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वचन का महत्व !

वचन का महत्व !

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आज के समय में हम देखते है की रिश्तों में पहले जितनी मिठास और भावनाये नहीं रही। आखिर इसकी क्या वजह है... अगर थोड़ा सा सोचे तो पाएंगे की रिश्तों में वचन बध्यता का अभाव हो रहा है। आज की पीढ़ी अपने रिश्तों को नहीं समझती और न ही रिश्तों का महत्व। अगर हम सब अपने रिश्तों के प्रति अपने कर्त्तव्य और वचन बध्यता को पूरा करे तो हमारे अपनों के बीच कितना प्रेम बढ़ेगा...आईये जाने वचन का महत्त्व..१. माता पिता अपने बच्चे के लिए कितने प्यार से हर कर्त्तव्य पूरा करते है, क्यों की वह अपने भगवान को वादा करते है की हमारी झोली भरो आप, हम आने वाले का बहुत ख्याल रखेंगे। अपने बच्चे के लिए माता पिता हर तरह का त्याग करते है.. इस तरह बच्चे का पहला कर्त्तव्य और वादा अपने माता पिता के लिए बनता है.. जब हम बड़े होते है तो जो हमारी जिंदगी में आते जाते है, उनके उस प्यार और देखभाल के लिए हमारी जिमेदारी बनती जाती है।
सफलता की आदतें ~ प्रेरणादायक लेख

सफलता की आदतें ~ प्रेरणादायक लेख

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दोस्‍तों अगर आपकों अपनी जिंदगी में सफल बनना है तो, आपको मेहनत, लग्‍न के साथ साथ आपनी आदतों को भी सुधारना पडेगा क्‍योकि हमारी आदतें ही हमारें जीवन को दिशा प्रदान करती है। आपको एक छोटी सी कहानी के जरिये हम यह बताने की कोशिश करते है कि कैसे आदतें हमारी सफलता में मददगार साबित होती है।दो बचपन के दोस्त बहुत सालों बाद मिलते है, एक दोस्त अपनी अच्छी आदतों की वजह से सफलता के ऊचॉंईयों पर पहुँच जाता है, और अमीर बन जाता है। जबकि दूसरा दोस्त अपने आलस, बहानेबाजी जैसी बुरी आदतों की वजह से गरीब रह जाता है, और गरीबी में आपने दिन गुजारता है।जब अमीर दोस्त अपने बचपन के दोस्त के घर पर जाता है, तो देखता है कि घर में चारों तरफ जाले लगे है, घर का सामान अस्त-व्यस्त है, वह जो कुर्सी देता है उस पर भी बहुत सी धूल लगी हुई है। तो अमीर दोस्त अपने गरीब दोस्त से कहता है - "तुम अपना घर साफ क्यों नहीं रखते हो" तब ग
अपनी गलतियों को कैसे भुलाये! खुद को माफ़ करने के 5 तरीके।

अपनी गलतियों को कैसे भुलाये! खुद को माफ़ करने के 5 तरीके।

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बहुत बार हम कुछ ऐसा कर देते हैं या बोल देते हैं जिसके लिए हमें बाद में बहुत खेद और पश्चाताप होता है। खासकर तब जब आपने किसी अपने का दिल दुखाया हो।रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय, टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ जाय।आपको हम 5 बातें बताते है जो आपको और अपनी गलतियों को माफ़ करने में बहुत मदादगार होगी।1. माफ़ी मांगने में संकोच न करें:-कुछ इस तरह हमने अपनी जिंदगी आसान कर ली, कुछ को माफ़ कर दिया और कुछ से माफ़ी मांग ली।हालाँकि माफ़ी मांगना इतना आसान नहीं होता लेकिन अगर आप किसी से माफ़ी मांगने के लिए पहल करते हैं तो ये दर्शाता है कि आपसे गलती हुयी थी और आप उसके लिए शर्मिन्दा हैं, और इस तरह आप वैसी गलतियों को दोहराने से बच जाते हैं।2. शर्म के मरे छुपने की वजाय सामने आईये:- अपनी किसी भयंकर गलती के बाद शर्म से छुप जाना बिलकुल भी अच्छा नहीं है। अपनी गलती के बाद हम अपने दोस्त स
एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए!!

एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए!!

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घनश्याम दास जी बिड़ला (G.D. Birla) द्वारा अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला (B.K. Birla) के नाम 1934 में लिखा गया एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए।चि. बसंत... यह जो लिखता हूँ उसे बड़े होकर और बूढ़े होकर भी पढ़ना, अपने अनुभव की बात कहता हूँ। संसार में मनुष्य जन्म दुर्लभ है और मनुष्य जन्म पाकर जिसने शरीर का दुरुपयोग किया, वह पशु है। तुम्हारे पास धन है, तन्दुरुस्ती है, अच्छे साधन हैं, उनको सेवा के लिए उपयोग किया, तब तो साधन सफल है अन्यथा वे शैतान के औजार हैं। तुम इन बातों को ध्यान में रखना।धन का मौज-शौक में कभी उपयोग न करना, ऐसा नहीं की धन सदा रहेगा ही, इसलिए जितने दिन पास में है उसका उपयोग सेवा के लिए करो, अपने ऊपर कम से कम खर्च करो, बाकी जनकल्याण और दुखियों का दुख दूर करने में व्यय करो। धन शक्ति है, इस शक्ति के नशे में किसी के साथ अन्याय हो जाना संभव है, इसका ध्यान रखो क
कैसे रहें खुश..?

कैसे रहें खुश..?

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एक बार एक अध्यापक कक्षा में पढ़ा रहे थे। अध्यापक ने कागज़ के टुकडे बाँट कर सब बच्चों से कहा कि सब लोग अपने-अपने नाम की एक पर्ची बनायें। सभी बच्चों ने तेजी से अपने-अपने नाम की पर्चियाँ बना लीं और टीचर ने वो सारी पर्चियाँ लेकर एक बड़े से डब्बे में डाल दीं।अब सब बच्चों से कहा कि वो अपने-अपने नाम की पर्चियां ढूंढे। फिर क्या था, सारे बच्चे डब्बे पे झपट पड़े और अपनी-अपनी पर्चियां ढूंढने लगे और तेजी से ढूंढने के चक्कर में कुछ पर्चियां फट भी गयीं पर किसी को भी इतनी सारी पर्चियों में अपने नाम की पर्ची नहीं मिल पा रही थी।टीचर ने कहा- “क्या हुआ किसी को अपने नाम की पर्ची मिली?”सारे बच्चे मुँह लटकाये खड़े थे।टीचर मुस्कुराये और बोले- “कोई बात नहीं, एक काम करो सारे लोग कोई भी एक पर्ची उठा लो और वो जिसके नाम की हो उसे दे दो।“बस फिर क्या था, सारे बच्चों ने एक एक पर्ची उठा ली और जिसके नाम की
बहाने (Excuses) Vs सफलता (Success)

बहाने (Excuses) Vs सफलता (Success)

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बहाना 1 :- मेरे पास धन नही! जवाब :- इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।बहाना 2 :- मुझे बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी! जवाब :- लता मंगेशकर को भी बचपन से परिवार की जिम्मेदारी उठानी पङी थी।बहाना 3 :- मै अत्यंत गरीब घर से हूँ! जवाब :- पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी गरीब घर से थे।बहाना 4 :- बचपन मे ही मेरे पिता का देहाँत हो गया था! जवाब :- प्रख्यात संगीतकार ए.आर.रहमान के पिता का भी देहांत बचपन मे हो गया था।बहाना 5 :- मुझे उचित शिक्षा लेने का अवसर नही मिला! जवाब :- उचित शिक्षा का अवसर फोर्ड मोटर्स के मालिक हेनरी फोर्ड को भी नही मिला!बहाना 6 :- मेरी उम्र बहुत ज्यादा है! जवाब :- विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन के मालिक ने 60 साल की उम्र मे पहला रेस्तरा खोला था।बहाना 7 :- मेरी लंबाई बहुत कम है! ज
श्रद्धा, विश्वास और सबूरी!

श्रद्धा, विश्वास और सबूरी!

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श्रद्धा, विश्वासः, सबूरी कितने सुन्दर तीन शब्दः में पूरी जिंदगी का राज बता दिया - साईबाबा ने...कलयुग में यह तीन शब्दः अगर जीवन में उतर ले तो सब कुछ काफी आसान लगने लगेगा। परिवार संगठित और समाज और राष्ट्र संपन्न ...श्रद्धा:- भावार्थ रूप में - हमारी आस्था, आदर, और आंतरिक झुकाव, निस्वार्थ प्रेम। बच्चे अपने पेरेंट्स के प्रति जितनी श्रद्धा बचपन में रखते है अगर उतनी ही बड़े होने तक रखे, शिष्य अपने गुरु के लिए, पत्नी अपने पति के लिए रखे, दोस्त अपने दोस्त के प्रति, छोटे अपने बड़ो के प्रति हमेशा श्रदा रखे... तो रिश्तें बहुत खूबसूरत लगते है!विश्वास:- तसल्ली... फेथ... यह विश्वास श्रद्धा के उपरांत ही आता है... जिसमे हमारी श्रद्धा होती है उस पर हम स्वतः ही विश्वासः करने लगते है, सच्ची श्रद्धा के साथ जो विश्वास पनपता है.. वह अत्तुल्य होते है। श्रद्धा अटल है तो विश्वास भी अटल ही होगा।सबूरी:-
वक्त के साथ रिश्ते कैसे बदल रहे हैं! आइए एक नजर डालें!

वक्त के साथ रिश्ते कैसे बदल रहे हैं! आइए एक नजर डालें!

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1. जहां पहले माँ पिता के चरणों में स्वर्ग होता था। आज वहां माता पिता घर में बोझ लगते है। बच्चों को उनका होना उनकी आजादी में रुकावट लगती है।२. जहां पहले बेटियां पिता के सामने नजरे झुका के बात करती थी। आज नजर उठा के जवाब देना अपनी मोर्डेन सोच बोलती है!३. जहां पहले बेटा हर जरुरी फैसला पिता के तजुर्बे से लेता था। आज वही बिना घर में बताये अकेले निर्णय लेना अपना आत्मविशवास बोलता है!४. जहां पहले बहुएें घुंघट निकाल कर अपनों को सामान देती थी। आज उसे रूढ़िवादी बोलते है! और पेंट शर्ट पहनना मोर्डेन कल्चर!५. जहां पहले छोटे बच्चे दादा-दादी की कहानियाँ सुनकर सोते थे। आज वीडियो गेम खेल कर सोते है, उनके माता पिता इतने व्यस्त रहते है की नौकरानी उन बच्चों की माँ बन के पालती है!जैसा प्यार आज के माता पिता बच्चों को देते है, वही.. बच्चे उनको वृद्धवस्था में वृद्धा आश्रम छोड़ के आते है! जवान
धैर्य… धैर्य… धैर्य… (जीवन मंत्र)

धैर्य… धैर्य… धैर्य… (जीवन मंत्र)

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आज की भागती दौड़ती जिंदगी में अगर किसी से कहे की धैर्य रखना सीखो, लोग इसे बड़े हल्के ले लेते है, उन्हें लगता है जैसे दुनिया इतनी तेज और धीरज रखने की बात करते है। पर यह वाकई अद्भुत सत्य है हम थोड़ा सा धैर्य रख के बड़ी से बड़ी समस्या सुलझा सकते है! जैसे :-1:- आज की दैनिक जिंदगी में माता-पिता बच्चों को उनकी किसी गलती पर या उसके किसी कार्य पर डाँट देते है, और बच्चा भी उसकी डाँट पे जल्दी से प्रतिकिर्या कर देता है, "गुस्से से" ऐसे में बहस बढ़ जाती है, और लड़ाई भी अगर बच्चा थोड़ा सा धैर्य रख कर एक पल सोचे की आखिर उसे डांटा क्यूं गया है। थोड़ा रूक कर अपने पेरेंट्स से बात करके अपनी सफाई दे सकता है। तो ऐसे में बच्चे का पेरेंट्स के प्रति और पेरेंट्स का बच्चे के प्रति समझ और प्यार बढ़ता ही है।2:= काम से देरी से लौटने पे पत्नी अपने पति पर आते ही अगर तेजी से बोलना शुरू हो जाये और पति भी वैसे ही गुस्से
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