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Tag: Motivational Stories in Hindi

अमरूद वाली बुढि़या और शर्मा जी ~ Inspirational Story!

अमरूद वाली बुढि़या और शर्मा जी ~ Inspirational Story!

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ऑफिस से निकल कर शर्माजी ने स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया, पत्नी ने कहा था, 1 Kg अमरूद लेते आना। तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा अमरूद बेचते हुए एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी।वैसे तो वह फल हमेशा "राम आसरे फ्रूट भण्डार" से ही लेते थे, पर आज उन्हें लगा कि क्यों न बुढ़िया से ही खरीद लूँ?उन्होंने बुढ़िया से पूछा, "माई, अमरूद कैसे दिए" बुढ़िया बोली, बाबूजी बीस रूपये किलो, शर्माजी बोले, माई 15 रूपये दूंगा। बुढ़िया ने कहा, अट्ठारह रूपये दे देना, दो पैसे मै भी कमा लूंगी। शर्मा जी बोले, 15 रूपये लेने हैं तो बोल, बुझे चेहरे से बुढ़िया ने, "न" मे गर्दन हिला दी।शर्माजी बिना कुछ कहे चल पड़े और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर अमरूद का भाव पूछा तो वह बोला 24 रूपये किलो हैं बाबूजी, कितने किलो दे दूँ? शर्माजी बोले, 5 साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ, ठीक भाव लगाओ। तो उसने
अच्छाई और बुराई…

अच्छाई और बुराई…

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उभरती बुराई ने दबती सी अच्छाई से कहा, कुछ भी हो, लाख मतभेद हो पर है तू मेरी सहेली। मुझे अपने सामने तेरा दबना अच्छा नही लगता। अलग खड़ी न हो मुझमें मिल जा। मै तुझे भी अपने साथ बढ़ा लूंगी, समाज में फैला लूंगी। भलाई ने शांति से उत्तर दिया, तुम्हारी हमदर्दी के लिए धन्यवाद, पर रहना मुझे तुमसे अलग ही है। क्यो? आश्चर्य भरी अप्रसन्नता से बुराई ने पूछा।अच्छाई ने और भी शांत होकर जवाब दिया। बात यह है कि मैं तुमसे मिल जांऊ तो फिर मैं कहां रहूंगी? तब तो तुम ही तुम होगी सब जगह।गुस्से से उफनकर बुराई ने अपनी झाड़ी अच्छाई के चारों ओर फैलाकर जकड़ लिया और फुंफकारकर कहा ले भोग मेरे निमंत्रण को ठुकराने का नतीजा! अब पड़ी रह मिट्टी में मुंह दुबकाए, दुनिया में तेरे फैलने का अब कोई मार्ग नही।अच्छाई ने अपने नन्हे अंकुर की आंख से जहां भी झांका उसे बुराई की जकड़ बंध, झाड़ी के तेज कांटे, भाले के समान तने हुए दिखाई
एक आदमी एक सेठ की दुकान पर नौकरी करता था!!

एक आदमी एक सेठ की दुकान पर नौकरी करता था!!

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एक आदमी एक सेठ की दुकान पर नौकरी करता था। वह बेहद ईमानदारी और लगन से अपना काम करता था। उसके काम से सेठ बहुत प्रसन्न था और सेठ द्वारा मिलने वाली तनख्वाह से उस आदमी का गुज़ारा आराम से हो जाता था।ऐसे ही दिन गुज़र रहे थे। एक दिन वह आदमी बिना बताए काम पर नहीं गया। उसके न जाने से सेठ का काम रूक गया। तब उसने सोचा कि यह आदमी इतने दिनों से ईमानदारी से काम कर रहा है। मैंने कबसे इसकी तन्ख्वाह नहीं बढ़ाई। इतने पैसों में इसका गुज़ारा कैसे होता होगा? सेठ ने सोचा कि अगर इस आदमी की तन्ख्वाह बढ़ा दी जाए, तो यह और मेहनत और लगन से काम करेगा। उसने अगले दिन से ही उस आदमी की तनख्वाह बढ़ा दी। उस आदमी को जब एक तारीख को बढ़े हुए पैसे मिले, तो वह हैरान रह गया। लेकिन वह बोला कुछ नहीं और चुपचाप पैसे रख लिये...धीरे-धीरे बात आई गई हो गयी। कुछ महीनों बाद वह आदमी फिर फिर एक दिन ग़ैर हाज़िर हो गया। यह देखकर सेठ
सुखी जीवन का रहस्य!!

सुखी जीवन का रहस्य!!

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एक बार यूनान के मशहूर दार्शनिक सुकरात भ्रमण करते हुए एक नगर में गए। वहां उनकी मुलाकात एक वृद्ध सज्जन से हुई, दोनों आपस में काफी घुलमिल गए। वृद्ध सज्जन आग्रहपूर्वक सुकरात को अपने निवास पर ले गए। भरा-पूरा परिवार था उनका, घर में बहु-बेटे, पौत्र-पौत्रियां सभी थे।सुकरात ने बुजुर्ग से पूछा:- 'आपके घर में तो सुख-समृद्धि का वास है। वैसे अब आप करते क्या हैं?"इस पर वृद्ध ने कहा:- 'अब मुझे कुछ नहीं करना पड़ता। ईश्वर की दया से हमारा अच्छा कारोबार है, जिसकी सारी जिम्मेदारियां अब बेटों को सौंप दी हैं। घर की व्यवस्था हमारी बहुएं संभालती हैं। इसी तरह जीवन चल रहा है।"यह सुनकर सुकरात बोले:- "किन्तु इस वृद्धावस्था में भी आपको कुछ तो करना ही पड़ता होगा। आप बताइए कि बुढ़ापे में आपके इस सुखी जीवन का रहस्य क्या है?"वह वृद्ध सज्जन मुस्कराए और बोले:- 'मैंने अपने जीवन के इस मोड़ पर एक ही नीति को अपनाया
बेटी का भाग्य..!! Must Read Very Heart Touching!

बेटी का भाग्य..!! Must Read Very Heart Touching!

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देवदूत ने सृष्टि के निर्माता के कक्ष में आते हुए कहा:- "भगवान क्या लिख रहे हो, इतनी देर से?"भगवान् ने उसकी तरफ ध्यान दिए बगैर लिखना चालू रखा।देवदूत ने कहा:- "सो जाइये भगवान् कई दिनों से आपने तनिक भी विश्राम नहीं किया, क्या लिख रहे है आप?"भगवान् :- "भाग्य"देवदूत :- "किसका?"भगवान :- "है एक गाव की लड़की, अभी कुछ ही महीनो में उसका जन्म होगा, उसी का भाग्य लिख रहा हुँ।"देवदूत ने हंस कर कहा :- "गाव की लड़की उसका क्या भाग्य?"भगवान् ने क्रोधित होते हुए कहा:- "ये आम बेटी नहीं है, इसका भाग्य मेने खुद लिखा है।"देवदूत ने कहा :- "ऐसा क्या भाग्य है इसका?"भगवान् :- "ये लड़की बहुत पढेगी।"देवदूत ने कटाक्ष में कहा :- "गांव में इसे कौन पढने देगा?"भगवान् :- "ये खुद अपनी महेनत से पढेगी और अपने गाव का नाम रोशन करेगी। अपने गांव की ये एकलौती पढ़ी-लिखी लड़की पुरे गाव में क्रां
एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया!!

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया!!

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एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। वह बैल घंटों ज़ोर-ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था; और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर
कमी में भी गुण देखना ~ प्रेरणादायक कहानी !

कमी में भी गुण देखना ~ प्रेरणादायक कहानी !

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बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था। वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था। इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था। उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था और दूसरा एक दम सही था। इस वजह से रोज़ घर पहुँचते-पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था। ऐसा दो सालों से चल रहा था।सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है , वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है . फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया , उसने किसान से कहा - "मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ" किसान ने पूछा - क्
पेन्सिल की कहानी ~ A Very Moral Story in Hindi

पेन्सिल की कहानी ~ A Very Moral Story in Hindi

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एक बालक अपनी दादी मां को एक पत्र लिखते हुए देख रहा था। अचानक उसने अपनी दादी मां से पूंछा, "दादी मां!, क्या आप मेरी शरारतों के बारे में लिख रही हैं? आप मेरे बारे में लिख रही हैं, ना"यह सुनकर उसकी दादी माँ रुकीं और बोलीं, बेटा मैं लिख तो तुम्हारे बारे में ही रही हूँ, लेकिन जो शब्द मैं यहाँ लिख रही हूँ उनसे भी अधिक महत्व इस पेन्सिल का है जिसे मैं इस्तेमाल कर रही हूँ। मुझे पूरी आशा है कि जब तुम बड़े हो जाओगे तो ठीक इसी पेन्सिल की तरह होगे।यह सुनकर वह बालक थोड़ा चौंका और पेन्सिल की ओर ध्यान से देखने लगा, किन्तु उसे कोई विशेष बात नज़र नहीं आयी। वह बोला, किन्तु मुझे तो यह पेन्सिल बाकी सभी पेन्सिलों की तरह ही दिखाई दे रही है। इस पर दादी माँ ने उत्तर दिया, बेटा! यह इस पर निर्भर करता है कि तुम चीज़ों को किस नज़र से देखते हो।इसमें पांच ऐसे गुण हैं, जिन्हें यदि तुम अपना लो तो तुम सदा इस सं
मैं शिकार पर जा रहा हूँ!

मैं शिकार पर जा रहा हूँ!

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एक नौजवान चीता पहली बार शिकार करने निकला... अभी वो कुछ ही आगे बढ़ा था कि एक लकड़बग्घा उसे रोकते हुए बोला "अरे छोटू, कहाँ जा रहे हो तुम?""मैं तो आज पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ ", चीता रोमांचित होते हुए बोला!हा-हा-हा लकड़बग्घा हंसा और बोला अभी तो तुम्हारे खेलने-कूदने के दिन हैं, तुम इतने छोटे हो, तुम्हे शिकार करने का कोई अनुभव भी नहीं है, तुम क्या शिकार करोगे!!लकड़बग्घे की बात सुनकर चीता उदास हो गया... दिन भर शिकार के लिए वो बेमन इधर-उधर घूमता रहा कुछ एक प्रयास भी किये पर सफलता नहीं मिली और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा।अगली सुबह वो एक बार फिर शिकार के लिए निकला... कुछ दूर जाने पर उसे एक बूढ़े बन्दर ने देखा और पुछा, "कहाँ जा रहे हो बेटा ?"चीता बोला:- बंदर मामा, मैं शिकार पर जा रहा हूँ।बंदर बोला:- "बहुत अच्छे" तुम्हारी ताकत और गति के कारण तुम एक बेहद कुशल शि
हम क्यों ऐसा नहीं कर सकते?

हम क्यों ऐसा नहीं कर सकते?

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अगर एक छिपकली ऐसा कर सकती है, तो हम क्यों नहीं कर सकते?ये जापान में घटी सच्ची घटना है। जापान में एक व्यक्ति अपने घर को तोड़ कर दोबारा बनवा रहा था। जापान में घरों में लकड़ी की दीवारों में आमतौर पर खाली जगह रहती है। जब उस घर की दीवारों को तोड़ रहे थे तो उस दीवार की खाली जगह में एक छिपकली फंसी हुई मिली। उस छिपकली के पैर में दीवार के बाहर की तरफ से निकल कर एक कील घुसी हुई थी। जब उस छिपकली को देखा तो उस पर तरस तो आया ही साथ ही एक जिज्ञासा भी हुई क्योंकि जब कील को जांचा गया तो पता चला कि ये कील मकान बनाते समय 5 वर्ष पहले ठोकी गई थी।क्या हुआ था?छिपकली 5 वर्षों से एक ही जगह फंसी रहने के बावजूद जिन्दा थी!!दीवार के एक छोटे से अँधेरे हिस्से में बिना हिले-डुले 5 वर्षों तक जिन्दा रहना असम्भव था। ये वाकई हैरानी की बात थी कि छिपकली 5 वर्षों से जिन्दा कैसे थी! वो भी बिना एक कदम हिलाये, क्योंक
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