एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

सड़क किनारे एक छोटा बच्चा बहुत गंदे और फटे हुए कपड़े पहने आते जाते लोगों से भीख मांग रहा था। ठंड से बचने के लिए उसके पास एक पुराना फटा हुआ जूट का वोरा था, जो लोगों को पास आता देख वह अपने ऊपर से हटा देता था, शायद इसीलिए कि उसका सूजा हुआ अजीब सा दयनीय चेहरा लोग देखकर उसे भीख दें।

मैं भी उससे कुछ दूर खड़ा धूप सेक रहा था। और मन में एक ही ख्याल चल रहा था कि भिखारी स्वयं भीख मांगते हैं, यहां तक ठीक है परन्तु अपने बच्चों से भीख मंगवाना अपराध है और मैं इससे नफरत करता हूं ।



बहुत देर से मैं उस बच्चे की हरकत देख रहा था । और उसके माता पिता को भरपूर कोस रहा था। करीब बीस मिनट हो गये थे, अभी तक किसी ने भी उसको भीख नहीं दी थी और यह देख कर मैं बहुत प्रसन्न था, शायद उस बच्चे को समझ आये कि भीख मांगने से नहीं मिलता, मेहनत कर कमाना पड़ता है ।

मैं भी वहां से अब निकलने की तैयारी में था, और उस भिखारी बच्चे ने वोरा ओढ़ लिया था। तभी एक व्यक्ति ने वोरे से ढ़के उस भिखारी को हाथ से हिलाया, और वह बच्चा उठकर खड़ा हो गया। उस व्यक्ति ने भिखारी बच्चे को एक पांच रूपये वाला बिस्कुट का पैकेट और एक सिक्का भी दिया । मैं बहुत नाराज हुआ और उस व्यक्ति को समझाने का मन बनाकर उसके पास गया।

भिखारी एक टकटकी लगाए उस व्यक्ति को घूरे जा रहा था। मैं कुछ बोलता इसके पहले उस अजनबी व्यक्ति ने भिखारी से पूछा, क्या देख रहे हो, चाय पियोगे ।

बच्चे ने आंखों में आंसू भरकर कहा – साहब आपकी आंखों को देख रहा था, दूसरों से अलग कैसे हैं। और इतना कहते हुए उसने नजरें झुका लीं।

मैं भी स्तब्ध रह गया। उस व्यक्ति ने जब पूछा कि बेटा तुम्हारे माता पिता कहां हैं, तो उसने बताया कि पिता का पता नहीं, और माँ को रात को कुछ लोग जबरदस्ती कार में डाल कर ले गये। पहले तो माँ सुबह ही आ जाती थी, परन्तु अबकी दो दिन हो गए। उसी का यहां इंतजार कर रहा हूँ, मां के आते ही हम यहां से चले जायेंगे ।

मैं अपनी आंखों से आंसुओं को रोक नहीं पाया, मेरे पास के सारे पैसे और स्वेटर भी उतारकर देने को तैयार हो गया, लेकिन अपनी भावनाओं को रोक कर, पास के ठेले से चार समोसे और चाय लाकर बच्चे को दी। और अपने आदर्शों को कोसते हुए वहां से निकल गया।


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