Tag: Heart Touching Story in Hindi

दो प्रेरणादायक कहानियां “याद्दाश्‍त” और “तीसरा मित्र”

दो प्रेरणादायक कहानियां “याद्दाश्‍त” और “तीसरा मित्र”

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याद्दाश्‍त - कमलेश कुमार (Mother Love Short Story in Hindi) बढ़ती उम्र के साथ शांतादेवी की याद्दाशत साथ छोड़ रही थी। चीजें कहीं भी रखकर भूल जातीं, दोबारा दवा खा लेतीं। शाम को पार्क में टहलने जातीं तो वापसी का रास्‍ता भूल जाती और कोई पड़ोसी घर तक छोड़ने आता।कई बार इस वजह से बहू-बेटे को बहुत परेशानी होती थी। शांतादेवी को अहसास था कि उनकी वजह से सब बहुत परेशान हो रहे हैं। एक दिन बेटे के ऑफिस से लौटने के बाद वे उसके पास पहुंची और बोली, 'बेटा, मुझे वृद्धाश्रम छोड़ आ। मेरी भूलने की यह आदत सबे जी का जंजाल बन रही है'।मां की बात पर दुखी बेटा कुह कहता, इससे पहले ही बहू बोल पड़ी, 'मां जी, आपकी याद्दाश्‍त उम्र की वजह से थोड़ी कमजोर हो गई है। हमारी नहीं। परिवार के लिए आपका प्रेम, त्‍याग, समर्पण हम नहीं भूले हैं।आपके बेटे को उनके लिए उठाए गए आपके सारे कष्‍ट याद हैं। मुझ नई-नवेली सहमी बहू को
दो कहानी – 1. पालनहार की जीत, 2 कोई अंतर नहीं

दो कहानी – 1. पालनहार की जीत, 2 कोई अंतर नहीं

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कहानी 1. - पालनहार की जीत मां और उसकी दो लड़कियां। दोनों बहनें वयस्‍क। बड़ी बहन ने जब अपने मनपसंद लड़के से शादी की ली तो मां को नागवार लगा। वह लड़का उन्‍हें ठीक नहीं लगा था। तभी से वे बड़ी बेटी से दुखी थीं।छोटी जब समझने लगी तो सोचती 'मैं अतीत की ओर देखती हूं तो हार जाती हूं, क्‍योंकि मां अपनी मंशा से कुछ करने न देंगे।' इतना ही नहीं घर में जब भी छोटी अपनी दीदी का नाम लेती जो मां डांटती हुई कहती, 'खबरदार जो उसका नाम इस घर में लिया तो। यों समझो कि उसके लिए मायके के दरवाजे अब हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं।'बाद में समझ आया कि मां गलत नहीं थी। दीदी ने एक बच्‍ची को जन्‍म दिया था। ससुरालवालों के दबाव के चलते दीदी ने उस दुधमुंही को न अपनाने और त्‍यागने का मन बना लिया था। छोटी को जैसे ही दीदी की मंशा का पता लगा, उसने कहा, 'दीदी अब मैं शादी नहीं करूंगी और उस दुधमुंही को पाल-पोस कर बड़ा करूंगी
यह रिश्ता क्या कहलाता है?

यह रिश्ता क्या कहलाता है?

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यह कहानी नहीं एक सच्चाई है, आज के रिश्तों की..एक व्यक्ति रामकिशन जिसने 14 साल की उम्रः से एक छोटे से किराना के काम से व्यवसाय शुरू किया। पिता की मृत्‍यु चूँकि पहले ही हो चुकी थी, उनके नाना ने उन्हें पाला, उनके 2 भाई और जिनका भार उन पर था। उन्होंने 14 साल की उम्र से अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने दोनों छोटे भाइयों को पढ़ा कर एक अच्छी नौकरी के काबिल बना दिया, वह दोनों भाई आज अपने परिवार के साथ सम्‍पन्‍न है।रामकिशन की पत्नी बहुत ममता प्रिय, साक्षात लक्ष्मी महिला, उन्होंने अपने पति का हमेशा साथ दिया दुःख और सुख में, रामकिशन के 6 बेटे और 4 लड़कियां हुई। लगातार 3 बेटियों के बाद उन्हें पुत्र हुआ, उसके बाद लगातार 2 पुत्र और एक पुत्री और २ पुत्र। जैसा की भाई बहिन में उम्र के अनुसार अंतर काफी रहा। पिता ने बहुत संघर्ष किया, अपनी छोटी सी दुकान को नामी (विख्यात) कर दिया पुरे शहर में। आज उनका ब्र
तोहफा – सविता मिश्रा

तोहफा – सविता मिश्रा

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तोहफा -सविता मिश्राडोरबेल बजी जा रही थी। रामसिंह भुनभुनाए 'इस बुढ़ापे में यह डोरबेल भी बड़ी तकलीफ देती है। 'दरवाजा खोलते ही डाकिया पोस्‍टकार्ड और एक लिफाफा पकड़ा गया।लिफाफे पर बड़े अक्षरों में लिखा था वृद्धाश्रम। रूंधे गले से आवाज दी- 'सुनती हो बब्‍बू की अम्‍मा, देख तेरे लाडले ने क्‍या हसीन तोहफा भेजा है।'रसोई से आंचल से हाथ पोछती हुई दोंड़ी आई- 'ऐसा क्‍या भेजा मेरे बच्‍चे ने जो तुम्‍हारी आवाज भर्रा रही है। दादी बनने की खबर है क्‍या? नहीं, अनाथ! क्‍या बकबक करते हो, ले आओ मुझे दो। तुम कभी उससे खुश रहे हो क्‍या!वृद्ध शब्‍द पढ़ते ही कटी हुई डाल की तरह पास पड़ी मूविंग चेयर पर गिर पड़ी।कैसे तकलीफों को सहकर पाला-पोसा, महंगे से महंगे स्‍कूल में पढ़ाया। खुद का जीवन इस एक कमरे में बिता दिया। कहकर रोने लगी।दोनों के बीजे जीवन के घाव उभर आए और बेटे ने इतना बड़ा लि
एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

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सड़क किनारे एक छोटा बच्चा बहुत गंदे और फटे हुए कपड़े पहने आते जाते लोगों से भीख मांग रहा था। ठंड से बचने के लिए उसके पास एक पुराना फटा हुआ जूट का वोरा था, जो लोगों को पास आता देख वह अपने ऊपर से हटा देता था, शायद इसीलिए कि उसका सूजा हुआ अजीब सा दयनीय चेहरा लोग देखकर उसे भीख दें।मैं भी उससे कुछ दूर खड़ा धूप सेक रहा था। और मन में एक ही ख्याल चल रहा था कि भिखारी स्वयं भीख मांगते हैं, यहां तक ठीक है परन्तु अपने बच्चों से भीख मंगवाना अपराध है और मैं इससे नफरत करता हूं ।बहुत देर से मैं उस बच्चे की हरकत देख रहा था । और उसके माता पिता को भरपूर कोस रहा था। करीब बीस मिनट हो गये थे, अभी तक किसी ने भी उसको भीख नहीं दी थी और यह देख कर मैं बहुत प्रसन्न था, शायद उस बच्चे को समझ आये कि भीख मांगने से नहीं मिलता, मेहनत कर कमाना पड़ता है ।मैं भी वहां से अब निकलने की तैयारी में था, और उस भिखारी बच्चे न
बासी रोटी! – हृदय को छूने वाली एक छोटी कहानी!

बासी रोटी! – हृदय को छूने वाली एक छोटी कहानी!

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रात के दो बजे एक कुत्ता झोपड़ी के आगे उदास बैठा था!दूसरा कुत्ता आया और बोला:- रोज तो खूब भौकता है, आज चुप क्‍यों बैठा है?उदास कुत्ता बोला:- रोटी तो कई बार नहीं मिलती है.... सामने वाली उस झोपड़ी को देख रहे हो ?दूसरा कुत्ता बोला:- हां-हां, उसे में तो दो शैतान बच्‍चे भी रहते हैं। हमें देखते ही पत्‍थर या डंडा मारते हैं। लगता है, आज तुझे जोर से मारा है ? चल खड़ा हो, दोनों मिलकर भौंककर उनकी नींद हराम करते हैं!!उदास कुत्ता बोला:- नहीं, अभी कुछ देर पहले तक वे भूख-भूख, रोटी-रोटी कहते हुए रो रहे थे। अभी सोए ही हैं...दूसरा कुत्ता बोला:-ओह, यह बात है! लगता है इंसानों ने संवेदना को बासी रोटी मान कर तेरी तरफ फेंक दी!Must Read " Stale Bread - Very Heart Touching Short Story in Hindi " Hunger Story in Hindi, Bhookh Kahani, Dil Ko Chune Wali Kahani,
पति-पत्नी और तलाक ~ एक अनोखा संबंध..!!

पति-पत्नी और तलाक ~ एक अनोखा संबंध..!!

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इससे बात से कोई फर्क नहीं पडता की आप विवाहित हैं या अविवाहित, अगर आप पूरी कहानी पढेगें तो आपकी आंखों में प्रेम के आंसू छलक आयेंगे!!मुकदमा दो साल तक चला ...... आखिर पति-पत्नी में तलाक हो गया...तलाक की वजह बहुत ही मामूली सी बातें थीं, इन मामूली सी बातों बडा चडा कर बड़ी घटना में रिश्तेदारों ने बदला दिया। हुआ यों कि पति ने पत्नी को किसी बात पर दो-तीन थप्पड़ मार दिये, पत्नी ने इसके जवाब में अपने सैंडिल को पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।चाहा जाता तो मामले को रफा-दफा भी किया जा सकता था, पर पति ने इसे अपनी तौहिनी समझी, रिश्तेदारों ने मामले को और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता।कुछ रिश्तेदारों ने यह भी पश्चाताप जाहि
आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?

आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?

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एक बेटा अपने बूढ़े पिता को वृद्धाश्रम एवं अनाथालय में छोड़कर वापस लौट रहा था... . . उसकी पत्नी ने उसे यह सुनिश्चत करने के लिए फोन किया कि पिता त्योहार वगैरह की छुट्टी में भी वहीं रहें घर ना चले आया करें... . . बेटा पलट के गया तो पाया कि उसके पिता वृद्धाश्रम के प्रमुख के साथ ऐसे घुलमिल कर बात कर रहे हैं... . . जैसे बहुत पुराने और प्रगाढ़ सम्बंध हों... . . तभी उसके पिता अपने कमरे की व्यवस्था देखने के लिए वहाँ से चले गए... . . अपनी उत्सुकता शांत करने के लिए बेटे ने अनाथालय प्रमुख से पूँछ ही लिया... . . "आप मेरे पिता को कब से जानते हैं ?" . . मुस्कुराते हुए वृद्ध ने जवाब दिया... . . "पिछले तीस सालों से... जब वो हमारे पास एक अनाथ बच्चे को गोद लेने आए थे!"English Tags: Father Son Heart Touching Story in Hindi, Baap Beta Ki Dil Ko Chu Lene Wali Kahani Hindi
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