Tag: Mother Father Moral Stories in Hindi

तोहफा – सविता मिश्रा

तोहफा – सविता मिश्रा

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तोहफा -सविता मिश्राडोरबेल बजी जा रही थी। रामसिंह भुनभुनाए 'इस बुढ़ापे में यह डोरबेल भी बड़ी तकलीफ देती है। 'दरवाजा खोलते ही डाकिया पोस्‍टकार्ड और एक लिफाफा पकड़ा गया।लिफाफे पर बड़े अक्षरों में लिखा था वृद्धाश्रम। रूंधे गले से आवाज दी- 'सुनती हो बब्‍बू की अम्‍मा, देख तेरे लाडले ने क्‍या हसीन तोहफा भेजा है।'रसोई से आंचल से हाथ पोछती हुई दोंड़ी आई- 'ऐसा क्‍या भेजा मेरे बच्‍चे ने जो तुम्‍हारी आवाज भर्रा रही है। दादी बनने की खबर है क्‍या? नहीं, अनाथ! क्‍या बकबक करते हो, ले आओ मुझे दो। तुम कभी उससे खुश रहे हो क्‍या!वृद्ध शब्‍द पढ़ते ही कटी हुई डाल की तरह पास पड़ी मूविंग चेयर पर गिर पड़ी।कैसे तकलीफों को सहकर पाला-पोसा, महंगे से महंगे स्‍कूल में पढ़ाया। खुद का जीवन इस एक कमरे में बिता दिया। कहकर रोने लगी।दोनों के बीजे जीवन के घाव उभर आए और बेटे ने इतना बड़ा लि
लकड़ी का कटोरा ~ प्रेरणादायक कहानी

लकड़ी का कटोरा ~ प्रेरणादायक कहानी

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एक वृध्‍द व्‍यक्ति अपने बहु-बेटे के यहाँ शहर रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्‍यंत पड चुका था, उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ ही खाना खाते थे। लेकिन वृध्‍द होने के कारण उस व्‍यक्ति को खाने में बड़ी दिक्‍कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्‍मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेज पर गिर जाता।   बहु-बेटे कुछ दिनों तक तो ये सब सहन करते रहे पर अब उन्‍हें अपने पिता के इस काम से चिढ़ होने लगी। लड़के ने कहा:- "हमें इनका कुछ करना पड़ेगा"। बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली:- "आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करेंगे", और हम इस तरह हमारी चीजों का नुकसान होते हुए भी नहीं देख सकते।अगले दिन जब खाने का वक्‍़त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के एक कोने में लगा
आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?

आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?

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एक बेटा अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में छोड़कर वापस लौट रहा था... . . उसकी पत्नी ने उसे यह सुनिश्चत करने के लिए फोन किया कि पिता त्योहार वगैरह की छुट्टी में भी वहीं रहें घर ना चले आया करें... . . बेटा पलट के गया तो पाया कि उसके पिता वृद्धाश्रम के प्रमुख के साथ ऐसे घुलमिल कर बात कर रहे हैं... . . जैसे बहुत पुराने और प्रगाढ़ सम्बंध हों... . . तभी उसके पिता अपने कमरे की व्यवस्था देखने के लिए वहाँ से चले गए... . . अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए बेटे ने अनाथालय प्रमुख से पूँछ ही लिया... . . "आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?" . . मुस्कुराते हुए वृद्ध ने जवाब दिया... . . "पिछले तीस सालों से... जब वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे!"English Tags: Father Son Heart Touching Story in Hindi, Baap Beta Ki Dil Ko Chu Lene Wali Kahani Hindi
माता-पिता को जीते-जी सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है!

माता-पिता को जीते-जी सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है!

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एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया।मुझसे कहा- आज माँ का श्राद्ध है, माँ को लड्डू बहुत पसन्द है, इसलिए लड्डू लेने आया हूँ!मैं आश्चर्य में पड़ गया, अभी पाँच मिनिट पहले तो मैं उसकी माँ से सब्जी मंडी में मिला था (मैं कुछ और कहता उससे पहले ही खुद उसकी माँ हाथ में झोला लिए वहाँ आ पहुँची।)मैंने दोस्त की पीठ पर मारते हुए कहा- 'भले आदमी ये क्या मजाक है? माँजी तो यह रही तेरे पास!दोस्त अपनी माँ के दोनों कंधों पर हाथ रखकर हँसकर बोला, ‍ भई, बात यूँ है कि मृत्यु के बाद गाय-कौवे की थाली में लड्डू रखने से अच्छा है कि माँ की थाली में लड्डू परोसकर उसे जीते-जी तृप्त करूँ। मैं मानता हूँ कि जीते जी माता-पिता को हर हाल में खुश रखना ही सच्चा श्राद्ध है।आगे उसने कहा, 'माँ को मिठाई, सफेद जामुन, आम आदि पसंद है। मैं वह सब उन्हें खिलाता हूँ। श्रद्धालु मंदिर में जाकर अगरबत्ती जलाते हैं। मैं मंदिर
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