Tag: Inspirational Stories in Hindi

कमी में भी गुण देखना ~ प्रेरणादायक कहानी !

कमी में भी गुण देखना ~ प्रेरणादायक कहानी !

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बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था। उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था और दूसरा एक दम सही था। इस वजह से रोज़ घर पहुँचते-पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था। ऐसा दो सालों से चल रहा था।सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है . फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया , उसने किसान से कहा - "मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ" किसान ने पूछा - क्
पेन्सिल की कहानी ~ A Very Moral Story in Hindi

पेन्सिल की कहानी ~ A Very Moral Story in Hindi

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एक बालक अपनी दादी मां को एक पत्र लिखते हुए देख रहा था। अचानक उसने अपनी दादी मां से पूंछा, "दादी मां!, क्या आप मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हैं? आप मेरे बारे में लिख रही हैं, ना"यह सुनकर उसकी दादी माँ रुकीं और बोलीं, बेटा मैं लिख तो तुम्हारे बारे में ही रही हूँ, लेकिन जो शब्द मैं यहाँ लिख रही हूँ उनसे भी अधिक महत्व इस पेन्सिल का है जिसे मैं इस्तेमाल कर रही हूँ। मुझे पूरी आशा है कि जब तुम बड़े हो जाओगे तो ठीक इसी पेन्सिल की तरह होगे।यह सुनकर वह बालक थोड़ा चौंका और पेन्सिल की ओर ध्यान से देखने लगा, किन्तु उसे कोई विशेष बात नज़र नहीं आयी। वह बोला, किन्तु मुझे तो यह पेन्सिल बाकी सभी पेन्सिलों की तरह ही दिखाई दे रही है। इस पर दादी माँ ने उत्तर दिया, बेटा! यह इस पर निर्भर करता है कि तुम चीज़ों को किस नज़र से देखते हो।इसमें पांच ऐसे गुण हैं, जिन्हें यदि तुम अपना लो तो तुम सदा इस सं
मैं शिकार पर जा रहा हूँ!

मैं शिकार पर जा रहा हूँ!

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एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला... अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला "अरे छोटू, कहाँ जा रहे हो तुम?""मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ ", चीता रोमांचित होते हुए बोला!हा-हा-हा लकड़बग्घा हंसा और बोला अभी तो तुम्हारे खेलने-कूदने के दिन हैं, तुम इतने छोटे हो, तुम्हे शिकार करने का कोई अनुभव भी नहीं है, तुम क्या शिकार करोगे!!लकड़बग्घे की बात सुनकर चीता उदास हो गया... दिन भर शिकार के लिए वो बेमन इधर-उधर घूमता रहा कुछ एक प्रयास भी किये पर सफलता नहीं मिली और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा।अगली सुबह वो एक बार फिर शिकार के लिए निकला... कुछ दूर जाने पर उसे एक बूढ़े बन्दर ने देखा और पुछा, "कहाँ जा रहे हो बेटा ?"चीता बोला:- बंदर मामा, मैं शिकार पर जा रहा हूँ।बंदर बोला:- "बहुत अच्छे" तुम्हारी ताकत और गति के कारण तुम एक बेहद कुशल शि
हम क्यों ऐसा नहीं कर सकते?

हम क्यों ऐसा नहीं कर सकते?

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अगर एक छिपकली ऐसा कर सकती है, तो हम क्यों नहीं कर सकते?ये जापान में घटी सच्ची घटना है। जापान में एक व्यक्ति अपने घर को तोड़ कर दोबारा बनवा रहा था। जापान में घरों में लकड़ी की दीवारों में आमतौर पर खाली जगह रहती है। जब उस घर की दीवारों को तोड़ रहे थे तो उस दीवार की खाली जगह में एक छिपकली फंसी हुई मिली। उस छिपकली के पैर में दीवार के बाहर की तरफ से निकल कर एक कील घुसी हुई थी। जब उस छिपकली को देखा तो उस पर तरस तो आया ही साथ ही एक जिज्ञासा भी हुई क्योंकि जब कील को जांचा गया तो पता चला कि ये कील मकान बनाते समय 5 वर्ष पहले ठोकी गई थी।क्या हुआ था?छिपकली 5 वर्षों से एक ही जगह फंसी रहने के बावजूद जिन्दा थी!!दीवार के एक छोटे से अँधेरे हिस्से में बिना हिले-डुले 5 वर्षों तक जिन्दा रहना असम्भव था। ये वाकई हैरानी की बात थी कि छिपकली 5 वर्षों से जिन्दा कैसे थी! वो भी बिना एक कदम हिलाये, क्योंक
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