ईश्वर की रचना – कितनी अदभुद!, कितनी गहन!, कितनी सीधी(सरल) ईश्वर की रचना कितनी अद्भुद है, हम जितना चिंतन करते हैं प्रभु की इस दुनिया का, उतने ही नए-नए अहसास होते है। आज आपसे ऐसे ही कुछ अहसासों के बारे में जिक्र करना चाहती हूँ :- 1:- हमारी काया, यह मानव देह, इसके हर अंग
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अक्सर इंसान को जब गुस्सा आता हैं, वह अपने आगे पीछे की सब भूल जाता हैं। कोई भी दूसरा इन्सान अगर गुस्से वाले से बात करे तो जो मुँह में आये जवाब दे देता हैं। अगर सामने वाला उसका अपना हैं तो २-४ बार सुन भी लेगा और उसे माफ़ कर देगा, वही अगर गुस्से
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स्वयं की आत्मरक्षा के लिए- सही समय पर सही बात बोलना! “आवाज” – बोलने की ताकत, परमात्मा ने दी हैं। ईश्वर ने यह मानव देह बनायीं हैं उसके हर एक अंग का अपना महत्व हैं। जब इन्सान दुनिया में आता है, हम सब जानते है, बच्चे को पैदा होते ही उसे रुलाया जाता हैं ताकि
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!! खोता बिखरता हुआ बचपन !! बचपन की परिभाषा एक नजर में वह पल जहा सिर्फ प्यार और प्यार भरा स्पर्श सब अपनों से मिलता है, पुरे परिवार वाले बचपन में बिना किसी स्वार्थ के सिर्फ प्यार करते हैं, बच्चे की मासूम हरकतें, उनका तुतला के बोलना, धीरे धीरे गिर के उठना, खिल के हँसना,
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उपहार का शाब्दिक अर्थ – उप + हार (जब किसी का आदर करते है या आभार व्यक्त करते है, तो उसे हार पहनाते है। हार पहनाने से कही ऊपर, आभार हम उपहार देके व्यक्त करते है) हर रिश्ते में उपहार का बहुत महत्व होता है, एक दूसरे के लिए प्यार और आदर हम उपहार देके
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मिठाई का हर त्यौहार में विशेष महत्व है, मिठाई से ही त्यौहार में मिठास घुलती है। एक स्पेशल रेसिपी मिठाई की आपके लिए:- सामग्री ➤ १. 1/2 किलोग्राम आगरा के पेठे। २. 1/4 किलोग्राम खोपरा (नारियल) का बुरा। ३. चेरी लाल, हरी और पीली एक पैकेट 50 ग्राम। ४. वनीला एस्सेंस। ५. केसर – 8-10
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आज की समस्याएं और टेंशन इन्सान का टशन ही है। आज व्यक्ति अपने में बदलाव लाने से डरता है, इसका परिणाम की वह हमेशा समस्यायों में ही उलझ रहता है। जब भी कही एक साथ सब बातें करने बैठेंगे सबकी अपनी अपनी समस्याएं सामने आने लगती है, कोई अपने घर से परेशान, कोई ऑफिस से,
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ईमानदारी का वास्तविक अर्थ :- ” ई+ मान+ दारी “ अपने आप के साथ जो वफादार रहे, अपनी आत्मा (I) का मान जो रखता है वह गुण का नाम है ईमानदारी! ईमानदारी को इन्सान का सर्वश्रेष्ठ गुण और गहना कहा जाता है, यह गहना ऐसा है जो आज के समय में हर मनुष्य के अंदर
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आज के समय हर व्यक्ति में अव्यवस्था, मानसिक तनाव और अंतर्मन की शांति का अभाव देखने को मिलता है। कोई भी व्यक्ति थोड़ी सी ज्यादा बात होने पर जुंझला जाता है, उनकी सहन शक्ति और समझने की शक्ति जैसे खत्म सी लगती है। इसका वास्तविक कारण हम सोचे तो पाएंगे की व्यक्ति अपना आत्मविश्लेषण नहीं
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आज के समय में एक प्रॉब्लम हर इन्सान के साथ रहती है, जब वह फ्री होते है और उसके साथ वाले व्यस्त होते है, तो पहेली शिकायत सामने वाले से होती है- “तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है” यह शिकायत एक पति-पत्नी में समय के साथ सबसे ज्यादा, पेरेंट्स की बच्चे के साथ
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