Tag: Gharelu Nuskhe in Hindi

पाइल्‍स की समस्‍या से बच सकते हैं!!

पाइल्‍स की समस्‍या से बच सकते हैं!!

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14 प्रतिशत शहरी लोग कब्‍ज से परेशान हैं। 10 प्रतिशत लोग पूरी दुनिया में कब्‍ज पीडि़त100 में से 70-80 प्रतिशत महिलाओं को होती है यह समस्‍या। मुख्‍य कारण पेल्विक फ्लोर मसल्‍स का प्रसव बाद कमजोर होना है।मरीज को पाइल्‍स का पता नहीं चलता, खारिश महसूस होना, मस्‍से व जोर लगाने पर खून आ सकता है। बी अवेयर कब्‍ज पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्‍यक्ति का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्‍याग में कठिनाई होती है। पेट साफ नहीं हो पाता है। ज्‍यादा जोर लगाने से भी स्‍टूल पास नहीं होता है। महिलाओं में प्रसव बाद कूल्‍हे व आस-पास की नसें कमजोर होती हैं। इसलिए पाइल्‍स की आशंका ज्‍यादा रहती है।असमय खानपान, मिर्च-मसालेदार चीजें खाने, तनाव, खराब जीवन शैली की वजह से दिक्‍कत होती है। भोजन में फाइबर व प्रोटीन युक्‍त चीजें लें। जैसी मौसमी, हरी सब्जियां, सोयाबीन, दालें, दानामेथी, अलसी के
गर्दन के दर्द को न लें हल्‍के में!!

गर्दन के दर्द को न लें हल्‍के में!!

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गर्दन का दर्द दूर करने के लिए विटामिन बी कॉम्‍प्‍लैक्‍स लें, यह इंफ्लेमेशन को दूर करता है। गर्दन का दर्द कई कारणों से हो सकता है जैसे विकृत होते है डिस्‍क संबंधी रोग, गले में अकड़न, झुनझुनी, विप्‍लेश, हरनिएटेड डिस्‍क के कारण गर्दन का चोटिल होना या स्‍नायु में ऐंठन। गले के वायरस संक्रमण जैसे सामान्‍य संक्रमण के परिणामस्‍वरूप भी ग्रंथियों में सूजन और गले में दर्द की शिकायत हो सकती है। गले का दर्द टीबी एवं रीढ़ की हड्डी में संक्रमण तथा मेनिनजाइटिस की वजह से भी सकता है। इसके अलावा खेल, वाहन चालना या घुड़सवारी के दौरान हो जाने वाली दुर्घटनाओं के बाद भी गले में दर्द होता है। गले में दर्द की वजह से कई बार कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। सिरदर्द, चेहरे, कंधे में होने वाले दर्द भी गले को प्रभावित करते है। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय आजमाएं... खिंचाव से हो सकता है दर्द गले और पीठ के ऊपरी हिस्‍से
आंख फड़कने में घरेलू उपचार!!

आंख फड़कने में घरेलू उपचार!!

Health Care
आंख फड़कने के कारण कैफीन, स्‍ट्रेस, एलर्जी और ड्राई आई भी हो सकते हैं। आंख फड़कना सामान्‍य समस्‍या है, जो स्‍वत: ही कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, लेकिन यह समस्‍या कई दिनों तक लगातार बनी रहे तो, तो चिकित्‍सक से उचित सलाह अवश्‍य लेनी चाहिए। यह क्रोनिक मूवमेंट डिस्‍ऑर्डर भी हो सकता है। आंख फड़कने के पीछे बहुत ज्‍यादा कैफीन लेना भी हो सकता है। इसके अलावा तनाव की वजह से भी इस तरह की समस्‍या हो सकती है। न्‍यूट्रिसंस इनबैलेंस भी एक बड़ा कारण हो सकता है। ऐसे में कुछ घरेलू उपायों की मदद से आंखों का फड़कना रोका जा सकता है। साथ ही आंखों के लिए कुछ खास तरह की एक्‍सरसाइज भी इस समस्‍या से आसानी से निजात दिला सकती है, तो आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ कारगर उपायों के बारे में, जिनसे आंखे स्‍वस्‍थ भी बनी रहेगी।केला खाएं:- आंख फड़कने के पीछे एक कारण शरीर में पोटेशियम और मैग्‍नीशियम की कमी होता है। ऐसे में के
घरेलू नुस्‍खे- बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्‍सा!

घरेलू नुस्‍खे- बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्‍सा!

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बथुआ (Bathua / चाकवत) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है। बथुआ की साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से तक समाप्‍त किया जा सकता है। इससे गुर्दे में पथरी होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार बथुए में लौह, सोना, क्षार, पारा, कैरोटिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, प्रोटीन, वसा तथा विटामिन ‘C’ व ‘B – २’ पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। गैस, पेट में दर्द कब्‍ज की समस्‍या भी दूर होता है। यह नेत्र, मूत्र व पेट संबंधी विकारों में विशेष लाभदायी है।विषेष:- • बथुए के बारे में आर्युवेदाचार्यों का मानना है कि कच्‍चे बथुआ के एक एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिला कर रोजाना खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। गुर्दा,
काले तिल का सेवन हर तरह से देता है लाभ!!

काले तिल का सेवन हर तरह से देता है लाभ!!

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तिल 3 प्रकार के होते है। सफेद, काले और लाल। आयुर्वेद के अनुसार सभी तिलों की किस्‍मों में काले तिल सर्वश्रेष्‍ठ हैं। ऐसे में कई औषधियों के निर्माण में काले तिल का सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसमें कैल्शियम काफी होता है और इसके तेल से बने पदार्थ बेहद उपयोगी होते है जो खासकर बच्‍चों के लिए उपयोगी हैं। जनते हैं इसके अन्‍य फायदे :- बाल संबंधी समस्‍या:- समय पूर्व बल सफेद होना, झड़ना, गंजेपन की समस्‍या में काले तिल का प्रयोग फायदा देता है। इससे बाल मुलायम, मजबूत और काले होते हैं।प्रतिरोधक क्षमता बढेगी:- इसके लिए 1-2 माह तक 2 चम्‍मच तिल रोजाना चबाकर खाने या इससे बने पदार्थ खाए जा सकते हैं। इसके तेल की मालिश भी शरीर की प्रतिरोधात्‍मक क्षमता बढ़ाती है।बिवाई फटना:- एक भाग देसी पीला मोम और चार भाग काले तिल का तेल एक साथ गर्म करके मरहम बना लें। ठंडा होने के बाद इसे बिवाई की जगह लगाने से तेजी
अलसी के बीज, पाउडर और तेल तीनों फायदेमंद!

अलसी के बीज, पाउडर और तेल तीनों फायदेमंद!

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अलसी में मौजूद पोषक तत्‍व और खूबियों को देखते हुए डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसे सुपरफूड का दर्जा दिया है। अलसी के बीच में ओमेगा-3, फायबर, प्रोटीन, विटामिन-बी, मैग्‍नीशियम, आयरन, कॉपर, पोटैशियम की अच्‍छी मात्रा पाई जाती है। इसके साबुत बीज, पाउडर और तेल तीनों रूपों में लिया जा सकता है। जानते हैं इसके फायदे और इसे कैसे डाइट में शामिल किया जाए। ऐसे खाएं:- इसे कई तरह से डाइट में शामिल कर सकते हैं। इसे रोस्‍ट करके सीधे खा सकते हैं या फिर अलसी के बीज का पाउडर आटे, दही, परांठे, सैंडविज, सलाद और अंकुरित दालों में डालकर खा सकते हैं। इसके तेल को सूप और सलाद में भी मिलाकर ले सकते हैं।ये हैं फायदे:- डायबिटीज व वजन कंट्रोल - यह एक हाई फायबर फूड है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह का रेशा होता है और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। इस कारण इसे खाने के बाद पेट भरा होने का अहसास होता है और अतिरिक्‍त कैल
गौर कीजिए – बड़े काम की है लाल मिर्च!

गौर कीजिए – बड़े काम की है लाल मिर्च!

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भारतीय भोजन का प्रमुख अंग है लाल मिर्च। कई लोग समझते हैं लाल मिर्च सेहत के लिए हानिकारक है लेकिन ऐसा नहीं है। लाल मिर्च में पाए जाने वाले तत्‍व सेहत के लिए फायदेमंद है।वजन कम करने में लाल मिर्च सहायक है। लाल मिर्च कैलौरी बर्न करने में मददगार होती है। इसमें ऐसे तत्‍व होते हैं जो भूख कम करने में सहायक हैं, इस वजह से मोटापा नियंत्रित होता है।लाल मिर्च फेंफड़े और अम्‍नाशय के कैंसर की कोशिकाओं को नष्‍ट करती है। पेट दर्द होने पर लाल मिर्च पाउडर को गरम पानी और गुड़ में मिलाकर खाने से आराम मिलता है।हैंग ओवर में लाल मिर्च के दो चुटकी पाउडर को गुन-गुने पानी में मिलाकर पीने से आराम मिलता है। दिन में दो तीन बार इसका सेवन लाभकारी है।रक्‍त संचार में सुधार लाती है लाल मिर्च। आहार के साथ ली गई लाल मिर्च रक्‍त के प्रवाह की गति बढ़ाती है।लंबे व घने बाल चाहते हैं तो अपने भोजन में ला
ब्रेन के लिए अच्‍छा है Sunflower!!

ब्रेन के लिए अच्‍छा है Sunflower!!

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सूरजमुखी के बीज स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं। दरअसल सूरजमुखी के बीजों में कोलेस्‍ट्रॉल और सोडियम की मात्रा कम होती है। साथ ही इनमें विटामिन बी6, थाइमिन, मैग्‍नीशियम, काॅपर, फॉस्‍फोरस, मैंगनीज, और सेलेनियम के अलावा विटामिन ई ( अल्‍फा टोकोफेरॉल) भी बहुत उच्‍च मात्रा में पाया जाता है। इसलिए अपनी बॉडी में न्‍यूट्रियंट्स की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में सूरजमुखी के बीजों को जरूर शामिल करें। यह खाने में भी बहुत स्‍वादिष्‍ट लगते हैं, तो आइए इनसे मिलने वाले हेल्‍थ बेनिफिट्स पर एक नजर डालते हैं।1:- सुधरेगा पाचन क्रिया! सूरजमुखी के बीजों में फाइबर की मात्रा बहुत अच्‍छी होती है जो कि कब्‍ज, पाइल्‍स, कोलन कैंसर आदि कई तरह की समस्‍याओं को कम कर देता है। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स के अनुसार रोजाना 30 ग्राम फाइबर की मात्रा लेना सेहतमंद है। इसके लिए सूरजमुखी के बीजों का इस्‍तेमाल करना बे
जानें शरीर में कैसे बढ़ेगा खून का स्‍तर!!

जानें शरीर में कैसे बढ़ेगा खून का स्‍तर!!

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स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति के शरीर में लोहे की मात्रा वजन के अनुसार 3-5 ग्राम होनी चाहिए। लेकिन जब शरीर में यह मात्रा कम हो जाती है तो व्‍यक्ति में हीमोग्‍लोबिन बनना कम हो जाता है जो खून की कमी दर्शाता है। मेडिकली इसे एनीमिया (Anemia) कहते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा की कमी होने के साथ विभिन्‍न अंगो में ऑक्‍सीजन पर्याप्‍त मात्रा में नहीं पहुंचती। चक्‍कर आने के साथ कमजोरी महसूस होती है।जानें एनीमिया के कारण, लक्षण व आयुर्वेदिक नुस्‍खों के बारे में जिनसे इस तत्‍व की कमी को पूरा किया जा सकता है।घरेलू उपाय (Home remedies)चुकन्‍दर (Common beet) में फोलिक एसिड और सेब में लौह तत्‍व भरपूर पाए जाते हैं। यह दोनों ही खून की कमी को दूर करते हैं। इसके लिए एक-एक कप चुकंदर और सेब के रस में दो चम्‍मच शहद का रस मिलाकर दिन में दो बार पीएं। रक्‍त की पूर्ति होगी।एक चम्‍मच तिल (Sesame) को दो घंटे के ल
जानें साइनस Sinusitis में क्‍या घरेलू उपचार करें।

जानें साइनस Sinusitis में क्‍या घरेलू उपचार करें।

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अक्‍सर लोगों को मौसम में थोड़े से परिवर्तन से भी जुकाम जैसी समस्‍या हो जाती है और उनकी नाक बंद हो जाती है, लेकिन ऐसी स्थिति लंबे समय तक रहती है तो इसे हल्‍के में नहीं लेना चाहिए। यह साइनस की समस्‍या भी हो सकती है। साइनस में नाक बहती है, आंखों में दर्द होता है और सिरदर्द भी रहता है। साइनस की समस्‍या को दूर करने के लिए आपको खानपान की आदतों में परिवर्तन लाना भी जरूरी है। यदि समय पर इसका सही इलाज नहीं किया जाए तो ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है। इसके अलावा यह समस्‍या आगे चलकर अस्‍थमा और माइग्रेन में भी तब्‍दील हो सकती है।तो आइए जानते है कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक अपचार के बारे में:-नारियल पानी में मौजूद पोटेशियम बॉडी को पूरी तरह से साफ कर देता है जिससे साइनस ठीक हो जाता है।दानामेथी का पानी पीएं! साइनस की समस्‍या को दूर करने के लिए दानामेथी बहुत फायदेमंद होती है। इसके लिए आप एक कप पानी
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