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पेन्सिल की कहानी ~ A Very Moral Story in Hindi

पेन्सिल की कहानी ~ A Very Moral Story in Hindi

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एक बालक अपनी दादी मां को एक पत्र लिखते हुए देख रहा था। अचानक उसने अपनी दादी मां से पूंछा, "दादी मां!, क्या आप मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हैं? आप मेरे बारे में लिख रही हैं, ना"यह सुनकर उसकी दादी माँ रुकीं और बोलीं, बेटा मैं लिख तो तुम्हारे बारे में ही रही हूँ, लेकिन जो शब्द मैं यहाँ लिख रही हूँ उनसे भी अधिक महत्व इस पेन्सिल का है जिसे मैं इस्तेमाल कर रही हूँ। मुझे पूरी आशा है कि जब तुम बड़े हो जाओगे तो ठीक इसी पेन्सिल की तरह होगे।यह सुनकर वह बालक थोड़ा चौंका और पेन्सिल की ओर ध्यान से देखने लगा, किन्तु उसे कोई विशेष बात नज़र नहीं आयी। वह बोला, किन्तु मुझे तो यह पेन्सिल बाकी सभी पेन्सिलों की तरह ही दिखाई दे रही है। इस पर दादी माँ ने उत्तर दिया, बेटा! यह इस पर निर्भर करता है कि तुम चीज़ों को किस नज़र से देखते हो।इसमें पांच ऐसे गुण हैं, जिन्हें यदि तुम अपना लो तो तुम सदा इस सं
मैं शिकार पर जा रहा हूँ!

मैं शिकार पर जा रहा हूँ!

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एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला... अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला "अरे छोटू, कहाँ जा रहे हो तुम?""मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ ", चीता रोमांचित होते हुए बोला!हा-हा-हा लकड़बग्घा हंसा और बोला अभी तो तुम्हारे खेलने-कूदने के दिन हैं, तुम इतने छोटे हो, तुम्हे शिकार करने का कोई अनुभव भी नहीं है, तुम क्या शिकार करोगे!!लकड़बग्घे की बात सुनकर चीता उदास हो गया... दिन भर शिकार के लिए वो बेमन इधर-उधर घूमता रहा कुछ एक प्रयास भी किये पर सफलता नहीं मिली और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा।अगली सुबह वो एक बार फिर शिकार के लिए निकला... कुछ दूर जाने पर उसे एक बूढ़े बन्दर ने देखा और पुछा, "कहाँ जा रहे हो बेटा ?"चीता बोला:- बंदर मामा, मैं शिकार पर जा रहा हूँ।बंदर बोला:- "बहुत अच्छे" तुम्हारी ताकत और गति के कारण तुम एक बेहद कुशल शि
हम क्यों ऐसा नहीं कर सकते?

हम क्यों ऐसा नहीं कर सकते?

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अगर एक छिपकली ऐसा कर सकती है, तो हम क्यों नहीं कर सकते?ये जापान में घटी सच्ची घटना है। जापान में एक व्यक्ति अपने घर को तोड़ कर दोबारा बनवा रहा था। जापान में घरों में लकड़ी की दीवारों में आमतौर पर खाली जगह रहती है। जब उस घर की दीवारों को तोड़ रहे थे तो उस दीवार की खाली जगह में एक छिपकली फंसी हुई मिली। उस छिपकली के पैर में दीवार के बाहर की तरफ से निकल कर एक कील घुसी हुई थी। जब उस छिपकली को देखा तो उस पर तरस तो आया ही साथ ही एक जिज्ञासा भी हुई क्योंकि जब कील को जांचा गया तो पता चला कि ये कील मकान बनाते समय 5 वर्ष पहले ठोकी गई थी।क्या हुआ था?छिपकली 5 वर्षों से एक ही जगह फंसी रहने के बावजूद जिन्दा थी!!दीवार के एक छोटे से अँधेरे हिस्से में बिना हिले-डुले 5 वर्षों तक जिन्दा रहना असम्भव था। ये वाकई हैरानी की बात थी कि छिपकली 5 वर्षों से जिन्दा कैसे थी! वो भी बिना एक कदम हिलाये, क्योंक
साधू की झोपड़ी!!

साधू की झोपड़ी!!

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किसी गाँव में दो साधू रहते थे, वे दिन भर भीख मांगते और मंदिर में पूजा करते थे। एक दिन गाँव में आंधी आ गयी और बहुत जोरों की बारिश होने लगी, दोनों साधू गाँव की सीमा से लगी एक झोपडी में निवास करते थे, शाम को जब दोनों वापस पहुंचे तो देखा कि आंधी-तूफ़ान के कारण उनकी आधी झोपडी टूट गई है।यह देखकर पहला साधू क्रोधित हो उठता है और बुदबुदाने लगता है, "भगवान तू मेरे साथ हमेशा ही गलत करता है में दिन भर तेरा नाम लेता हूँ, मंदिर में तेरी पूजा करता हूँ फिर भी तूने मेरी झोपडी तोड़ दी, गाँव में चोर – लुटेरे झूठे लोगो के तो मकानों को कुछ नहीं हुआ, बिचारे हम साधुओं की झोपडी ही तूने तोड़ दी ये तेरा ही काम है! हम तेरा नाम जपते हैं पर तू हमसे प्रेम नहीं करता"तभी दूसरा साधू आता है और झोपडी को देखकर खुश हो जाता है नाचने लगता है और कहता है- भगवान् आज विश्वास हो गया तू हमसे कितना प्रेम करता है ये हमारी आधी
बेटी आखिर बेटी होती है!! जरूर पढ़े !

बेटी आखिर बेटी होती है!! जरूर पढ़े !

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एक गरीब परिवार में एक सुंदर सी बेटी ने जन्म लिया, बाप दुखी हो गया बेटा पैदा होता तो कम से कम काम में तो हाथ बटाता, उसने बेटी को पाला जरूर, मगर दिल से नही वो पढने जाती थी तो ना ही स्कूल की फीस टाइम से जमा करता, और ना ही कापी किताबों पर ध्यान देता था, अक्सर दारू पी कर घर में कोहराम मचाता था।उस लड़की की माँ बहुत अच्छी व बहुत भोली भाली थी वो अपनी बेटी को बडे लाड प्यार से रखती थी, वो पति से छुपा-छुपा कर बेटी की फीस जमा करती और कापी किताबों का खर्चा देती थी। अपना पेट काटकर फटे पुराने कपडे पहन कर गुजारा कर लेती थी, मगर बेटी का पूरा खयाल रखती थी पति अक्सर घर से कई कई दिनों के लिये गायब हो जाता था। जितना कमाता था दारू मे ही फूक देता था !!वक्त का पहिया घूमता गया...बेटी धीरे-धीरे समझदार हो गयी, दसवीं क्लास में उसका एडमिशन होना था, मॉ के पास इतने पैसै ना थे जो बेटी का स्कूल में दाखिला करा
संसार मे अच्छाई और बुराई दोनों है!

संसार मे अच्छाई और बुराई दोनों है!

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एक स्कूल में टीचर ने अपने छात्रो को एक कहानी सुनाई और बोली एक समय की बात है की एक छोटे समुद्री जहाज पर पति पत्‍नी का एक जोड़ा सफर कर रहा था, जहाज बीच समुद में जाकर दुर्घटना ग्रस्त हो गया और डूबने लगा, उन्होने देखा की जहाज पर एक लाइफबोट है पर उसमें सिर्फ एक ही व्यक्ति बैठ सकता था, जिसे देखते ही वो आदमी अपनी पत्नी को धक्का देते हुए खुद कूद कर उस लाइफबोट पर बैठ गया, उसकी पत्नी जोर से चिल्ला कर कुछ बोली...टीचर ने बच्चो से पूछा की तुम अनुमान लगाओ वो चिल्लाकर क्या बोली होगी?बहुत से बच्चो ने लगभग एक साथ बोला की वो बोली होगी तुम बेवफा हो, मे अंधी थी जो तुमसे प्यार किया, मे तुमसे नफरत करती हूँ।तभी टीचर ने देखा की एक बच्चा चुप बैठा है और कुछ नहीं बोल रहा, उसने उसे बुलाया और कहा बताओ उस महिला ने क्या कहा होगा। तो वो बच्चा बोला मुझे लगता है की उस महिला ने चिल्लाकर कहा होगा की "अपने बच्चे क
दुख सुख में बदल जायेगा!

दुख सुख में बदल जायेगा!

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एक आश्रम में गुरू और शिष्‍य रहते थे। एक दिन शिष्‍य गुरू के पास आया और बोला कि एक व्‍यक्ति आश्रम में आया है आैर वह अपनी भैसों को कुछ समय के लिए हमारे आश्रम में भैसों को छोडना चाहता हैगुरूजी ने शिष्‍य की बात सुनकर बडे शांत मन से कहा कि चलो अच्‍छा है, दूध पीने को मिलेगा!कुछ समय बाद शिष्य ने आकर गुरू से कहा: गुरू जी ! जिस व्यक्ति ने अपनी भैसों को हमारे आश्रम में छोडी थी, आज वह अपनी भैसो को वापिस ले जाना चाहता है!शिष्‍य की बात सुनकर गुरू ने कहा:- चलो अच्छा हुआ! गोबर उठाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी"इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि... 'परिस्थिति' बदले तो अपनी 'मनोस्थिति' बदल लो, दुख सुख में बदल जायेगा! "सुख दुख आख़िर दोनों मन के ही तो समीकरण हैं।"English Summary: moral is If "Situation" Changes then we should change our "Mentality", By This Sorrow will Change to
सौंदर्य सिर्फ चेतना का होता है!!

सौंदर्य सिर्फ चेतना का होता है!!

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बुद्ध ने 32 कुरूपताएं शरीर में गिनायी हैं, इन बत्तीस कुरूपताओं का स्मरण रखने का नाम कायगता-स्मृति है। पहली तो बात, यह शरीर मरेगा। इस शरीर में मौत लगेगी। मां के गर्भ में तुम कहां थे, तुम्हें पता है? मल-मूत्र से घिरे पड़े थे, उसी मल-मूत्र से तुम्हारा शरीर धीरे-धीरे निर्मित हुआ और उसी मल-मूत्र में नौ महीने बड़े हुए यह पैदा ही बड़ी गंदगी से हुआ है।फिर बुद्ध कहते हैं कि अपने शरीर में इन विषयों की स्मृति रखे— केश, दांत, नख, रोम, मांस, त्वक्, अस्थिमज्जा, स्नायु, अस्थि, यकृत, क्लोमक, फुस्फुस, प्लीहा, उदरस्थ मल—मूत्र, आत, पित्त, कफ, चर्बी, रक्त, पसीना, लार आदि इन सब चीजों से भरा हुआ है यह शरीर, इसमें सौंदर्य हो ही कैसे सकता है!सौंदर्य तो सिर्फ चेतना का होता है देह तो मल-मूत्र का घर है। देह तो धोखा है और इस धोखे में मत पड़ना, इस बात को याद रखना कि इसको तुम कितने ही इत्र छिडको तब भी इसकी दुर
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