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ज्ञानवाणी – शरीर से संवाद!!

ज्ञानवाणी – शरीर से संवाद!!

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स्‍वयं का शरीर से संवाद होने दो! उससे कहो कि विश्रांत हो जाएं, उसे कहो कि यहां डरने की कोई जरूरत नहीं है! तनाव खुद दूर होता जाएगा...सत्‍य की शक्ति! सत्‍य अपने आप में एक शक्ति है, साधना और तपस्‍या है। जिसके पास सत्‍य की शक्ति है उसके पास दुनिया की हर वस्‍तु स्‍वत: ही आ जाती है। झूठ से तो सिर्फ आश्‍वासन, दिखावा और फरेब मिलता है। जब बच्‍चा छोटा होता है तो उसे सिखाते है कि जीवन में सच बोलना चाहिए, ईमानदारी के पथ पर चलना चाहिए। सत्‍य ही मनुष्‍य का असली आभूषण है। जो सच को अपनाता है वह कहीं भी असफल नहीं होता है।शरीर से संवाद! बंद आंखों के साथ अपने शरीर के भीतर नख से शिखर तक जाकर देखो कि तनाव कहां है। और तब उस हिस्‍से से बात करो जैसे कि तुम अपने मित्र से बात करते हो। अपने और अपने शरीर के साथ संवाद होने दो। उससे कहो कि विश्रांत हो जाएं। उसे कहो कि यहां डरने की कोई जरूरत नहीं है। डरो
ईश्वर की रचना – कितनी अदभुद! कितनी गहन! कितनी सरल!

ईश्वर की रचना – कितनी अदभुद! कितनी गहन! कितनी सरल!

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ईश्वर की रचना - कितनी अदभुद!, कितनी गहन!, कितनी सीधी(सरल) ईश्वर की रचना कितनी अद्भुद है, हम जितना चिंतन करते हैं प्रभु की इस दुनिया का, उतने ही नए-नए अहसास होते है। आज आपसे ऐसे ही कुछ अहसासों के बारे में जिक्र करना चाहती हूँ :- 1:- हमारी काया, यह मानव देह, इसके हर अंग का कितना महत्व है, सबके काम भगवान ने कितने अविश्वश्नीय बनाये है कि डॉक्‍टर इस देह से रोज नीत नए परिवर्तन का अध्ययन करते हैं, फिर भी हर पल नया अहसास वह पाते है।हमें भूख क्यू लगती है, खाना कैसे पच जाता है, ब्लड सर्कुलेशन सिस्टम GOD ने गजब का बनाया है, दिमाग कि अजीब पहेली है इत्यादि।2:- एक मानव देह से दूसरी मानव देह का जन्म, अतुलनीय रचना प्रभु की। जितना सोचे उतना प्रभु का धन्यवाद्! यह सब तो प्रभु ने हमें आशीर्वाद के रूप में देकर भेजा है! अब कुछ ऐसे रोचक अहसास जो दुनियाँ में हम महसूस करते है:- 1:- एक बच्चा जब घर म
बात पते की – गुस्से में अनजाने रिश्ते ना तोड़े!!

बात पते की – गुस्से में अनजाने रिश्ते ना तोड़े!!

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अक्सर इंसान को जब गुस्सा आता हैं, वह अपने आगे पीछे की सब भूल जाता हैं। कोई भी दूसरा इन्सान अगर गुस्से वाले से बात करे तो जो मुँह में आये जवाब दे देता हैं। अगर सामने वाला उसका अपना हैं तो २-४ बार सुन भी लेगा और उसे माफ़ कर देगा, वही अगर गुस्से में इन्सान किसी पराये या अनजान आदमी को बोल दे तो वह सामने वाले की नजर में हमेशा के लिए गिर जाता हैं। लोग उसे गुसैल के नाम से बोलने लग जाते हैं। कभी-कभी इंसान को भावनात्मक गुस्सा रहता हैं, यह वह गुस्सा होता है- जो उसे अपनों से उम्मीद जितना प्रेम न मिलने के कारण, या अपनों कि उम्मीद पर खरा न उतरने के कारण, किसी पारिवारिक समस्या कि वजह से होता हैं, जिसका समाधान खोजना अक्सर कठिन और अपनों से उलझा हुआ होता है- ऐसे में इंसान गुस्सा तेज बोल कर नहीं दिखता, सिर्फ अन्दरूनी सोच मे रहता हैं, मन मे कश्मकश चलती रहती है। ऐसे मे इन्सान से कोई बात का DISCUSS किया जाये
सही समय पर सही बात बोलना!

सही समय पर सही बात बोलना!

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स्वयं की आत्मरक्षा के लिए- सही समय पर सही बात बोलना!"आवाज" - बोलने की ताकत, परमात्मा ने दी हैं। ईश्वर ने यह मानव देह बनायीं हैं उसके हर एक अंग का अपना महत्व हैं। जब इन्सान दुनिया में आता है, हम सब जानते है, बच्चे को पैदा होते ही उसे रुलाया जाता हैं ताकि बच्चे के कोई प्रॉब्लम तो नहीं, पता चल जाता है।बच्चे को प्रभु आवाज देके भेजता है ताकि जब तक वह बोलना नहीं सीखे वह रो कर, चिल्ला कर अपनी जरुरत अपने माता-पिता को बता सके। कहते है न, बिना रोये माँ भी दूध नहीं पिलाती बच्चे को। कितना सही कहा है - कि इंसान को धरती पर आते ही आवाज की जरुरत होती है अपनी बात कहने को और अपनी जरुरत बताने के लिए, और अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए। बच्चा पैदा होते ही रोये नहीं तो डॉ. और परिवार को लगता है बच्चा स्वस्थ नहीं, उसके फेफड़े ख़राब है क्या, उसको कही कंठ मिला है या नहीं इत्यादि।आवाज को शब्द परिवार के स
जानें जीवन में मुस्कुराहट का क्‍या महत्व होता है!

जानें जीवन में मुस्कुराहट का क्‍या महत्व होता है!

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👉 कभी सड़क पर चलते हुए अनजान आदमी को देखकर मुस्कुराएं, देखिये उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ जाएगी!👉 अगर आप घर के मुखिया हैं, तो मुस्कुराते हुए शाम को घर में घुसेंगे तो देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा।👉 अगर आप डॉक्टर हैं, और मुस्कराते हुए मरीज का इलाज करेंगे तो मरीज का आत्मविश्वास दोगुना हो जायेगा।👉 अगर आप एक अध्यापक हैं, और जब आप मुस्कुराते हुए कक्षा में प्रवेश करेंगे तो देखिये सारे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा जाएगी।👉 अगर आप एक ग्रहणी हैं, तो मुस्कुराते हुए घर का हर काम किजिये फिर देखना पूरे परिवार में खुशियों का माहौल बन जायेगा।👉 अगर आप दुकानदार हैं, और मुस्कुराकर अपने ग्राहक का सम्मान करेंगे तो ग्राहक खुश होकर आपकी दुकान से ही सामान लेगा।👉 अगर आप एक बिजनेसमैन हैं, और आप खुश होकर कंपनी में घुसते हैं तो देखिये सारे कर्मचारियों के मन क
जिंदगी में उपहार का महत्व!!

जिंदगी में उपहार का महत्व!!

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उपहार का शाब्दिक अर्थ - उप + हार (जब किसी का आदर करते है या आभार व्यक्त करते है, तो उसे हार पहनाते है। हार पहनाने से कही ऊपर, आभार हम उपहार देके व्यक्त करते है) हर रिश्ते में उपहार का बहुत महत्व होता है, एक दूसरे के लिए प्यार और आदर हम उपहार देके व्यक्त करते है। राखी पर बहन-भाई की भेंट का इंतजार करती है, करवाचौथ पर पत्नी पति से उपहार की उम्मीद रखती है, दिवाली पर परिवार के सब बच्चे गिफ्ट लेके खुश हो जाते है, और बुजुर्ग उपहार देके आशीर्वाद व्यक्त करते है। शादियों में हमारे रिश्तेदार दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद के साथ गिफ्ट देते है, वही पड़ोसी और करीबी मित्र बर्थडे और शादी की सालगिरह पर अपना प्रेम और धन्यवादः व्यक्त करने के लिए एक दूसरे को कुछ न कुछ देते-लेते रहते है।कितनी ख़ुशी होती है जब कोई अपना हमें हमारी प्रिय वस्तु एक गिफ्ट के रूप में देता है, मानो सब मिल गया हो। इस ख़ुशी की कीमत रुप
टेंशन – इन्सान का टशन !

टेंशन – इन्सान का टशन !

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आज की समस्याएं और टेंशन इन्सान का टशन ही है। आज व्यक्ति अपने में बदलाव लाने से डरता है, इसका परिणाम की वह हमेशा समस्यायों में ही उलझ रहता है। जब भी कही एक साथ सब बातें करने बैठेंगे सबकी अपनी अपनी समस्याएं सामने आने लगती है, कोई अपने घर से परेशान, कोई ऑफिस से, कोई बिज़नस में हानि से, कोई अपने बच्चो से तो कोई अपनी लाइफ से थके हुए नजर आते है। जीना सब चाहते है, पर अपनी लाइफ स्टाइल समय के साथ बदलना नहीं चाहते और परिणाम असंतुस्ट जीवन।व्यक्ति पढ़ लिख गया, आद्यात्मिक शिक्षा भी ली है थोड़ी, धार्मिक ग्रन्थ भी पढ़े है, पर उनका Follow नहीं करना चाहते। क्यों की उनका अपना टशन है न! " हम जैसे है वैसे ही है, कोई हमे अपनाये तो ठीक नहीं तो ठीक " यह सोच आदमी को किसी का नहीं होने देती, खुद अपने आप का भी नहीं। सही है अपना एक एट्टिट्यूट (attitude) होना चाहिए, पर वह समय के साथ परिवर्तन शील होना चाहिए।कहते है
जानें ईमानदारी का वास्तविक अर्थ !!

जानें ईमानदारी का वास्तविक अर्थ !!

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ईमानदारी का वास्तविक अर्थ :- " ई+ मान+ दारी "अपने आप के साथ जो वफादार रहे, अपनी आत्मा (I) का मान जो रखता है वह गुण का नाम है ईमानदारी! ईमानदारी को इन्सान का सर्वश्रेष्ठ गुण और गहना कहा जाता है, यह गहना ऐसा है जो आज के समय में हर मनुष्य के अंदर से गायब होता नजर आ रहा है।ईमानदारी को लोग सिर्फ हिसाब, रुपये के लेन-देन में गलत नहीं करने तक ही लेते है, जो हिसाब में एक रुपये को इधर-उधर न करे लोग उसे ईमानदार कहेंगे। पर क्या वास्तव में ईमानदारी का अर्थ इतना ही है? नहीं, ईमानदारी का गुण अपने व्यवहार में हर जगह लागू होता है,जैसे:- १. जब हम विद्यार्थी है तो ईमानदारी से गुरु के बताये हुए ज्ञान को अपनाये। पढ़ते वक़्त दिमाग को खेलने में नहीं लगा के क्लास रूम में ही रखना ईमानदारी है।२. जब हम एम्प्लोयी है तो जिस ऑफिस में बैठे है उस ऑफिस के प्रति अपने कार्य को पूरा करना ईमानदारी है।
आत्मविश्लेषण (Introspection)

आत्मविश्लेषण (Introspection)

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आज के समय हर व्यक्ति में अव्यवस्था, मानसिक तनाव और अंतर्मन की शांति का अभाव देखने को मिलता है। कोई भी व्यक्ति थोड़ी सी ज्यादा बात होने पर जुंझला जाता है, उनकी सहन शक्ति और समझने की शक्ति जैसे खत्म सी लगती है। इसका वास्तविक कारण हम सोचे तो पाएंगे की व्यक्ति अपना आत्मविश्लेषण नहीं करता है।आत्मविश्लेषण का तात्पर्य - स्वयं का मूल्यांकन करना अर्थात अपने स्वयं के कार्यों का मापन।एक व्यक्ति रात को सोने से पहले अपने दिनभर की रूटीन को एक बार रीप्ले (Replay) कर के देखे कि :-१. आज मैंने कौनसे कार्य को कितना वक़्त दिया? २. कौनसा कार्य पूरे मन से किया और कौनसा कार्य टालमटोल किया। ३. मेरे किस काम से किसको फायदा हुआ और किस को क्या नुकसान हुआ। ४. मैंने अपने हर रिश्तें के साथ कितनी ईमानदारी और कर्त्तव्य निष्ठा दिखाई। ५. आज किस किस के चहरे पर मै एक मुस्कान लाया? ६. मैंने अपने कार्य पूर्ति
इतना व्यस्त न रहो की रिश्तों की मस्ती न रहे!!

इतना व्यस्त न रहो की रिश्तों की मस्ती न रहे!!

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आज के समय में एक प्रॉब्लम हर इन्सान के साथ रहती है, जब वह फ्री होते है और उसके साथ वाले व्यस्त होते है, तो पहेली शिकायत सामने वाले से होती है- "तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम ही नहीं है" यह शिकायत एक पति-पत्नी में समय के साथ सबसे ज्यादा, पेरेंट्स की बच्चे के साथ जो अब बड़े हो गए है और अपने माता पिता को सिर्फ फ़ोन पर याद करते है या साथ में रहते है तो सिर्फ सुबह-शाम प्रणाम करते वक़्त देखते है, भाई की बहन के साथ जो अब ससुराल में है, दोस्तों में हमेशा रहती है।एक पत्नी की अक्सर अपने पति से प्यार भरी शिकायत होती है की - मेरे लिए आपके पास टाइम ही नहीं है, क्यू की पति दिन भर बाहर नौकरी करता है, घर पर जितना टाइम रहे उतना टाइम अपने बच्चो के साथ, अपनी पत्नी की काम में हेल्प करने में निकल देता है, और और दोनों थक के सो जाते है, जब तक दोनों साथ रहेंगे काम में व्यस्त रहेंगे, एक खाना बनाएगा तो दूसरा बच्चे को
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