जानें होलिका पर्व और पूजा की विधि।

होलिका पर्व

प्रदोष व्‍यापिनी फाल्‍गुन पूर्णिमा के दिन भद्रारहित काल में होलिका दहन किया जाता है। दहन से पूर्व और भद्रा समय के बाद होली पूजन किया जाना चाहिए। भद्रा के मुख का त्‍याग करके निशा मुख में होली पूजन फलदायक होता है। दहन के बाद होलिका में जिन वस्‍तुओं की आहुति दी जाती है, उनमें कच्‍चे आम, नारियल, भुट्टे या सप्‍तधान्‍य, चीनी के बने खिलौने, नई फसल का कुछ भाग है। (सप्‍त धान्‍य हैं – गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल, और मसूर।)

पूजा विध्‍ाि:-

होलिका दहन से पहले होली की पूजा की जाती है। पूजा करते समय व्‍यक्ति को होलिका के पास जाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहए। पूजा के लिए निम्‍न सामग्री प्रयोग करनी चाहिए- एक लोटा जल, माला, रोली, चावल, गंध, पुष्‍प, कच्‍चा सूत, गुड़, खड़ी हल्‍दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल। इसके अतिरिक्‍त नई फसल के धान्‍यों जैसे- गेहूं की बालियां भी सामग्री के रूप में रखी जाती हैं। इसके बाद होलिका के पास गोबर से बनी ढाल व अन्‍य खिलौने रख दिए जाते हैं। होलिका दहन मुहूर्त समय में जल, मोली, फूल, गुलाल, व गुड़ आदि से पूजन करना चाहिए। कच्‍चे सूत को होलिका के चारों ओर तीन या सात परिक्रमा करते हुए लपेटना होता है। फिर लोटे का शुद्ध जल व अन्‍य पूजन की वस्‍तुओं को एक-एक करके होलिका को समर्पित किया जाता है। पूजन के बाद जल से अर्घ्‍य दिया जाता है।

Holika Dahan Ki Puja Vidhi in Hindi
Holika Dahan Ki Puja Vidhi in Hindi

सूर्यास्‍त के बाद प्रदोष काल में होलिका में अग्नि प्रज्‍ज्‍वलित कर दी जाती है। इसमें अग्नि प्रज्‍ज्‍वलित होते ही डंडे को बाहर निकल लिया जाता है। सार्वजनिक होली से अग्नि लाकर घर में बनाई गई होली में अग्नि प्रज्‍ज्‍वलित की जाती है। अंत में सभी पुरुष रोली का टीका लगाते है व महिलाएं गीत गाती है। बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। सेंक कर लाए गए धान्‍यों को खाने से निरोगी रहने की मान्‍यता है। ऐसा माना जाता है कि होली की बची हुए अग्नि व राख को अगले दिन प्रात: घर में लाने से घर की अशुभ शक्तियों से बचने में सहयोग मिलता है। इस राख का शरीर पर लेपन भी किया जाता है।

होली की भस्‍म को दहन के बाद घी या दूध से ही बुझाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में लक्ष्मी का आगमन होता है। होली की भस्म को घर लाकर शुद्ध गाय के घी से धूप देने पर पित़ शांति में उचित माना जाता है।

होली की भस्‍म को व्याापार स्थल में रखने से व्यापार में व़द्धि होती है। नई फसल को भी होली की भस्म‍ में डालने से घर-परिवार धन-धान्य से पूर्ण रहता है।


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