समझदारी से भरा घड़ा – अकबर बीरबल की कहानी!

एक दिन अकबर और उसके दरबारी दरबार में बैठे थे। तभी राजा सीलोन का दूत वहां आ पहुंचा। वो किसी विषेष काम के लिए यहां पर आया था।

सलाम बादशाह… मैं राजा सीलोन के दरबार से आया हूँ। हमारी सल्‍तनत में आपका में आपका स्‍वागत है। आपके दरबार में बहुत सारे बुद्धिमान दरबारी हैं और हमारे राजा ने समझदारी से भरे घड़े की गुजारिश की है।

कुछ बरबारी बोले- समझदारी से भरा हुआ घड़ा… अब से कहॉं से भरकर लायेंगे। ये तो बहुत ही बेहूदा गुजारिश है। (फुसफुसाते हए)

किसी मंत्री ने सलाह दी की बादशाह सिलोन के राजा हमें मात देना चाहते हैं…. और वो सफल भी हो जायेंगा, कोई भी हमें नहीं बचा पायेंगा, यहॉं तक बीरबल भी। ये तो बहुत मुश्किल गुजारिश की है सीलोन के राजा ने – अकबर ने कहा, खैर तुम्‍हारा इसके बारे में क्‍या कहना है बीरबल।

बीरबाल बोले हॉं! हम थोड़ी तो समझदारी भेज ही सकते है सीलोन के राजा के लिए, आखिरकार उन्‍होंने गुजारिश की है तो हमको उनकी गुजारिश पूरी करनी चाहिए।

अकबर बोले – अगर तुम ऐसा कहते हो तो ठीक है, तुम जो भी करोगे ठीक ही करोगे। मुझे तुम पर पूरा यकीन है… शुक्रिया जहापनाह! मुझे घड़े को भरने के लिए कुछ हफ्तों की जरूरत पड़ेगी। आप जितना चाहे वक्‍त ले सकते हैं- दूत ने कहा।

अकबर ने कहा बीरबल जरा ध्‍यान से क्‍योंकि तुमने जिस चुनौती को स्‍वीकार किया  हैं। उस पर हमारी इज्‍जत भी दाव पर लगी है। बीरबल ने कहा जहापनाह सब्र रखिये, सीलोन के राजा को समझदारी से भरा घड़ा जरूर मिलेगा।

उसी शाम को बीरबल ने अपने सहायक को बुलाया… बीरबल के दिमाग में एक गजब की योजना चल रही थी। बीरबल ने अपने सहायक से कहा की मुझे कुछ मिट्टी के घड़े चाहिए, और ध्‍यान रहे उन घड़ों की गर्दन कुछ पतली रहे। इतना कहकर बीरबल बगीचे में चले गये, और कुछ समय में सहायक भी मिट्टी के घड़े भी लेकर आ गया। बीरबल ने उसको उन घड़ों को लेकर कद्दू की क्‍यारी में आने को कहा।

बीरबल ने एक घड़ा मॉंगा और घड़े के चारों और लकडियों को रस्सी से लपेटकर बांध दी बीरबल ने उन घड़ों को उल्‍टा करके कद्दू के फूल पर रख दिया इसी तरह सभी घड़ो को बांध कर उल्‍टा रख दिया। सभी घड़ों को रखने के बाद बीरबल ने सहायक से बोला इन कद्दू के बेलों को खाद पानी देते रहना, और इसको किसी को छूने मत देना और किसी को बताना भी मत।

इतना कहकर बीरबल वहां से चल दिए, माली सहायक ने उन कद्दओं और घड़ो का खूब ख्‍याल रखा। कुछ हफ्तों बाद अकबर ने बीरबल से पूछा… बीरबल कुछ काम को आगे बढ़ाया की नहीं। तुम्‍हारी तरफ से कोई समाचार भी नही आया। बोरबल बोले- जहापनाह काम लगभग समाप्‍त हो ही गया। बादशाह ने कहा – मैं ये देखने के लिए बहुत ही उत्‍साहित हूँ, लेकिन तुम घड़े को समझदारी से कैसे भरोगे। अब मुझे दो हफ्ते और चाहिए, फिर काम पूरा हो जायेगा। फिर हम सीलोन के दूत को बुलाकर समझदारी के घड़े को दे सकते है।

अकबर ने कहा – उम्‍मीद करता हूँ हमारी इज्‍जत पर कोई दाग नहीं लगेगा।
बीरबल ने कहा- ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं होगा जहापनाह।

दो हफ्ते बाद…
सभी दरबार में इक्‍कठे हुए, भीड़ में फुसफुसाहट और हंसी सुनाई दे रही थी, सभी दरबारियों की नज़र बीरबल पर थी। सभी ये सोच रहे थे कि आखिर बीरबल ने क्‍या किया होगा समझदारी के घड़े को भरने के लिए। कोई मंत्री बोल रहा था की मुझे नही लगता की बीरबल इस चुनौती को पूरा कर पाया होगा। मुझे भी ऐसा ही लगता है, ऐसा कर पाना किसी के लिए भी नामुमकिन है। अरे वो बीरबल है, जरूर उसने कोई न कोई रास्‍ता निकल ही दिया होगा – बुढ़ा मंत्री बोला। सभी इस चुनौती औश्र इसके परिणाम के बारे में बातें कर रहे थे।

बीरबल और दूत दोनों दरबार में हाजिर होते है। समझदारी से भरे घड़े को दिखाने के लिए क्‍या तुम तैयार हो बीरबल- बादशाह अकबर ने कहा, जी हॉं जहापनाह – अकबर ने कहा।

बीबरबल ने दो ताली बजाई, सभी दरबाजे की तरु देखते हैं, बीरबल का सहायक घड़े को थाली में रखकर हाजिर होता है। ये लीजिये जहापनाह आपके सामने समझदारी से भरा घड़ा हाजिर है, घड़े के ऊपर से कपड़े से ढका हुआ था ताकि कोई अंदर से देख न सके की अंदर क्‍या भरा हुआ था।

दरबारी चिल्‍लाने लगे- ऐसा कैसे हो सकता है, ऐसा हो ही नही सकता, ये नातुमकिन है, शांत हो जाओ – अकबर ने कहा। इस घड़े को तुम अपने राजा के पास ले जाओ, लेकिन याद रहे तुम्‍हें ये सारे घड़े खाली करके लौटाने होंगे, वो भी बिना कोई नुकसान पहुंचाए और आप समझदारी के फल को बाहर निकालना चाहते हो तो उसे भी कोई खरोच नहीं आनी चाहिए।

क्‍या मैं इसे देख सकता हूँ – दूत ने कहा, हां जरूर अब ये आपका ही है- बीरबल ने कहा।

दूत उस घड़े के अंदर देखता है और चौक जाता है, उसने घड़े के अंदर एक कद्दू देखा। दूत कुछ बोले उसके पहले बीरबल बोले ऐसे हमारे पास पांच घड़े है। अगर तुम्‍हारे राजा को और समझदारी चाहिए तो हम और दे देंगे, तुम्‍हारे सामने कोई खड़ा हो सकता है भला, तुम लाखों में एक हो बीरबल।

दूत उस घड़े को लेकर चला जाता है। बीबरबल मैं बहुत ज्‍यादा उत्‍साहित हूँ तुमने कहा तुम्‍हारे पास और पांच घड़े है जरा हमें भी दिखाओं – अकबर ने कहा। बीरबल ने दूसरा घड़ा मंगाया सहायक दूसरा घड़ा भी ले आया अकबर देखकर जोर जोर से हंसने लगा। बिलकुल…. यही है समझदारी का फल, सीलोन के राजा देखकर जरूर समझदार बन जायेंगे। इसके बाद सभी को दरबार में उस फल को दिखाया गया, सभी ने बीरबल की वाहवाही की। बीरबल तुम मेरे सबसे अच्‍छे दरबारी हो, तुम्‍हारे आगे सभी चाय कम पानी है।

इस अकबर बीरबल के किस्‍से ”समझदारी से भरा घड़ा,” से हमने सीखा की विपरीत परिस्‍थति में भी जो विवेक से काम लेता है, अंत में वही विजय होता है।

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