Tag: Relationship Articles in Hindi

सही समय पर सही बात बोलना!

सही समय पर सही बात बोलना!

Miscellaneous
स्वयं की आत्मरक्षा के लिए- सही समय पर सही बात बोलना!"आवाज" - बोलने की ताकत, परमात्मा ने दी हैं। ईश्वर ने यह मानव देह बनायीं हैं उसके हर एक अंग का अपना महत्व हैं। जब इन्सान दुनिया में आता है, हम सब जानते है, बच्चे को पैदा होते ही उसे रुलाया जाता हैं ताकि बच्चे के कोई प्रॉब्लम तो नहीं, पता चल जाता है।बच्चे को प्रभु आवाज देके भेजता है ताकि जब तक वह बोलना नहीं सीखे वह रो कर, चिल्ला कर अपनी जरुरत अपने माता-पिता को बता सके। कहते है न, बिना रोये माँ भी दूध नहीं पिलाती बच्चे को। कितना सही कहा है - कि इंसान को धरती पर आते ही आवाज की जरुरत होती है अपनी बात कहने को और अपनी जरुरत बताने के लिए, और अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए। बच्चा पैदा होते ही रोये नहीं तो डॉ. और परिवार को लगता है बच्चा स्वस्थ नहीं, उसके फेफड़े ख़राब है क्या, उसको कही कंठ मिला है या नहीं इत्यादि।आवाज को शब्द परिवार के स
इतना व्यस्त न रहो की रिश्तों की मस्ती न रहे!!

इतना व्यस्त न रहो की रिश्तों की मस्ती न रहे!!

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आज के समय में एक प्रॉब्लम हर इन्सान के साथ रहती है, जब वह फ्री होते है और उसके साथ वाले व्यस्त होते है, तो पहेली शिकायत सामने वाले से होती है- "तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है" यह शिकायत एक पति-पत्नी में समय के साथ सबसे ज्यादा, पेरेंट्स की बच्चे के साथ जो अब बड़े हो गए है और अपने माता पिता को सिर्फ फ़ोन पर याद करते है या साथ में रहते है तो सिर्फ सुबह-शाम प्रणाम करते वक़्त देखते है, भाई की बहन के साथ जो अब ससुराल में है, दोस्तों में हमेशा रहती है।एक पत्नी की अक्सर अपने पति से प्यार भरी शिकायत होती है की - मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं है, क्यू की पति दिन भर बाहर नौकरी करता है, घर पर जितना टाइम रहे उतना टाइम अपने बच्चो के साथ, अपनी पत्नी की काम में हेल्प करने में निकल देता है, और और दोनों थक के सो जाते है, जब तक दोनों साथ रहेंगे काम में व्यस्त रहेंगे, एक खाना बनाएगा तो दूसरा बच्चे को
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