Tag: Prerak Prasang Hindi Kahani

Teacher Student Relationship Short Moral Stories in Hindi

Teacher Student Relationship Short Moral Stories in Hindi

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एक प्राथमिक स्कूल मे अंजलि नाम की एक शिक्षिका थीं वह कक्षा 5 की क्लास टीचर थी उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा मे आते ही हमेशा "LOVE YOU ALL" बोला करतीं थी।मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं बोल रही । वह कक्षा के सभी बच्चों से एक जैसा प्यार नहीं करती थीं।कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको फटी आंख भी नहीं भाता था। उसका नाम राजू था। राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आ जाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान । पढ़ाई के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता था।मेडम के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता, मगर उसकी खाली खाली नज़रों से साफ पता लगता रहता कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे यानी (प्रजेंट बाडी अफसेटं माइड) .धीरे धीरे मेडम को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मेडम की आलोचना का निशाना बनन
दो कहानी – 1. पालनहार की जीत, 2 कोई अंतर नहीं

दो कहानी – 1. पालनहार की जीत, 2 कोई अंतर नहीं

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कहानी 1. - पालनहार की जीत मां और उसकी दो लड़कियां। दोनों बहनें वयस्‍क। बड़ी बहन ने जब अपने मनपसंद लड़के से शादी की ली तो मां को नागवार लगा। वह लड़का उन्‍हें ठीक नहीं लगा था। तभी से वे बड़ी बेटी से दुखी थीं।छोटी जब समझने लगी तो सोचती 'मैं अतीत की ओर देखती हूं तो हार जाती हूं, क्‍योंकि मां अपनी मंशा से कुछ करने न देंगे।' इतना ही नहीं घर में जब भी छोटी अपनी दीदी का नाम लेती जो मां डांटती हुई कहती, 'खबरदार जो उसका नाम इस घर में लिया तो। यों समझो कि उसके लिए मायके के दरवाजे अब हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं।'बाद में समझ आया कि मां गलत नहीं थी। दीदी ने एक बच्‍ची को जन्‍म दिया था। ससुरालवालों के दबाव के चलते दीदी ने उस दुधमुंही को न अपनाने और त्‍यागने का मन बना लिया था। छोटी को जैसे ही दीदी की मंशा का पता लगा, उसने कहा, 'दीदी अब मैं शादी नहीं करूंगी और उस दुधमुंही को पाल-पोस कर बड़ा करूंगी
एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

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सड़क किनारे एक छोटा बच्चा बहुत गंदे और फटे हुए कपड़े पहने आते जाते लोगों से भीख मांग रहा था। ठंड से बचने के लिए उसके पास एक पुराना फटा हुआ जूट का वोरा था, जो लोगों को पास आता देख वह अपने ऊपर से हटा देता था, शायद इसीलिए कि उसका सूजा हुआ अजीब सा दयनीय चेहरा लोग देखकर उसे भीख दें।मैं भी उससे कुछ दूर खड़ा धूप सेक रहा था। और मन में एक ही ख्याल चल रहा था कि भिखारी स्वयं भीख मांगते हैं, यहां तक ठीक है परन्तु अपने बच्चों से भीख मंगवाना अपराध है और मैं इससे नफरत करता हूं ।बहुत देर से मैं उस बच्चे की हरकत देख रहा था । और उसके माता पिता को भरपूर कोस रहा था। करीब बीस मिनट हो गये थे, अभी तक किसी ने भी उसको भीख नहीं दी थी और यह देख कर मैं बहुत प्रसन्न था, शायद उस बच्चे को समझ आये कि भीख मांगने से नहीं मिलता, मेहनत कर कमाना पड़ता है ।मैं भी वहां से अब निकलने की तैयारी में था, और उस भिखारी बच्चे न
घर मे कोई नही है! प्रेरणादायक कहानी

घर मे कोई नही है! प्रेरणादायक कहानी

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शाम को दफ़्तर से घर आते समय देखा कि एक छोटा-सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था जिस पर मार्कर से लिखा हुआ था:घर मे कोई नही है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और हाजत कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी इच्छा से फल तौल लें और पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें।साथ ही मूल्य भी लिखे हुये हैं...और यदि आपके पास पैसे न हों तो मेरी ओर से ले लेना...अनुमति है।मैंने इधर-उधर देखा। पास पड़े तराज़ू में दो किलो सेब तौले, एक दर्जन केले लिए...बैग में डाले...प्राइस लिस्ट से कीमत देखी...पैसे निकालकर गत्ते को उठाया... वहाँ सौ, पचास और दस-दस के नोट पड़े थे। मैंने भी पैसे उसमें रख कर उसे ढक दिया। बैग उठाया और घर आ गया। खाना खाकर श्रीमती और मैं घूमते-घूमते उधर से निकले तो देखा एक कृशकाय अधेड़ आयु का व्यक्ति मैले से कुर्ते-पाज़ामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर
ज्ञानवाणी – शरीर से संवाद!!

ज्ञानवाणी – शरीर से संवाद!!

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स्‍वयं का शरीर से संवाद होने दो! उससे कहो कि विश्रांत हो जाएं, उसे कहो कि यहां डरने की कोई जरूरत नहीं है! तनाव खुद दूर होता जाएगा...सत्‍य की शक्ति! सत्‍य अपने आप में एक शक्ति है, साधना और तपस्‍या है। जिसके पास सत्‍य की शक्ति है उसके पास दुनिया की हर वस्‍तु स्‍वत: ही आ जाती है। झूठ से तो सिर्फ आश्‍वासन, दिखावा और फरेब मिलता है। जब बच्‍चा छोटा होता है तो उसे सिखाते है कि जीवन में सच बोलना चाहिए, ईमानदारी के पथ पर चलना चाहिए। सत्‍य ही मनुष्‍य का असली आभूषण है। जो सच को अपनाता है वह कहीं भी असफल नहीं होता है।शरीर से संवाद! बंद आंखों के साथ अपने शरीर के भीतर नख से शिखर तक जाकर देखो कि तनाव कहां है। और तब उस हिस्‍से से बात करो जैसे कि तुम अपने मित्र से बात करते हो। अपने और अपने शरीर के साथ संवाद होने दो। उससे कहो कि विश्रांत हो जाएं। उसे कहो कि यहां डरने की कोई जरूरत नहीं है। डरो
चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

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एक 5 साल का लड़का और 3 साल लड़की जो की भाई-बहन थे दोनों साथ में बाजार से गुजर रहे थे। अचानक लड़के को लगा कि, उसकी छोटी बहन पीछे रह गई है। उसने रुकाकर, पीछे पलटकर देखा तो उसे दिखा कि उसकी उसकी बहन एक खिलौने की दुकान के सामने खड़ी होकर किसी चीज को एकटक देख रही है।लडका पीछे आकर अपनी छोटी बहन से पूछता है, "कुछ चाहिये तुम्हें?"लड़की एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर इशारा करके देखती है।5 साल का छोटा बच्चा अपनी छोटी बहन का साथ पकड़ता है, और एक जिम्मेदार बड़े भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। छोटी बहन बहुत खुश हो गई। दुकान का मालिक यह सब देख रहा था, बच्चे का साहसी व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित को गया....अब वह 5 साल का बच्चा अपनी बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, "सर, इस गुड़‍िया की कीमत क्‍या है?"दुकान का मालिक एक शांत और गहरा व्यक्ति था, उसने अपने ज
वसीयत और नसीहत! Short Moral Story

वसीयत और नसीहत! Short Moral Story

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एक बहुत ही दौलतमंद व्‍यक्ति ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, कि बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, यह मेरी इक्छा जरूर पूरी करना।पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडित जी से अपने पिता की आखरी इक्छा बताई। और पंडितजी से बोला की पिताजी के पैरों में ये फटे हुये मोजे पहनाना है। पर पंडितजी ने कहा 'हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है'पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो। बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, पर कोई नतीजा नहीं निकला सका।इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुअा एक खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी।"मेरे प्यारे बेटे, देख रहे हो..? ये गाड़ी, दौलत, बंगला और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुअा मोजा तक नहीं ले जा
सफलता की आदतें ~ प्रेरणादायक लेख

सफलता की आदतें ~ प्रेरणादायक लेख

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दोस्‍तों अगर आपकों अपनी जिंदगी में सफल बनना है तो, आपको मेहनत, लग्‍न के साथ साथ आपनी आदतों को भी सुधारना पडेगा क्‍योकि हमारी आदतें ही हमारें जीवन को दिशा प्रदान करती है। आपको एक छोटी सी कहानी के जरिये हम यह बताने की कोशिश करते है कि कैसे आदतें हमारी सफलता में मददगार साबित होती है।दो बचपन के दोस्त बहुत सालों बाद मिलते है, एक दोस्त अपनी अच्छी आदतों की वजह से सफलता के ऊचॉंईयों पर पहुँच जाता है, और अमीर बन जाता है। जबकि दूसरा दोस्त अपने आलस, बहानेबाजी जैसी बुरी आदतों की वजह से गरीब रह जाता है, और गरीबी में आपने दिन गुजारता है।जब अमीर दोस्त अपने बचपन के दोस्त के घर पर जाता है, तो देखता है कि घर में चारों तरफ जाले लगे है, घर का सामान अस्त-व्यस्त है, वह जो कुर्सी देता है उस पर भी बहुत सी धूल लगी हुई है। तो अमीर दोस्त अपने गरीब दोस्त से कहता है - "तुम अपना घर साफ क्यों नहीं रखते हो" तब ग
मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा! – प्रेरणादायक कहानी

मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा! – प्रेरणादायक कहानी

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गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले गन्ने का रस पीकर काम पर जाता हूँ। एक छोटे से गन्ने की रस की दुकान पर गया !! वह काफी भीड-भाड का इलाका था, वहीं पर काफी छोटी-छोटी फूलो की, पूजा की सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर भी था, इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड रहती है!मैंने रस वाले को रस का आर्डर दिया, मेरी नज़र पास में ही फूलों की दुकान पे गयी, वहीं पर एक तकरीबन 37 वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले एक फूलों का हार बनाने का आर्डर दिया, तभी उस व्यक्ति के पिछे से, एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर हाथ लगाकर उसे रस पिलाने की गुजारिश की !!पहले तो उस व्यक्ति का बच्चे की तरफ ध्यान नहीं था, जब देखा... तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना हाथ रूमाल से साफ करते हुए बोला" चल हट ...."कहते हुए भगाने की कोशिश की!!उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया
पति-पत्नी और तलाक ~ एक अनोखा संबंध..!!

पति-पत्नी और तलाक ~ एक अनोखा संबंध..!!

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इससे बात से कोई फर्क नहीं पडता की आप विवाहित हैं या अविवाहित, अगर आप पूरी कहानी पढेगें तो आपकी आंखों में प्रेम के आंसू छलक आयेंगे!!मुकदमा दो साल तक चला ...... आखिर पति-पत्नी में तलाक हो गया...तलाक की वजह बहुत ही मामूली सी बातें थीं, इन मामूली सी बातों बडा चडा कर बड़ी घटना में रिश्तेदारों ने बदला दिया। हुआ यों कि पति ने पत्नी को किसी बात पर दो-तीन थप्पड़ मार दिये, पत्नी ने इसके जवाब में अपने सैंडिल को पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।चाहा जाता तो मामले को रफा-दफा भी किया जा सकता था, पर पति ने इसे अपनी तौहिनी समझी, रिश्तेदारों ने मामले को और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता।कुछ रिश्तेदारों ने यह भी पश्चाताप जाहि
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