Tag: Writer Shweta Jhanwar Bhilwara

अशांति का कारण – गहरी सोच का अभाव

अशांति का कारण – गहरी सोच का अभाव

Miscellaneous
वर्तमान समय में इन्सान मन से सबसे ज्यादा अशांत है, वह हर समय किसी न किसी समस्या से गिरा रहता है मुख्य कारण है-गहरी सोच का अभाव। ज्यादातर घरो में लड़ाई झगड़ा, आपसी मतभेद एक आम समस्या है कारण छिछली सोच। हर सदस्य परिवार का सिर्फ ऊपरी तौर पर हल ढ़ूढ़ता है, कभी भी गहराई से चिंतन करके समाधान नहीं खोजता परिणामतः हर छोटी समस्या पर गुस्सा हो जाना आम बात हो गई और हर छोटी ख़ुशी में सेलिब्रेशन। घर का कोई मुखिया नहीं, सब परिवारजन अपने अपने मन की करने लगे।पुराने समय में परिवार के मुखिया गहरे पेठे (तल) वाले होते थे, वह हर सदस्य की समस्या सुनकर गहराई से विचार करके समाधान खोजते ताकि समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाये। वह कभी भी छोटी -२ समस्या में घबराहट नहीं दिखाते थे, बल्कि बिना CONFUSE हुए हर परिस्थिति में शांत रहते थे।किसी ने बहुत सूंदर कहा है :- " कह रहा है शोरे - दरिया से समंदर का सुकूत जिसका जितना
मनुष्य – जीवन के कुछ दोष!!

मनुष्य – जीवन के कुछ दोष!!

Miscellaneous
मनुष्य - जीवन के कुछ दोष मनुष्य जीवन में कुसंगति, कुकर्म, बुरे वातावरण, खान-पान आदि अनेक कारणों से कई तरह के दोष आ जाते हैं, जो देखने में छोटे लगते हैं पर वे ऐसे होते हैं, जो जीवन को अशांत, दुखी बनाने के साथ ही उन्नति मार्ग को रुख देते हैं।ऐसे ही कुछ दोषों में से कुछ पर विचार करते हैं :-१. स्वार्थ सोच :- जब मनुष्य के विचार सिर्फ उस तक सिमित हो जाते हैं, तो वह मनुष्य स्वार्थी सोच वाला (सिमित छोटी सोच वाला) स्वतः बन जाता हैं। उसके विचारो में गन्दगी आने लगती है। "किस काम से मुझे लाभ होगा", "मेरी प्रॉपर्टी कैसे बढे", "मेरा नाम कैसे सबसे ऊंचा हो", ऐसी प्रकार के विचारो और कार्यो में वह लगा रहता हैं। "मेरे किस कार्य से किसको परेशानी होगी", "किसको क्या असुविधा होगी", किसके दिल को ठेस पहुंचेगी, इसका विचार करने की इच्‍छा स्वार्थी दिल में नहीं होती। ऐसा व्यवहार स्वतः ही उसके दुश्मन की संख्या
Maturity का सम्बन्ध आदमी की उम्र से नहीं, बल्कि…

Maturity का सम्बन्ध आदमी की उम्र से नहीं, बल्कि…

Miscellaneous
Maturity का सम्बन्ध आदमी की उम्र से नहीं, बल्कि उसकी सोच से होता हैं।Maturity का meaning - परिपक्वता। --- Maturity Meaning in Hindi अर्थार्त ऐसा गुण जो अपने अन्दर अपने आस पास की अच्छाई और बुराई दोनों को पचा कर स्वयं अपना व्यव्हार अच्छा बनाये रख सके। परिपक्वता ऐसा गुण है जिसके तहत अपने आस पास मौजूद इन्सान की कमियां और अच्छाइयाँ जानकर भी उनके लिए बिना गलत सोचे, उनकी क्षमता का सही दिशा में उपयोग करे, बिना उनको नुक्सान पहुचाये।जैसे :- १. माता-पिता जिस रूप में मिले है, हमेंशा उनका सम्‍मान करें, बिना उनमें कोई कमी निकाले और बिना उन्‍हें बदले। हम उनकी उम्र के अनुसार कोई की हुई भूल बता सकते है, पर बिना गुस्‍सा किए।२. बच्चों को उनकी मासूमियत के आधार पर उनकी सोच को सही दिशा देने का प्रयत्न कर सकते है, उनका दोस्त बन कर। बजाय बहस और अपने बड़े होने का अहसास कराकर।३. पति-पत्नी के बीच एक
ईश्वर की रचना – कितनी अदभुद! कितनी गहन! कितनी सरल!

ईश्वर की रचना – कितनी अदभुद! कितनी गहन! कितनी सरल!

Miscellaneous
ईश्वर की रचना - कितनी अदभुद!, कितनी गहन!, कितनी सीधी(सरल) ईश्वर की रचना कितनी अद्भुद है, हम जितना चिंतन करते हैं प्रभु की इस दुनिया का, उतने ही नए-नए अहसास होते है। आज आपसे ऐसे ही कुछ अहसासों के बारे में जिक्र करना चाहती हूँ :- 1:- हमारी काया, यह मानव देह, इसके हर अंग का कितना महत्व है, सबके काम भगवान ने कितने अविश्वश्नीय बनाये है कि डॉक्‍टर इस देह से रोज नीत नए परिवर्तन का अध्ययन करते हैं, फिर भी हर पल नया अहसास वह पाते है।हमें भूख क्यू लगती है, खाना कैसे पच जाता है, ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम GOD ने गजब का बनाया है, दिमाग कि अजीब पहेली है इत्यादि।2:- एक मानव देह से दूसरी मानव देह का जन्म, अतुलनीय रचना प्रभु की। जितना सोचे उतना प्रभु का धन्यवाद्! यह सब तो प्रभु ने हमें आशीर्वाद के रूप में देकर भेजा है! अब कुछ ऐसे रोचक अहसास जो दुनियाँ में हम महसूस करते है:- 1:- एक बच्चा जब घर म
बात पते की – गुस्से में अनजाने रिश्ते ना तोड़े!!

बात पते की – गुस्से में अनजाने रिश्ते ना तोड़े!!

Miscellaneous
अक्सर इंसान को जब गुस्सा आता हैं, वह अपने आगे पीछे की सब भूल जाता हैं। कोई भी दूसरा इन्सान अगर गुस्से वाले से बात करे तो जो मुँह में आये जवाब दे देता हैं। अगर सामने वाला उसका अपना हैं तो २-४ बार सुन भी लेगा और उसे माफ़ कर देगा, वही अगर गुस्से में इन्सान किसी पराये या अनजान आदमी को बोल दे तो वह सामने वाले की नजर में हमेशा के लिए गिर जाता हैं। लोग उसे गुसैल के नाम से बोलने लग जाते हैं। कभी-कभी इंसान को भावनात्मक गुस्सा रहता हैं, यह वह गुस्सा होता है- जो उसे अपनों से उम्मीद जितना प्रेम न मिलने के कारण, या अपनों कि उम्मीद पर खरा न उतरने के कारण, किसी पारिवारिक समस्या कि वजह से होता हैं, जिसका समाधान खोजना अक्सर कठिन और अपनों से उलझा हुआ होता है- ऐसे में इंसान गुस्सा तेज बोल कर नहीं दिखता, सिर्फ अन्दरूनी सोच मे रहता हैं, मन मे कश्मकश चलती रहती है। ऐसे मे इन्सान से कोई बात का DISCUSS किया जाये
सही समय पर सही बात बोलना!

सही समय पर सही बात बोलना!

Miscellaneous
स्वयं की आत्मरक्षा के लिए- सही समय पर सही बात बोलना!"आवाज" - बोलने की ताकत, परमात्मा ने दी हैं। ईश्वर ने यह मानव देह बनायीं हैं उसके हर एक अंग का अपना महत्व हैं। जब इन्सान दुनिया में आता है, हम सब जानते है, बच्चे को पैदा होते ही उसे रुलाया जाता हैं ताकि बच्चे के कोई प्रॉब्लम तो नहीं, पता चल जाता है।बच्चे को प्रभु आवाज देके भेजता है ताकि जब तक वह बोलना नहीं सीखे वह रो कर, चिल्ला कर अपनी जरुरत अपने माता-पिता को बता सके। कहते है न, बिना रोये माँ भी दूध नहीं पिलाती बच्चे को। कितना सही कहा है - कि इंसान को धरती पर आते ही आवाज की जरुरत होती है अपनी बात कहने को और अपनी जरुरत बताने के लिए, और अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए। बच्चा पैदा होते ही रोये नहीं तो डॉ. और परिवार को लगता है बच्चा स्वस्थ नहीं, उसके फेफड़े ख़राब है क्या, उसको कही कंठ मिला है या नहीं इत्यादि।आवाज को शब्द परिवार के स
जानें कारण जिनसे बच्चें खो रहे है अपना बचपन!!

जानें कारण जिनसे बच्चें खो रहे है अपना बचपन!!

Kids / Children
!! खोता बिखरता हुआ बचपन !! बचपन की परिभाषा एक नजर में वह पल जहा सिर्फ प्यार और प्यार भरा स्पर्श सब अपनों से मिलता है, पुरे परिवार वाले बचपन में बिना किसी स्वार्थ के सिर्फ प्यार करते हैं, बच्चे की मासूम हरकतें, उनका तुतला के बोलना, धीरे धीरे गिर के उठना, खिल के हँसना, इन सब में भगवान की एक जलक देखने को मिलती है, और पेरेंट्स उन पलों के लिए सब कुछ कुर्बान कर देते है। बचपन का दिया प्यार ही बुढ़ापे में केयरिंग बन कर वापस पेरेंट्स को मिलता है।पर आज कल बच्चों का बचपन पहले जैसा Loving और केयरिंग, भावनाओं से भरा हुआ नहीं रहा। आज कल कुछ बच्चे अपना बचपन मज़बूरी में खो देतें हें। तो कुछ बच्चे पेरेंट्स के दिखावे के बोझ के आगे दब कर अपनी मासूमियत खो देते है, कुछ बच्चे अपने माता-पिता के गलत निर्णय के आगे अपना बचपन अकेले में गुजर देते है...जानें कुछ ऐसे ही कारण जिनसे बच्चे खो रहे है अपना बचपन:-
जिंदगी में उपहार का महत्व!!

जिंदगी में उपहार का महत्व!!

Miscellaneous
उपहार का शाब्दिक अर्थ - उप + हार (जब किसी का आदर करते है या आभार व्यक्त करते है, तो उसे हार पहनाते है। हार पहनाने से कही ऊपर, आभार हम उपहार देके व्यक्त करते है) हर रिश्ते में उपहार का बहुत महत्व होता है, एक दूसरे के लिए प्यार और आदर हम उपहार देके व्यक्त करते है। राखी पर बहन-भाई की भेंट का इंतजार करती है, करवाचौथ पर पत्नी पति से उपहार की उम्मीद रखती है, दिवाली पर परिवार के सब बच्चे गिफ्ट लेके खुश हो जाते है, और बुजुर्ग उपहार देके आशीर्वाद व्यक्त करते है। शादियों में हमारे रिश्तेदार दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद के साथ गिफ्ट देते है, वही पड़ोसी और करीबी मित्र बर्थडे और शादी की सालगिरह पर अपना प्रेम और धन्यवादः व्यक्त करने के लिए एक दूसरे को कुछ न कुछ देते-लेते रहते है।कितनी ख़ुशी होती है जब कोई अपना हमें हमारी प्रिय वस्तु एक गिफ्ट के रूप में देता है, मानो सब मिल गया हो। इस ख़ुशी की कीमत रुप
ऐसे बनाएं रंग भरी बर्फी !

ऐसे बनाएं रंग भरी बर्फी !

Vegetarian Recipes
मिठाई का हर त्यौहार में विशेष महत्व है, मिठाई से ही त्यौहार में मिठास घुलती है। एक स्पेशल रेसिपी मिठाई की आपके लिए:-सामग्री ➤ १. 1/2 किलोग्राम आगरा के पेठे। २. 1/4 किलोग्राम खोपरा (नारियल) का बुरा। ३. चेरी लाल, हरी और पीली एक पैकेट 50 ग्राम। ४. वनीला एस्सेंस। ५. केसर - 8-10 पत्ती।बनाने में समय :- १५ मिनट।रंग भरी बर्फी बनाने की विधि ➤ सबसे पहले आगरे के पेठे को कसनी से किस ले, उसमे कलरफुल चेरी मिक्स कर ले। उसके बाद उसमे थोड़ा सा वनीला एस्सेंस की 5-10 बूंद डाल ले। 2-4 पत्ती केसर की भी डाल ले। थोड़ा सा खोपरा का बुरा उस में मिक्स कर ले, ताकि मिठास थोड़ी खाने योग्य हो जाये। अब हाथ से छोटे छोटे लड्ड़ू या पेड़े बना ले और उसे खोपरे के बुरे पे रोल कर ले। ताकि ऊपर खोपरे के बुरे की हलकी परत बन जाएगी।आप चाहे तो शेप मेकर से डिजाईन में भी बना सकते है।एक कटोरी म
टेंशन – इन्सान का टशन !

टेंशन – इन्सान का टशन !

Miscellaneous
आज की समस्याएं और टेंशन इन्सान का टशन ही है। आज व्यक्ति अपने में बदलाव लाने से डरता है, इसका परिणाम की वह हमेशा समस्यायों में ही उलझ रहता है। जब भी कही एक साथ सब बातें करने बैठेंगे सबकी अपनी अपनी समस्याएं सामने आने लगती है, कोई अपने घर से परेशान, कोई ऑफिस से, कोई बिज़नस में हानि से, कोई अपने बच्चो से तो कोई अपनी लाइफ से थके हुए नजर आते है। जीना सब चाहते है, पर अपनी लाइफ स्टाइल समय के साथ बदलना नहीं चाहते और परिणाम असंतुस्ट जीवन।व्यक्ति पढ़ लिख गया, आद्यात्मिक शिक्षा भी ली है थोड़ी, धार्मिक ग्रन्थ भी पढ़े है, पर उनका Follow नहीं करना चाहते। क्यों की उनका अपना टशन है न! " हम जैसे है वैसे ही है, कोई हमे अपनाये तो ठीक नहीं तो ठीक " यह सोच आदमी को किसी का नहीं होने देती, खुद अपने आप का भी नहीं। सही है अपना एक एट्टिट्यूट (attitude) होना चाहिए, पर वह समय के साथ परिवर्तन शील होना चाहिए।कहते है
error: Content is protected !!