पा सकते हैं। घरेलू चीजों का इस्‍तेमाल कर हम सर्दी-जुकाम की परेशानी से राहत पा सकते हैं। नमक के गरारे एक गिलास गर्म पानी और एक चम्‍मच नमक लें। गर्म पानी में नमक मिलाकर उससे गरारे करें। जब तक आराम न मिले, तब तक दिन में दो बार गरारे करें। जुकाम होने पर गले में खराश महसूस होती है। इस अवस्‍था में अगर गर्म पानी में नमक डालकर
जब सर्दी-जुकाम और गले में संक्रमण परेशान करे।

जब सर्दी-जुकाम और गले में संक्रमण परेशान करे।

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सर्दी के मौसम में ठंडी हवा लगने से न केवल बुखार और सर्दी-जुकाम की समस्‍या होती है बल्कि गला खराब और उसमें दर्द होना आम बात है। यह केवल ठंडी चीजों के खाने से नहीं होता बल्कि ज्‍यादा गर्म खाने से भी हो सकता है। गले में संक्रमण की वजह वायरल माना जाता है लेकिन यह बैक्‍टीरिया संक्रमण से भी हो सकता है। इसलिए किसी का जूठा खाने और कपड़े के इस्‍तेमाल से बचें। बहुत ज्‍यादा गर्म और ठंडी चीजें भी एक साथ न लें। ओरल हाइजीन (मुंह की सफई) का ध्‍यान रखना चाहिए।बचाव के लिए गुनगुने पानी में सिरके की बूंदे और नमक मिलाकर रोजाना गरारे करें। ज्‍यादा समस्या हो तो हर 3 घंटे में दोबारा कर सकते हैं। इसके बाद ठंडी चीजें न लें।• रोज सुबह ब्रश करने बाद एक-एक चम्‍मच शहद-अदरक का रस लें। • गले में दर्द है तो अजवाइन, मुलैठी और नीलगिरी के तेल का भाप लें। • टॉन्सिल बढ़े हो तो कच्‍ची हल्‍दी को उबालकरए पीएं। कच्‍ची
ट्रीटमेंट नॉलेज – पथरी में फायदा करता है खट्टे फलों का जूस।

ट्रीटमेंट नॉलेज – पथरी में फायदा करता है खट्टे फलों का जूस।

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होम्‍योपैथी से- खानपान में बदलाव से पथरी की समस्‍या तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो देश में करीब 80 लाखलोगों को यह समस्‍या है। इसमें सर्जरी का जरूरत पड़ती है। लेकिन होम्‍योपैथी इलाज से न केवल सर्जरी से बचाव संभव है बल्कि बार-बार पथरी नहीं होती है। स्‍टोन मुख्‍य रूप से कैल्शियम ऑक्‍जीलेट, फॉस्‍फेट और यूरिक एसिड वाले होते हैं। इसमें 80 फीसदी कैल्शियम ऑक्‍जीलेट और फॉस्‍फेट से बनते हैं। इन पोष्‍क तत्‍वों की शरीर में अधिकता के कारण ही ये गाढ़ा होकर पथरी का रूप ले लेती हैं। इसके मुख्‍य लक्षणों में तेज दर्द और यूरिन के समय जलन होती है। इनको बार-बार होती पथरी आयुर्वेद की तरह होम्‍योपैथी में तीन प्रकृति वाले लोग होते हैं। इसमें सोरा, सिफलिस और सायकोटिक (सायकोसिस) है। जिनकी प्रकृति सायकोसिस की होती है। उनमें ही बार-बार पथरी बनती है। महिलाओं में ब्‍लैडर स्‍टोन पुरुषों में किडनी का स्
गर्दन के दर्द को न लें हल्‍के में!!

गर्दन के दर्द को न लें हल्‍के में!!

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गर्दन का दर्द दूर करने के लिए विटामिन बी कॉम्‍प्‍लैक्‍स लें, यह इंफ्लेमेशन को दूर करता है। गर्दन का दर्द कई कारणों से हो सकता है जैसे विकृत होते है डिस्‍क संबंधी रोग, गले में अकड़न, झुनझुनी, विप्‍लेश, हरनिएटेड डिस्‍क के कारण गर्दन का चोटिल होना या स्‍नायु में ऐंठन। गले के वायरस संक्रमण जैसे सामान्‍य संक्रमण के परिणामस्‍वरूप भी ग्रंथियों में सूजन और गले में दर्द की शिकायत हो सकती है। गले का दर्द टीबी एवं रीढ़ की हड्डी में संक्रमण तथा मेनिनजाइटिस की वजह से भी सकता है। इसके अलावा खेल, वाहन चालना या घुड़सवारी के दौरान हो जाने वाली दुर्घटनाओं के बाद भी गले में दर्द होता है। गले में दर्द की वजह से कई बार कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। सिरदर्द, चेहरे, कंधे में होने वाले दर्द भी गले को प्रभावित करते है। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय आजमाएं... खिंचाव से हो सकता है दर्द गले और पीठ के ऊपरी हिस्‍से
घरेलू नुस्‍खे- बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्‍सा!

घरेलू नुस्‍खे- बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्‍सा!

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बथुआ (Bathua / चाकवत) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है। बथुआ की साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से तक समाप्‍त किया जा सकता है। इससे गुर्दे में पथरी होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार बथुए में लौह, सोना, क्षार, पारा, कैरोटिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, प्रोटीन, वसा तथा विटामिन ‘C’ व ‘B – २’ पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। गैस, पेट में दर्द कब्‍ज की समस्‍या भी दूर होता है। यह नेत्र, मूत्र व पेट संबंधी विकारों में विशेष लाभदायी है।विषेष:- • बथुए के बारे में आर्युवेदाचार्यों का मानना है कि कच्‍चे बथुआ के एक एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिला कर रोजाना खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। गुर्दा,
काले तिल का सेवन हर तरह से देता है लाभ!!

काले तिल का सेवन हर तरह से देता है लाभ!!

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तिल 3 प्रकार के होते है। सफेद, काले और लाल। आयुर्वेद के अनुसार सभी तिलों की किस्‍मों में काले तिल सर्वश्रेष्‍ठ हैं। ऐसे में कई औषधियों के निर्माण में काले तिल का सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसमें कैल्शियम काफी होता है और इसके तेल से बने पदार्थ बेहद उपयोगी होते है जो खासकर बच्‍चों के लिए उपयोगी हैं। जनते हैं इसके अन्‍य फायदे :- बाल संबंधी समस्‍या:- समय पूर्व बल सफेद होना, झड़ना, गंजेपन की समस्‍या में काले तिल का प्रयोग फायदा देता है। इससे बाल मुलायम, मजबूत और काले होते हैं।प्रतिरोधक क्षमता बढेगी:- इसके लिए 1-2 माह तक 2 चम्‍मच तिल रोजाना चबाकर खाने या इससे बने पदार्थ खाए जा सकते हैं। इसके तेल की मालिश भी शरीर की प्रतिरोधात्‍मक क्षमता बढ़ाती है।बिवाई फटना:- एक भाग देसी पीला मोम और चार भाग काले तिल का तेल एक साथ गर्म करके मरहम बना लें। ठंडा होने के बाद इसे बिवाई की जगह लगाने से तेजी
अलसी के बीज, पाउडर और तेल तीनों फायदेमंद!

अलसी के बीज, पाउडर और तेल तीनों फायदेमंद!

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अलसी में मौजूद पोषक तत्‍व और खूबियों को देखते हुए डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे सुपरफूड का दर्जा दिया है। अलसी के बीच में ओमेगा-3, फायबर, प्रोटीन, विटामिन-बी, मैग्‍नीशियम, आयरन, कॉपर, पोटैशियम की अच्‍छी मात्रा पाई जाती है। इसके साबुत बीज, पाउडर और तेल तीनों रूपों में लिया जा सकता है। जानते हैं इसके फायदे और इसे कैसे डाइट में शामिल किया जाए। ऐसे खाएं:- इसे कई तरह से डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसे रोस्‍ट करके सीधे खा सकते हैं या फिर अलसी के बीज का पाउडर आटे, दही, परांठे, सैंडविज, सलाद और अंकुरित दालों में डालकर खा सकते हैं। इसके तेल को सूप और सलाद में भी मिलाकर ले सकते हैं।ये हैं फायदे:- डायबिटीज व वजन कंट्रोल - यह एक हाई फायबर फूड है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह का रेशा होता है और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। इस कारण इसे खाने के बाद पेट भरा होने का अहसास होता है और अतिरिक्‍त कैल
रोगों से लड़ने की ताकत देता है नीम!

रोगों से लड़ने की ताकत देता है नीम!

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नीम का पेड़ न केवल छाया देने के काम आता है बल्कि इसकी पत्तियां व टहनियां आपको रोगों से बचाने में उपयोगी हो सकती हैा • नीम एक प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में काम करता है। इसके कोई द़ष्‍प्रभाव नहीं होते हैं। यह शरीर के रक्‍त को शुद्ध करने का काम करता है।• नीम एंटी बैक्‍टीरियल, एंटी वायरल, एंटी फंगल, एंटी डायबिटिक, एंटी सेप्टिक और फाइबर जैसे गुणों से भरपूर होता है। नीम के पेड़ का पूरी तरह से इस्‍तेमाल होता है। चाहे नीम की पत्तियां हों, फल, टहनियां या फिर छाल। सभी में औषधीय गुण पाए जाते हैं।• इसकी टहनियों का प्रयोग भारत में लंबे समय से दातुन के रूप में किया जाता रहा है, जिससे कि आपको सांसों की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।• नीम के पानी से सिर धोने पर डेंट्रफ से मुक्ति मिलती है और खुजली से जुड़ी समस्‍या में भी आराम मिलता है।• अगर आपको मुंहासों की समस्‍या हो तो नीम की पत्तियों का पे
जब हिचकी करे परेशान तो करें ये आसान उपचार!!

जब हिचकी करे परेशान तो करें ये आसान उपचार!!

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यूं तो हिचकी आना सामान्‍य बात होती है, लेकिन लगातार हिचकी आना एक तरह की बीमारी होती है। ऐसी हिचकी को रोकना मुश्‍किल होता है। कई बार गले में कुछ फंसने, मौसम में बदलाव या तेज मिर्च मसाला खाने से हिचकियां शुरू हो जाती हैं। इससे बचने के लिए कुछ घरेलु नुस्‍खे अपनाए जा सकते है। इसके बाद भी हिचकी नहीं रुकने पर डॉक्‍टर से राय लेनी चाहिए। इसलिए आती है हिचकी:- डायफ्रॉम की मसल्‍स के अचानक सिकुड़ने की वजह से हिचकी की स्‍थिति बन जाती है। मुंह में जब वायु ऊपर की ओर बढ़ती है तो हिक-हिक की आवाज आती है। इस तरह वायु रुक-रुक कर बाहर निकलती है। ऐसी स्थिति वायु बढ़ाने वाले पदार्थो को खाने से उत्‍पन्‍न होती है। कई बार मिर्च मसाले खाने या गले में कोई चीज अटक जाने से आमाशय से ऊपर की ओर वायु उठती है जिससे हिचकी शुरू हो जाती है। गर्म के बाद कुछ ठंडा खाने, धूम्रपान करने या ज्‍यादा टेंशन लेने से भी हिचकी होती है।
किसी अमृत से कम नहीं है ताजा गिलोय!!

किसी अमृत से कम नहीं है ताजा गिलोय!!

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गिलोय उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने के लिए शर्करा का स्‍तर बनाए रखने में मदद करती है। यह दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है। आयुर्वेद हो या एलोपैथी गिलोय के फायदों पर सभी एकमत हैं। दुनिया भर में हुए शोधों में साबित हो चुका है कि गिलोय किसी अमृत से कम नहीं है। बुखार को ठीक करने का इसमें अद्धुत गुण है। यह मलेरिया पर अधिक प्रभावी नहीं है लेकिन शरीर की समस्‍त मेटाबोलिक क्रियाओं को व्‍यवस्थित करने के साथ औषधि के साथ देने पर उसके घातक प्रभावों को रोककर शीध्र लाभ देती है।गिलोय की जड़ें शक्तिशाली एंटी ऑक्सिडेंट हैं। यह कैंसर की रोकथाम और उपचार में प्रयोग की जाती है।गिलोय का नियमित प्रयोग सभी प्रकार के बुखार, फ्लू, पेट कृमि, खून की कमी, निम्‍न रक्‍तचाप, दिल की कमजोरी, टीबी, मूत्र रोग, एलर्जी, पेट के रोग, मधुमेह, चर्म रोग आदि अनेक बीमारियों से बचाता है। गिलोय भूख भी बढ़ाती है
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