तोहफा – सविता मिश्रा

तोहफा -सविता मिश्रा डोरबेल बजी जा रही थी। रामसिंह भुनभुनाए ‘इस बुढ़ापे में यह डोरबेल भी बड़ी तकलीफ देती है।

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लकड़ी का कटोरा ~ प्रेरणादायक कहानी

एक वृध्‍द व्‍यक्ति अपने बहु-बेटे के यहाँ शहर रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्‍यंत पड चुका था,

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आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?

एक बेटा अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में छोड़कर वापस लौट रहा था… . . उसकी पत्नी ने

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माता-पिता को जीते-जी सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है!

एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया। मुझसे कहा- आज माँ का श्राद्ध है, माँ को लड्डू बहुत पसन्द

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