Tag: Inspirational Stories in Hindi

अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)

अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)

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उभरती बुराई ने दबती सी अच्छाई से कहा, कुछ भी हो, लाख मतभेद हो पर है तू मेरी सहेली। मुझे अपने सामने तेरा दबना अच्छा नही लगता। अलग खड़ी न हो मुझमें मिल जा। मै तुझे भी अपने साथ बढ़ा लूंगी, समाज में फैला लूंगी। भलाई ने शांति से उत्तर दिया, तुम्हारी हमदर्दी के लिए धन्यवाद, पर रहना मुझे तुमसे अलग ही है। क्यो? आश्चर्य भरी अप्रसन्नता से बुराई ने पूछा।अच्छाई ने और भी शांत होकर जवाब दिया। बात यह है कि मैं तुमसे मिल जांऊ तो फिर मैं कहां रहूंगी? तब तो तुम ही तुम होगी सब जगह। गुस्से से उफनकर बुराई ने अपनी झाड़ी अच्छाई के चारों ओर फैलाकर जकड़ लिया और फुंफकारकर कहा ले भोग मेरे निमंत्रण को ठुकराने का नतीजा! अब पड़ी रह मिट्टी में मुंह दुबकाए, दुनिया में तेरे फैलने का अब कोई मार्ग नही।अच्छाई ने अपने नन्हे अंकुर की आंख से जहां भी झांका उसे बुराई की जकड़ बंध, झाड़ी के तेज कांटे, भाले के समान तने हुए दिखाई दि
मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा! – प्रेरणादायक कहानी

मैंने भगवान को मुस्कराते हुए देखा! – प्रेरणादायक कहानी

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गरमी का मौसम था, मैने सोचा काम पे जाने से पहले गन्ने का रस पीकर काम पर जाता हूँ। एक छोटे से गन्ने की रस की दुकान पर गया !! वह काफी भीड-भाड का इलाका था, वहीं पर काफी छोटी-छोटी फूलो की, पूजा की सामग्री ऐसी और कुछ दुकानें थीं। और सामने ही एक बडा मंदिर भी था, इसलिए उस इलाके में हमेशा भीड रहती है!मैंने रस वाले को रस का आर्डर दिया, मेरी नज़र पास में ही फूलों की दुकान पे गयी, वहीं पर एक तकरीबन 37 वर्षीय सज्जन व्यक्ति ने 500 रूपयों वाले एक फूलों का हार बनाने का आर्डर दिया, तभी उस व्यक्ति के पिछे से, एक 10 वर्षीय गरीब बालक ने आकर हाथ लगाकर उसे रस पिलाने की गुजारिश की !!पहले तो उस व्यक्ति का बच्चे की तरफ ध्यान नहीं था, जब देखा... तब उस व्यक्ति ने उसे अपने से दूर किया और अपना हाथ रूमाल से साफ करते हुए बोला" चल हट ...."कहते हुए भगाने की कोशिश की!!उस बच्चे ने भूख और प्यास का वास्ता दिया
लकड़ी का कटोरा ~ प्रेरणादायक कहानी

लकड़ी का कटोरा ~ प्रेरणादायक कहानी

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एक वृध्‍द व्‍यक्ति अपने बहु-बेटे के यहाँ शहर रहने गया। उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्‍यंत पड चुका था, उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था। वो एक छोटे से घर में रहते थे, पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ ही खाना खाते थे। लेकिन वृध्‍द होने के कारण उस व्‍यक्ति को खाने में बड़ी दिक्‍कत होती थी। कभी मटर के दाने उसकी चम्‍मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से दूध छलक कर मेज पर गिर जाता।   बहु-बेटे कुछ दिनों तक तो ये सब सहन करते रहे पर अब उन्‍हें अपने पिता के इस काम से चिढ़ होने लगी। लड़के ने कहा:- "हमें इनका कुछ करना पड़ेगा"। बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली:- "आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा करेंगे", और हम इस तरह हमारी चीजों का नुकसान होते हुए भी नहीं देख सकते।अगले दिन जब खाने का वक्‍़त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के एक कोने में लगा
कर्म की ताकत (Motivational Story)

कर्म की ताकत (Motivational Story)

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उस समय फ्रांस के महान विजेता नेपोलियन एक साधारण सैनिक थे। वह बेहद मेहनती और अपने काम के प्रति समर्पित थे। एक दिन राह में एक ज्‍योतिषी कुछ लोगों का हाथ देख रहे थे। नेपोलियन भी वहां रूक गए और अपना हाथ ज्‍योतिषी के आगे कर दिया। ज्‍योतिषी काफी देर तक हाथ पढ़ता रहा और अचानक उनका चेहरा उदास हो गया। उसके मनोभावों को नेपोलियन समझ गए और बोले 'क्‍या हुआ महाराज? क्‍या मेरे हाथ में कोई अनहोनी बात लिखी है! जिससे आप चिन्तित हो गऐ है।' ज्‍योतिषी ने अपनी गर्दन मोड़ी और बोला 'तुम्‍हारे हाथ में आयु रेखा ही नहीं है 'में यही देखकर चिन्तित था। जिसके हाथ में भाग्‍य रेखा ही न हो उसका भाग्‍य प्रबल कैसे हो सकता है? ज्‍योतिषी की बात सुनकर नेपोलियन दंग रह गए। वह बहुत ही महत्‍वाकांक्षी थे उन्‍होंने ज्‍योतिषी की बात से बहुत आघात पहुंचा। वह ज्‍योतिषी से बोले 'महाराज, मैं अपने कर्म से अपना भाग्‍य ही बदल दूंगा। जीवन हाथ
अमरूद वाली बुढि़या और शर्मा जी ~ Inspirational Story!

अमरूद वाली बुढि़या और शर्मा जी ~ Inspirational Story!

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ऑफिस से निकल कर शर्माजी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया, पत्नी ने कहा था, 1 Kg अमरूद लेते आना। तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा अमरूद बेचते हुए एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी।वैसे तो वह फल हमेशा "राम आसरे फ्रूट भण्डार" से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ?उन्होंने बुढ़िया से पूछा, "माई, अमरूद कैसे दिए" बुढ़िया बोली, बाबूजी बीस रूपये किलो, शर्माजी बोले, माई 15 रूपये दूंगा। बुढ़िया ने कहा, अट्ठारह रूपये दे देना, दो पैसे मै भी कमा लूंगी। शर्मा जी बोले, 15 रूपये लेने हैं तो बोल, बुझे चेहरे से बुढ़िया ने, "न" मे गर्दन हिला दी।शर्माजी बिना कुछ कहे चल पड़े और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर अमरूद का भाव पूछा तो वह बोला 24 रूपये किलो हैं बाबूजी, कितने किलो दे दूँ? शर्माजी बोले, 5 साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ, ठीक भाव लगाओ। तो उसने
अच्छाई और बुराई…

अच्छाई और बुराई…

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उभरती बुराई ने दबती सी अच्छाई से कहा, कुछ भी हो, लाख मतभेद हो पर है तू मेरी सहेली। मुझे अपने सामने तेरा दबना अच्छा नही लगता। अलग खड़ी न हो मुझमें मिल जा। मै तुझे भी अपने साथ बढ़ा लूंगी, समाज में फैला लूंगी। भलाई ने शांति से उत्तर दिया, तुम्हारी हमदर्दी के लिए धन्यवाद, पर रहना मुझे तुमसे अलग ही है। क्यो? आश्चर्य भरी अप्रसन्नता से बुराई ने पूछा।अच्छाई ने और भी शांत होकर जवाब दिया। बात यह है कि मैं तुमसे मिल जांऊ तो फिर मैं कहां रहूंगी? तब तो तुम ही तुम होगी सब जगह।गुस्से से उफनकर बुराई ने अपनी झाड़ी अच्छाई के चारों ओर फैलाकर जकड़ लिया और फुंफकारकर कहा ले भोग मेरे निमंत्रण को ठुकराने का नतीजा! अब पड़ी रह मिट्टी में मुंह दुबकाए, दुनिया में तेरे फैलने का अब कोई मार्ग नही।अच्छाई ने अपने नन्हे अंकुर की आंख से जहां भी झांका उसे बुराई की जकड़ बंध, झाड़ी के तेज कांटे, भाले के समान तने हुए दिखाई
सुखी जीवन का रहस्य!!

सुखी जीवन का रहस्य!!

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एक बार यूनान के मशहूर दार्शनिक सुकरात भ्रमण करते हुए एक नगर में गए। वहां उनकी मुलाकात एक वृद्ध सज्जन से हुई, दोनों आपस में काफी घुलमिल गए। वृद्ध सज्जन आग्रहपूर्वक सुकरात को अपने निवास पर ले गए। भरा-पूरा परिवार था उनका, घर में बहु-बेटे, पौत्र-पौत्रियां सभी थे।सुकरात ने बुजुर्ग से पूछा:- 'आपके घर में तो सुख-समृद्धि का वास है। वैसे अब आप करते क्या हैं?"इस पर वृद्ध ने कहा:- 'अब मुझे कुछ नहीं करना पड़ता। ईश्वर की दया से हमारा अच्छा कारोबार है, जिसकी सारी जिम्मेदारियां अब बेटों को सौंप दी हैं। घर की व्यवस्था हमारी बहुएं संभालती हैं। इसी तरह जीवन चल रहा है।"यह सुनकर सुकरात बोले:- "किन्तु इस वृद्धावस्था में भी आपको कुछ तो करना ही पड़ता होगा। आप बताइए कि बुढ़ापे में आपके इस सुखी जीवन का रहस्य क्या है?"वह वृद्ध सज्जन मुस्कराए और बोले:- 'मैंने अपने जीवन के इस मोड़ पर एक ही नीति को अपनाया
बेटी का भाग्य..!! Must Read Very Heart Touching!

बेटी का भाग्य..!! Must Read Very Heart Touching!

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देवदूत ने सृष्टि के निर्माता के कक्ष में आते हुए कहा:- "भगवान क्या लिख रहे हो, इतनी देर से?"भगवान् ने उसकी तरफ ध्यान दिए बगैर लिखना चालू रखा।देवदूत ने कहा:- "सो जाइये भगवान् कई दिनों से आपने तनिक भी विश्राम नहीं किया, क्या लिख रहे है आप?"भगवान् :- "भाग्य"देवदूत :- "किसका?"भगवान :- "है एक गाव की लड़की, अभी कुछ ही महीनो में उसका जन्म होगा, उसी का भाग्य लिख रहा हुँ।"देवदूत ने हंस कर कहा :- "गाव की लड़की उसका क्या भाग्य?"भगवान् ने क्रोधित होते हुए कहा:- "ये आम बेटी नहीं है, इसका भाग्य मेने खुद लिखा है।"देवदूत ने कहा :- "ऐसा क्या भाग्य है इसका?"भगवान् :- "ये लड़की बहुत पढेगी।"देवदूत ने कटाक्ष में कहा :- "गांव में इसे कौन पढने देगा?"भगवान् :- "ये खुद अपनी महेनत से पढेगी और अपने गाव का नाम रोशन करेगी। अपने गांव की ये एकलौती पढ़ी-लिखी लड़की पुरे गाव में क्रां
माता-पिता को जीते-जी सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है!

माता-पिता को जीते-जी सारे सुख देना वास्तविक श्राद्ध है!

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एक दोस्त हलवाई की दुकान पर मिल गया।मुझसे कहा- आज माँ का श्राद्ध है, माँ को लड्डू बहुत पसन्द है, इसलिए लड्डू लेने आया हूँ!मैं आश्चर्य में पड़ गया, अभी पाँच मिनिट पहले तो मैं उसकी माँ से सब्जी मंडी में मिला था (मैं कुछ और कहता उससे पहले ही खुद उसकी माँ हाथ में झोला लिए वहाँ आ पहुँची।)मैंने दोस्त की पीठ पर मारते हुए कहा- 'भले आदमी ये क्या मजाक है? माँजी तो यह रही तेरे पास!दोस्त अपनी माँ के दोनों कंधों पर हाथ रखकर हँसकर बोला, ‍ भई, बात यूँ है कि मृत्यु के बाद गाय-कौवे की थाली में लड्डू रखने से अच्छा है कि माँ की थाली में लड्डू परोसकर उसे जीते-जी तृप्त करूँ। मैं मानता हूँ कि जीते जी माता-पिता को हर हाल में खुश रखना ही सच्चा श्राद्ध है।आगे उसने कहा, 'माँ को मिठाई, सफेद जामुन, आम आदि पसंद है। मैं वह सब उन्हें खिलाता हूँ। श्रद्धालु मंदिर में जाकर अगरबत्ती जलाते हैं। मैं मंदिर
एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया!!

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया!!

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एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। वह बैल घंटों ज़ोर-ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था; और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर
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