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आत्मविश्लेषण (Introspection)

आत्मविश्लेषण (Introspection)

Miscellaneous
आज के समय हर व्यक्ति में अव्यवस्था, मानसिक तनाव और अंतर्मन की शांति का अभाव देखने को मिलता है। कोई भी व्यक्ति थोड़ी सी ज्यादा बात होने पर जुंझला जाता है, उनकी सहन शक्ति और समझने की शक्ति जैसे खत्म सी लगती है। इसका वास्तविक कारण हम सोचे तो पाएंगे की व्यक्ति अपना आत्मविश्लेषण नहीं करता है।आत्मविश्लेषण का तात्पर्य - स्वयं का मूल्यांकन करना अर्थात अपने स्वयं के कार्यों का मापन।एक व्यक्ति रात को सोने से पहले अपने दिनभर की रूटीन को एक बार रीप्ले (Replay) कर के देखे कि :-१. आज मैंने कौनसे कार्य को कितना वक़्त दिया? २. कौनसा कार्य पूरे मन से किया और कौनसा कार्य टालमटोल किया। ३. मेरे किस काम से किसको फायदा हुआ और किस को क्या नुकसान हुआ। ४. मैंने अपने हर रिश्तें के साथ कितनी ईमानदारी और कर्त्तव्य निष्ठा दिखाई। ५. आज किस किस के चहरे पर मै एक मुस्कान लाया? ६. मैंने अपने कार्य पूर्ति
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