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गर्दन के दर्द को न लें हल्‍के में!!

गर्दन के दर्द को न लें हल्‍के में!!

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गर्दन का दर्द दूर करने के लिए विटामिन बी कॉम्‍प्‍लैक्‍स लें, यह इंफ्लेमेशन को दूर करता है। गर्दन का दर्द कई कारणों से हो सकता है जैसे विकृत होते है डिस्‍क संबंधी रोग, गले में अकड़न, झुनझुनी, विप्‍लेश, हरनिएटेड डिस्‍क के कारण गर्दन का चोटिल होना या स्‍नायु में ऐंठन। गले के वायरस संक्रमण जैसे सामान्‍य संक्रमण के परिणामस्‍वरूप भी ग्रंथियों में सूजन और गले में दर्द की शिकायत हो सकती है। गले का दर्द टीबी एवं रीढ़ की हड्डी में संक्रमण तथा मेनिनजाइटिस की वजह से भी सकता है। इसके अलावा खेल, वाहन चालना या घुड़सवारी के दौरान हो जाने वाली दुर्घटनाओं के बाद भी गले में दर्द होता है। गले में दर्द की वजह से कई बार कुछ भी खाना-पीना मुश्किल हो जाता है। सिरदर्द, चेहरे, कंधे में होने वाले दर्द भी गले को प्रभावित करते है। ऐसे में कुछ घरेलू उपाय आजमाएं... खिंचाव से हो सकता है दर्द गले और पीठ के ऊपरी हिस्‍से
आंख फड़कने में घरेलू उपचार!!

आंख फड़कने में घरेलू उपचार!!

Health Care
आंख फड़कने के कारण कैफीन, स्‍ट्रेस, एलर्जी और ड्राई आई भी हो सकते हैं। आंख फड़कना सामान्‍य समस्‍या है, जो स्‍वत: ही कुछ समय बाद ठीक हो जाती है, लेकिन यह समस्‍या कई दिनों तक लगातार बनी रहे तो, तो चिकित्‍सक से उचित सलाह अवश्‍य लेनी चाहिए। यह क्रोनिक मूवमेंट डिस्‍ऑर्डर भी हो सकता है। आंख फड़कने के पीछे बहुत ज्‍यादा कैफीन लेना भी हो सकता है। इसके अलावा तनाव की वजह से भी इस तरह की समस्‍या हो सकती है। न्‍यूट्रिसंस इनबैलेंस भी एक बड़ा कारण हो सकता है। ऐसे में कुछ घरेलू उपायों की मदद से आंखों का फड़कना रोका जा सकता है। साथ ही आंखों के लिए कुछ खास तरह की एक्‍सरसाइज भी इस समस्‍या से आसानी से निजात दिला सकती है, तो आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ कारगर उपायों के बारे में, जिनसे आंखे स्‍वस्‍थ भी बनी रहेगी।केला खाएं:- आंख फड़कने के पीछे एक कारण शरीर में पोटेशियम और मैग्‍नीशियम की कमी होता है। ऐसे में के
घरेलू नुस्‍खे- बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्‍सा!

घरेलू नुस्‍खे- बथुए को बनाएं अपने खानपान का हिस्‍सा!

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बथुआ (Bathua / चाकवत) कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह रुचिकर, पाचक, रक्तशोधक, दर्दनाशक, त्रिदोषशामक, शीतवीर्य तथा बल एवं शुक्राणु वर्धक है। बथुआ की साग को नियमित रूप से खाने से कई रोगों को जड़ से तक समाप्‍त किया जा सकता है। इससे गुर्दे में पथरी होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार बथुए में लौह, सोना, क्षार, पारा, कैरोटिन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, प्रोटीन, वसा तथा विटामिन ‘C’ व ‘B – २’ पर्याप्त मात्रा में पाये जाते हैं। गैस, पेट में दर्द कब्‍ज की समस्‍या भी दूर होता है। यह नेत्र, मूत्र व पेट संबंधी विकारों में विशेष लाभदायी है।विषेष:- • बथुए के बारे में आर्युवेदाचार्यों का मानना है कि कच्‍चे बथुआ के एक एक कप रस में थोड़ा सा नमक मिला कर रोजाना खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। गुर्दा,
काले तिल का सेवन हर तरह से देता है लाभ!!

काले तिल का सेवन हर तरह से देता है लाभ!!

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तिल 3 प्रकार के होते है। सफेद, काले और लाल। आयुर्वेद के अनुसार सभी तिलों की किस्‍मों में काले तिल सर्वश्रेष्‍ठ हैं। ऐसे में कई औषधियों के निर्माण में काले तिल का सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसमें कैल्शियम काफी होता है और इसके तेल से बने पदार्थ बेहद उपयोगी होते है जो खासकर बच्‍चों के लिए उपयोगी हैं। जनते हैं इसके अन्‍य फायदे :- बाल संबंधी समस्‍या:- समय पूर्व बल सफेद होना, झड़ना, गंजेपन की समस्‍या में काले तिल का प्रयोग फायदा देता है। इससे बाल मुलायम, मजबूत और काले होते हैं।प्रतिरोधक क्षमता बढेगी:- इसके लिए 1-2 माह तक 2 चम्‍मच तिल रोजाना चबाकर खाने या इससे बने पदार्थ खाए जा सकते हैं। इसके तेल की मालिश भी शरीर की प्रतिरोधात्‍मक क्षमता बढ़ाती है।बिवाई फटना:- एक भाग देसी पीला मोम और चार भाग काले तिल का तेल एक साथ गर्म करके मरहम बना लें। ठंडा होने के बाद इसे बिवाई की जगह लगाने से तेजी
रोगों से लड़ने की ताकत देता है नीम!

रोगों से लड़ने की ताकत देता है नीम!

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नीम का पेड़ न केवल छाया देने के काम आता है बल्कि इसकी पत्तियां व टहनियां आपको रोगों से बचाने में उपयोगी हो सकती हैा • नीम एक प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में काम करता है। इसके कोई द़ष्‍प्रभाव नहीं होते हैं। यह शरीर के रक्‍त को शुद्ध करने का काम करता है।• नीम एंटी बैक्‍टीरियल, एंटी वायरल, एंटी फंगल, एंटी डायबिटिक, एंटी सेप्टिक और फाइबर जैसे गुणों से भरपूर होता है। नीम के पेड़ का पूरी तरह से इस्‍तेमाल होता है। चाहे नीम की पत्तियां हों, फल, टहनियां या फिर छाल। सभी में औषधीय गुण पाए जाते हैं।• इसकी टहनियों का प्रयोग भारत में लंबे समय से दातुन के रूप में किया जाता रहा है, जिससे कि आपको सांसों की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।• नीम के पानी से सिर धोने पर डेंट्रफ से मुक्ति मिलती है और खुजली से जुड़ी समस्‍या में भी आराम मिलता है।• अगर आपको मुंहासों की समस्‍या हो तो नीम की पत्तियों का पे
जब हिचकी करे परेशान तो करें ये आसान उपचार!!

जब हिचकी करे परेशान तो करें ये आसान उपचार!!

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यूं तो हिचकी आना सामान्‍य बात होती है, लेकिन लगातार हिचकी आना एक तरह की बीमारी होती है। ऐसी हिचकी को रोकना मुश्‍किल होता है। कई बार गले में कुछ फंसने, मौसम में बदलाव या तेज मिर्च मसाला खाने से हिचकियां शुरू हो जाती हैं। इससे बचने के लिए कुछ घरेलु नुस्‍खे अपनाए जा सकते है। इसके बाद भी हिचकी नहीं रुकने पर डॉक्‍टर से राय लेनी चाहिए। इसलिए आती है हिचकी:- डायफ्रॉम की मसल्‍स के अचानक सिकुड़ने की वजह से हिचकी की स्‍थिति बन जाती है। मुंह में जब वायु ऊपर की ओर बढ़ती है तो हिक-हिक की आवाज आती है। इस तरह वायु रुक-रुक कर बाहर निकलती है। ऐसी स्थिति वायु बढ़ाने वाले पदार्थो को खाने से उत्‍पन्‍न होती है। कई बार मिर्च मसाले खाने या गले में कोई चीज अटक जाने से आमाशय से ऊपर की ओर वायु उठती है जिससे हिचकी शुरू हो जाती है। गर्म के बाद कुछ ठंडा खाने, धूम्रपान करने या ज्‍यादा टेंशन लेने से भी हिचकी होती है।
किसी अमृत से कम नहीं है ताजा गिलोय!!

किसी अमृत से कम नहीं है ताजा गिलोय!!

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गिलोय उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने के लिए शर्करा का स्‍तर बनाए रखने में मदद करती है। यह दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है। आयुर्वेद हो या एलोपैथी गिलोय के फायदों पर सभी एकमत हैं। दुनिया भर में हुए शोधों में साबित हो चुका है कि गिलोय किसी अमृत से कम नहीं है। बुखार को ठीक करने का इसमें अद्धुत गुण है। यह मलेरिया पर अधिक प्रभावी नहीं है लेकिन शरीर की समस्‍त मेटाबोलिक क्रियाओं को व्‍यवस्थित करने के साथ औषधि के साथ देने पर उसके घातक प्रभावों को रोककर शीध्र लाभ देती है।गिलोय की जड़ें शक्तिशाली एंटी ऑक्सिडेंट हैं। यह कैंसर की रोकथाम और उपचार में प्रयोग की जाती है।गिलोय का नियमित प्रयोग सभी प्रकार के बुखार, फ्लू, पेट कृमि, खून की कमी, निम्‍न रक्‍तचाप, दिल की कमजोरी, टीबी, मूत्र रोग, एलर्जी, पेट के रोग, मधुमेह, चर्म रोग आदि अनेक बीमारियों से बचाता है। गिलोय भूख भी बढ़ाती है
जानें काले चने के फायदे!!

जानें काले चने के फायदे!!

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काले चने साबुत या अंकुरित दोनों ही फायदेमंद है। कब्‍ज, डायबिटीज, एनिमिया, हृदय रोगियों के लिए काला चना लाभदायक है तो त्‍वचा निखारता है और कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर घटाता है। कई शोधों में यह साबित हो गया है कि काले चने का अगर नियमित सेवन किया जाए तो कई बीमारियों से मुक्ति मिल सकती है। पंपिंग क्षमता पर असर • काले चने में जरूरी विटामिन और मिनरल्‍स है। इसमें लगभग 12 से 15 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर है जो हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है।• काले चने के सेवन से शरीर में खून की कमी नहीं होती इसलिए एनिमिया के मरीजों को इसका नियमित सेवन करना चाहिए।• काले चने का सत्‍तू गर्मियों में सेवन करने से लू नहीं लगती।• जिस पानी में चने को भिगोया गया हो उसे पीने से भी फायदा होता है।• डायबिटीज के मरीजों के लिए भी चने का सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है।• काले चने शरीर की प
गुणों की खान कहते हैं, छोटी सी हरड़ को!!

गुणों की खान कहते हैं, छोटी सी हरड़ को!!

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आयुर्वेद के खजाने में एक दवा यानी की हरड़ में कई बीमारियों को मात देने की क्षमता है।इन रोगों में लाभदायक:- त्‍वचा के रोग, गला बैइ जाना, पुराना बुखार, सिर के रोग, आंखों के रोग, खून की कमी, हृदय रोग, पीलिया, शरीर में सोज पड़ना, प्रमेह रोग, उल्‍टी आना, पेट में कीड़े होना, दमा, खांसी, मुह में लार टपकना, बवासीर, प्‍लीहा वृद्धि, पेट में अफरा पड़ना, विष का सेवन, वायु गोला, उदर रोग, भोजन में अरुचि, के साथ-साथ हरड़ का प्रयोग वातज व कफ रोगों में हितकर है। हरड़ चूर्ण को गौमूत्र के साथ प्रतिदिन पी कर व उसके पचने के बाद दूध का सेवन करने से खून की कमी दूर होती है। सौंठ, काली मिरच व पिप्‍पली, गुड़ व तिल तेल के साथ एक मास तक हरड़ का प्रयोग करने से कुष्‍ठ रोग का नाश होता है। ऐसे करें हरड़ का सेवन:- भोजन करने से पहले दो बहड़े, भोजन के बाद चार आमले व भोजन पचने के बाद एक हरड़ के फल का चूर्ण नियमित रूप
कब्‍ज से परेशान हैं तो ये कीजिए…

कब्‍ज से परेशान हैं तो ये कीजिए…

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कब्‍ज एक आम समस्‍या बनती जा रही है। लगातार कब्‍ज रहने से आगे जाकर यह गंभीर रूप ले लेती है। सिर भारी होना, जी मचलाना, बुखार सा रहना, मुंह में पानी आने की शिकायत रहने लगती है। कुछ बातों का ख्‍याल रख के कब्‍ज से बचाव किया जा सकता है।न हो पानी की कमी:- कम पानी पीने से भी कब्‍ज की शिकायत हो सकती है। दिन में कम से कम 10 से 20 गिलास पानी पीना चाहिए। रात को सोते समय भी पानी पीना चाहिए। मल मूत्र त्‍यागने से पहले भी पानी पीना चाहिए।मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ:- हर समय चिंता में डूबे रहने से भी कब्‍ज की शिकायत रहती है। लगातार सोचते रहने से तनाव रहने लगता है और कब्‍ज होता है।नशे से दूरी:- सिगरेट, तंबाकू, गांजा, अफीम जैसी नशे वाली चीजों से बचना चाहिए।खाने का रखें ध्‍यान:- खाने के बाद ठंडे पेय पीना, जल्‍दी-जल्‍दी बिना चबाए खाने व समय पर नहीं खाने से भी कब्‍ज की शिकायत होती है। भूख स
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