Tag: Inspirational Stories in Hindi

दो प्रेरणादायक कहानियां “याद्दाश्‍त” और “तीसरा मित्र”

दो प्रेरणादायक कहानियां “याद्दाश्‍त” और “तीसरा मित्र”

Stories
याद्दाश्‍त - कमलेश कुमार (Mother Love Short Story in Hindi) बढ़ती उम्र के साथ शांतादेवी की याद्दाशत साथ छोड़ रही थी। चीजें कहीं भी रखकर भूल जातीं, दोबारा दवा खा लेतीं। शाम को पार्क में टहलने जातीं तो वापसी का रास्‍ता भूल जाती और कोई पड़ोसी घर तक छोड़ने आता।कई बार इस वजह से बहू-बेटे को बहुत परेशानी होती थी। शांतादेवी को अहसास था कि उनकी वजह से सब बहुत परेशान हो रहे हैं। एक दिन बेटे के ऑफिस से लौटने के बाद वे उसके पास पहुंची और बोली, 'बेटा, मुझे वृद्धाश्रम छोड़ आ। मेरी भूलने की यह आदत सबे जी का जंजाल बन रही है'।मां की बात पर दुखी बेटा कुह कहता, इससे पहले ही बहू बोल पड़ी, 'मां जी, आपकी याद्दाश्‍त उम्र की वजह से थोड़ी कमजोर हो गई है। हमारी नहीं। परिवार के लिए आपका प्रेम, त्‍याग, समर्पण हम नहीं भूले हैं।आपके बेटे को उनके लिए उठाए गए आपके सारे कष्‍ट याद हैं। मुझ नई-नवेली सहमी बहू को
दो लघु कथाएँ – अन्‍नदाता का अधिकार & वे चार।

दो लघु कथाएँ – अन्‍नदाता का अधिकार & वे चार।

Stories
कथा 1 - अन्‍नदाता का अधिकार मिश्राजी अपने दोस्‍त के यहां आए थे। उनकी बेटी से बोले- 'बेटा अब एमबीबीएस कंप्‍लीट होने के बाद आपको सरकारी अस्‍पताल में जॉइनिंग मिल गई है। पोस्टिंग कहां हुई है?'" ग्राम सुनारी में अंकल।"मेरी बात मानो तो शहर में ही पोस्टिंग करवा लो। पिछले साल मेरे बेटे को अध्‍यापक की पोस्‍टिंग ग्राम जटवाड़ा कला में दे दी गई थी, थोड़ा ले-देकर और राजनितिक पहुंच से हमने उसकी पोस्टिंग शहर में ही करवा दी। वैसे भी आजकल गांवों का तो कोई स्‍टेटस ही नहीं है।'अंकल, गांवों में हमारे देश का अन्‍नदाता रहता है। विपरीत परिस्थितियों से लड़कर हमारेहमारे लिए खाद्यान्‍न उगाता है। हम तक अनाज पहुंचाता है। क्‍या उस किसान और उसके परिवार को शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य जैसी मूलभूत सुविधाएं पाने का अधिकार नहीं है? सिर्फ इसलिए कि वो पिछड़ा हुआ है और हमारे जैसी हाई सोसायटी में नहीं रहता?' वह आगे बोली-
दो कहानी – 1. पालनहार की जीत, 2 कोई अंतर नहीं

दो कहानी – 1. पालनहार की जीत, 2 कोई अंतर नहीं

Stories
कहानी 1. - पालनहार की जीत मां और उसकी दो लड़कियां। दोनों बहनें वयस्‍क। बड़ी बहन ने जब अपने मनपसंद लड़के से शादी की ली तो मां को नागवार लगा। वह लड़का उन्‍हें ठीक नहीं लगा था। तभी से वे बड़ी बेटी से दुखी थीं।छोटी जब समझने लगी तो सोचती 'मैं अतीत की ओर देखती हूं तो हार जाती हूं, क्‍योंकि मां अपनी मंशा से कुछ करने न देंगे।' इतना ही नहीं घर में जब भी छोटी अपनी दीदी का नाम लेती जो मां डांटती हुई कहती, 'खबरदार जो उसका नाम इस घर में लिया तो। यों समझो कि उसके लिए मायके के दरवाजे अब हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं।'बाद में समझ आया कि मां गलत नहीं थी। दीदी ने एक बच्‍ची को जन्‍म दिया था। ससुरालवालों के दबाव के चलते दीदी ने उस दुधमुंही को न अपनाने और त्‍यागने का मन बना लिया था। छोटी को जैसे ही दीदी की मंशा का पता लगा, उसने कहा, 'दीदी अब मैं शादी नहीं करूंगी और उस दुधमुंही को पाल-पोस कर बड़ा करूंगी
एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

एक छोटा बच्चा लोगों से भीख मांग रहा था!!

Stories
सड़क किनारे एक छोटा बच्चा बहुत गंदे और फटे हुए कपड़े पहने आते जाते लोगों से भीख मांग रहा था। ठंड से बचने के लिए उसके पास एक पुराना फटा हुआ जूट का वोरा था, जो लोगों को पास आता देख वह अपने ऊपर से हटा देता था, शायद इसीलिए कि उसका सूजा हुआ अजीब सा दयनीय चेहरा लोग देखकर उसे भीख दें।मैं भी उससे कुछ दूर खड़ा धूप सेक रहा था। और मन में एक ही ख्याल चल रहा था कि भिखारी स्वयं भीख मांगते हैं, यहां तक ठीक है परन्तु अपने बच्चों से भीख मंगवाना अपराध है और मैं इससे नफरत करता हूं ।बहुत देर से मैं उस बच्चे की हरकत देख रहा था । और उसके माता पिता को भरपूर कोस रहा था। करीब बीस मिनट हो गये थे, अभी तक किसी ने भी उसको भीख नहीं दी थी और यह देख कर मैं बहुत प्रसन्न था, शायद उस बच्चे को समझ आये कि भीख मांगने से नहीं मिलता, मेहनत कर कमाना पड़ता है ।मैं भी वहां से अब निकलने की तैयारी में था, और उस भिखारी बच्चे न
घर मे कोई नही है! प्रेरणादायक कहानी

घर मे कोई नही है! प्रेरणादायक कहानी

Stories
शाम को दफ़्तर से घर आते समय देखा कि एक छोटा-सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था जिस पर मार्कर से लिखा हुआ था:घर मे कोई नही है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और हाजत कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी इच्छा से फल तौल लें और पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें।साथ ही मूल्य भी लिखे हुये हैं...और यदि आपके पास पैसे न हों तो मेरी ओर से ले लेना...अनुमति है।मैंने इधर-उधर देखा। पास पड़े तराज़ू में दो किलो सेब तौले, एक दर्जन केले लिए...बैग में डाले...प्राइस लिस्ट से कीमत देखी...पैसे निकालकर गत्ते को उठाया... वहाँ सौ, पचास और दस-दस के नोट पड़े थे। मैंने भी पैसे उसमें रख कर उसे ढक दिया। बैग उठाया और घर आ गया। खाना खाकर श्रीमती और मैं घूमते-घूमते उधर से निकले तो देखा एक कृशकाय अधेड़ आयु का व्यक्ति मैले से कुर्ते-पाज़ामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर
चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

Stories
एक 5 साल का लड़का और 3 साल लड़की जो की भाई-बहन थे दोनों साथ में बाजार से गुजर रहे थे। अचानक लड़के को लगा कि, उसकी छोटी बहन पीछे रह गई है। उसने रुकाकर, पीछे पलटकर देखा तो उसे दिखा कि उसकी उसकी बहन एक खिलौने की दुकान के सामने खड़ी होकर किसी चीज को एकटक देख रही है।लडका पीछे आकर अपनी छोटी बहन से पूछता है, "कुछ चाहिये तुम्हें?"लड़की एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर इशारा करके देखती है।5 साल का छोटा बच्चा अपनी छोटी बहन का साथ पकड़ता है, और एक जिम्मेदार बड़े भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। छोटी बहन बहुत खुश हो गई। दुकान का मालिक यह सब देख रहा था, बच्चे का साहसी व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित को गया....अब वह 5 साल का बच्चा अपनी बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, "सर, इस गुड़‍िया की कीमत क्‍या है?"दुकान का मालिक एक शांत और गहरा व्यक्ति था, उसने अपने ज
हंस और हंसिनी की कहानी (जरूर पढ़ें)

हंस और हंसिनी की कहानी (जरूर पढ़ें)

Stories
ये कहानी आपको झकझोर देगी 2 मिनट में एक अच्छी सीख अवश्य पढ़ें...एक बार की बात है 1 हंस और 1 हंसिनी थी वे दोनो हरिद्वार में रहते थे। वे दोनों एक बार भटकते-भटकते एक उजड़े व बहुत ही वीरान से रेगिस्तानी इलाके में आ गये। हंसिनी ने हंस से कहा कि हम ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ?? यहाँ पर न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं, यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा।हंस और हंहिनी को भटकते हुये शाम हो गई तो हंस ने हंसिनी से कहा कि आज की रात हम किसी तरह कट लेते है, सुबह होते ही हरिद्वार वापिस लौट चलेंगें। रात हुई तो देखा कि जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उसी पेड़ पर एक उल्लू बैठा था।और वह जोर से चिल्लाने लगा।हंसिनी ने हंस से कहा- अरे ये उल्‍लू के चिल्‍लाने की वजह से तो यहाँ रात में सो भी नहीं सकते।हंस ने हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया
सूर्य पर ध्‍यान दो! ~ लघुकथा

सूर्य पर ध्‍यान दो! ~ लघुकथा

Stories
यह एक राजा की कहानी है, जिसने अपने ही 3 दरबारियों को एक ही अपराध की तीन अलग-अलग प्रकार की सजा दी। पहले को राजा ने कुछ बर्षो का कारावास दिया, दूसरे को देश निकाला तथा तीसरे से मात्र इतना कहा कि मुझे आश्चर्य है, ऐसे कार्य की तुमसे मैंने कभी आपेक्षा नहीं की थी।और जानते हैं कि इन भिन्‍न सजाओं का परिणाम क्‍या हुआ?पहला व्‍यक्ति दुखी हुआ और दूसरा व्‍यक्ति भी, तीसरा व्‍यक्ति भी लेकिन उनके दुख के कारण भिन्‍न थे। तीनों ही व्‍यक्ति अपमान और असम्‍मान के कारण दुखी थे लेकिन पहले और दूसरे व्‍यक्ति का अपमान दूसरों के समक्ष था। तीसरे का अपमान स्‍वयं के समक्ष।यह भेद बहुत बड़ा है।पहले व्‍यक्ति ने थोड़े ही दिनों में कारागृह के लोगों से मैत्री कर ली और वहीं आनंद से रहने लगा। दूसरे व्‍यक्ति ने भी देश से बाहर जाकर बहुत बड़ा व्‍यापार कर लिया और धन कमाने लगा लेकिन तीसरा व्‍यक्ति क
दही का इंतजाम ~ Hindi Moral Story

दही का इंतजाम ~ Hindi Moral Story

Stories
शर्माजी जब लगभग 45 वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। बहुत से लोगों ने शर्माजी से दूसरी शादी की सलाह दी परंतु शर्माजी ने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी।पुत्र जब वयस्क हुआ तो शर्माजी ने पूरा कारोबार पुत्र के हवाले कर दिया। और स्वयं कभी मंदिर और आॅफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे।पुत्र की शादी के बाद शर्मा जी और अधिक निश्चित हो गये। अपना पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया।पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दोपहरी में शर्माजी खाना खा रहे थे, पुत्र भी ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था।उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है। खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये।पुत्र अपनी पत्नी क
एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए!!

एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए!!

Miscellaneous
घनश्याम दास जी बिड़ला (G.D. Birla) द्वारा अपने पुत्र बसंत कुमार जी बिड़ला (B.K. Birla) के नाम 1934 में लिखा गया एक अत्यंत प्रेरक पत्र जो हर एक को जरूर पढ़ना चाहिए।चि. बसंत... यह जो लिखता हूँ उसे बड़े होकर और बूढ़े होकर भी पढ़ना, अपने अनुभव की बात कहता हूँ। संसार में मनुष्य जन्म दुर्लभ है और मनुष्य जन्म पाकर जिसने शरीर का दुरुपयोग किया, वह पशु है। तुम्हारे पास धन है, तन्दुरुस्ती है, अच्छे साधन हैं, उनको सेवा के लिए उपयोग किया, तब तो साधन सफल है अन्यथा वे शैतान के औजार हैं। तुम इन बातों को ध्यान में रखना।धन का मौज-शौक में कभी उपयोग न करना, ऐसा नहीं की धन सदा रहेगा ही, इसलिए जितने दिन पास में है उसका उपयोग सेवा के लिए करो, अपने ऊपर कम से कम खर्च करो, बाकी जनकल्याण और दुखियों का दुख दूर करने में व्यय करो। धन शक्ति है, इस शक्ति के नशे में किसी के साथ अन्याय हो जाना संभव है, इसका ध्यान रखो क
error: Content is protected !!