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Teacher Student Relationship Short Moral Stories in Hindi

Teacher Student Relationship Short Moral Stories in Hindi

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एक प्राथमिक स्कूल मे अंजलि नाम की एक शिक्षिका थीं वह कक्षा 5 की क्लास टीचर थी उसकी एक आदत थी कि वह कक्षा मे आते ही हमेशा "LOVE YOU ALL" बोला करतीं थी।मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं बोल रही । वह कक्षा के सभी बच्चों से एक जैसा प्यार नहीं करती थीं।कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको फटी आंख भी नहीं भाता था। उसका नाम राजू था। राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आ जाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान । पढ़ाई के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता था।मेडम के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता, मगर उसकी खाली खाली नज़रों से साफ पता लगता रहता कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे यानी (प्रजेंट बाडी अफसेटं माइड) .धीरे धीरे मेडम को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मेडम की आलोचना का निशाना बनन
दो लघु कथाएँ – अन्‍नदाता का अधिकार & वे चार।

दो लघु कथाएँ – अन्‍नदाता का अधिकार & वे चार।

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कथा 1 - अन्‍नदाता का अधिकार मिश्राजी अपने दोस्‍त के यहां आए थे। उनकी बेटी से बोले- 'बेटा अब एमबीबीएस कंप्‍लीट होने के बाद आपको सरकारी अस्‍पताल में जॉइनिंग मिल गई है। पोस्टिंग कहां हुई है?'" ग्राम सुनारी में अंकल।"मेरी बात मानो तो शहर में ही पोस्टिंग करवा लो। पिछले साल मेरे बेटे को अध्‍यापक की पोस्‍टिंग ग्राम जटवाड़ा कला में दे दी गई थी, थोड़ा ले-देकर और राजनितिक पहुंच से हमने उसकी पोस्टिंग शहर में ही करवा दी। वैसे भी आजकल गांवों का तो कोई स्‍टेटस ही नहीं है।'अंकल, गांवों में हमारे देश का अन्‍नदाता रहता है। विपरीत परिस्थितियों से लड़कर हमारेहमारे लिए खाद्यान्‍न उगाता है। हम तक अनाज पहुंचाता है। क्‍या उस किसान और उसके परिवार को शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य जैसी मूलभूत सुविधाएं पाने का अधिकार नहीं है? सिर्फ इसलिए कि वो पिछड़ा हुआ है और हमारे जैसी हाई सोसायटी में नहीं रहता?' वह आगे बोली-
यह रिश्ता क्या कहलाता है?

यह रिश्ता क्या कहलाता है?

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यह कहानी नहीं एक सच्चाई है, आज के रिश्तों की..एक व्यक्ति रामकिशन जिसने 14 साल की उम्रः से एक छोटे से किराना के काम से व्यवसाय शुरू किया। पिता की मृत्‍यु चूँकि पहले ही हो चुकी थी, उनके नाना ने उन्हें पाला, उनके 2 भाई और जिनका भार उन पर था। उन्होंने 14 साल की उम्र से अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने दोनों छोटे भाइयों को पढ़ा कर एक अच्छी नौकरी के काबिल बना दिया, वह दोनों भाई आज अपने परिवार के साथ सम्‍पन्‍न है।रामकिशन की पत्नी बहुत ममता प्रिय, साक्षात लक्ष्मी महिला, उन्होंने अपने पति का हमेशा साथ दिया दुःख और सुख में, रामकिशन के 6 बेटे और 4 लड़कियां हुई। लगातार 3 बेटियों के बाद उन्हें पुत्र हुआ, उसके बाद लगातार 2 पुत्र और एक पुत्री और २ पुत्र। जैसा की भाई बहिन में उम्र के अनुसार अंतर काफी रहा। पिता ने बहुत संघर्ष किया, अपनी छोटी सी दुकान को नामी (विख्यात) कर दिया पुरे शहर में। आज उनका ब्र
किसी के प्रति कोई निर्णय लेने से पहले सौ बार सोचें!

किसी के प्रति कोई निर्णय लेने से पहले सौ बार सोचें!

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एक समय की बात है...एक सन्त प्रात: काल भ्रमण हेतु समुद्र के तट पर पहुँचे...समुद्र के तट पर उन्होने एक पुरुष को देखा जो एक स्त्री की गोद में सर रख कर सोया हुआ था!पास में शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी, सन्त बहुत दु:खी हुए।उन्होने विचार किया कि ये मनुष्य कितना तामसिक और विलासी है,जो प्रात:काल शराब सेवन करके स्त्री की गोद में सर रख कर प्रेमालाप कर रहा है।थोड़ी देर बाद समुद्र से बचाओ, बचाओ की आवाज आई,सन्त ने देखा एक मनुष्य समुद्र में डूब रहा है, मगर स्वयं तैरना नहीं आने के कारण सन्त देखते रहने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे।स्त्री की गोद में सिर रख कर सोया हुआ व्यक्ति उठा और डूबने वाले को बचाने हेतु पानी में कूद गया।थोड़ी देर में उसने डूबने वाले को बचा लिया और किनारे ले आया।सन्त विचार में पड़ गए की इस व्यक्ति को बुरा कहें या भला।वो उसके पास गए और बोले भाई
चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

चार सीपें – एक गुड़‍िया की कीमत!

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एक 5 साल का लड़का और 3 साल लड़की जो की भाई-बहन थे दोनों साथ में बाजार से गुजर रहे थे। अचानक लड़के को लगा कि, उसकी छोटी बहन पीछे रह गई है। उसने रुकाकर, पीछे पलटकर देखा तो उसे दिखा कि उसकी उसकी बहन एक खिलौने की दुकान के सामने खड़ी होकर किसी चीज को एकटक देख रही है।लडका पीछे आकर अपनी छोटी बहन से पूछता है, "कुछ चाहिये तुम्हें?"लड़की एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर इशारा करके देखती है।5 साल का छोटा बच्चा अपनी छोटी बहन का साथ पकड़ता है, और एक जिम्मेदार बड़े भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। छोटी बहन बहुत खुश हो गई। दुकान का मालिक यह सब देख रहा था, बच्चे का साहसी व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित को गया....अब वह 5 साल का बच्चा अपनी बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, "सर, इस गुड़‍िया की कीमत क्‍या है?"दुकान का मालिक एक शांत और गहरा व्यक्ति था, उसने अपने ज
कर्मों का लेखा जोखा!!

कर्मों का लेखा जोखा!!

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एक बार एक बीबी थी। बहुत ज्यादा भजन सिमरन करना सेवा करनी किसी को कभी गलत न बोलना, सब से प्रेम से मिलकर रहना उस की आदत बन चुकी थी। वो सिर्फ एक चीज़ से दुखी थी के उस का आदमी उस को रोज़ किसी न किसी बात पर लड़ाई झगड़ा करता। उस आदमी ने उसे कई बार इतना मारा की उस की हडी भी टूट गई थी। लेकिन उस आदमी का रोज़ का काम था। झगडा करना।उस बीबी ने महाराज जी से अरज की हे सचे पातशाह मेरे से कोन भूल हो गई है। मै सत्संग भी जाती हूँ सेवा भी करती हूँ। भजन सिमरन भी आप के हुक्म के अनुसार करती हूँ। लेकिन मेरा आदमी मुझे रोज़ मारता है। मै क्या करूँ।महाराज जी ने कहा क्या वो तुझे रोटी देता है बीबी ने कहा हाँ जी देता है। महाराज जी ने कहा फिर ठीक है। कोई बात नहीं। उस बीबी ने सोचा अब शायद गुरु की कोई दया मेहर हो जाए और वो उस को मारना पीटना छोड़ दे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उस की तो आदत बन गई ही रोज़ अपनी घरवाली की
हंस और हंसिनी की कहानी (जरूर पढ़ें)

हंस और हंसिनी की कहानी (जरूर पढ़ें)

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ये कहानी आपको झकझोर देगी 2 मिनट में एक अच्छी सीख अवश्य पढ़ें...एक बार की बात है 1 हंस और 1 हंसिनी थी वे दोनो हरिद्वार में रहते थे। वे दोनों एक बार भटकते-भटकते एक उजड़े व बहुत ही वीरान से रेगिस्तानी इलाके में आ गये। हंसिनी ने हंस से कहा कि हम ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ?? यहाँ पर न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं, यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा।हंस और हंहिनी को भटकते हुये शाम हो गई तो हंस ने हंसिनी से कहा कि आज की रात हम किसी तरह कट लेते है, सुबह होते ही हरिद्वार वापिस लौट चलेंगें। रात हुई तो देखा कि जिस पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे, उसी पेड़ पर एक उल्लू बैठा था।और वह जोर से चिल्लाने लगा।हंसिनी ने हंस से कहा- अरे ये उल्‍लू के चिल्‍लाने की वजह से तो यहाँ रात में सो भी नहीं सकते।हंस ने हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया
मृत्यु को याद रखें!!

मृत्यु को याद रखें!!

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एक धनवान व्यक्ति था, वह बडा ही विलासी था। हर समय ही उसके मन में भोग विलास सुरा-सुंदरियों के विचार ही आते रहते। वह खुद भी इन विचारों से बहुत परेशान था, उसने बहुत प्रयास किये की वे विचार उसे छोड़ दें पर वह आदत से लाचार था, वे विचार उसे छोड़ ही नहीं रहे थे।एक दिन उस धनवान व्‍यक्ति को आचानक किसी संत से उसका सम्पर्क हुआ। वह संत से उन अशुभ विचारों से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगा।संत ने कहा अच्छा, अपना हाथ दिखाओं, हाथ देखकर संत भी चिंता में पड गये। संत उस व्‍यक्ति से बोले बुरे विचारों से मैं तुम्हारा पिंड तो छुडा देता, पर तुम्हारे पास समय बहुत ही कम है। आज से ठीक एक माह बाद तुम्हारी मृत्यु निश्चित है, इतने कम समय में तुम्हे कुत्सित विचारों से निजात कैसे दिला सकता हूं। और फ़िर तुम्हें भी तो तुम्हारी तैयारियां करनी होगी।वह व्यक्ति और चिंता में डूब गया। अब क्या होगा, क्‍या करे
वसीयत और नसीहत! Short Moral Story

वसीयत और नसीहत! Short Moral Story

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एक बहुत ही दौलतमंद व्‍यक्ति ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, कि बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, यह मेरी इक्छा जरूर पूरी करना।पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडित जी से अपने पिता की आखरी इक्छा बताई। और पंडितजी से बोला की पिताजी के पैरों में ये फटे हुये मोजे पहनाना है। पर पंडितजी ने कहा 'हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है'पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो। बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, पर कोई नतीजा नहीं निकला सका।इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुअा एक खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी।"मेरे प्यारे बेटे, देख रहे हो..? ये गाड़ी, दौलत, बंगला और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुअा मोजा तक नहीं ले जा
अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)

अच्छाई और बुराई! (लघु कहानी)

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उभरती बुराई ने दबती सी अच्छाई से कहा, कुछ भी हो, लाख मतभेद हो पर है तू मेरी सहेली। मुझे अपने सामने तेरा दबना अच्छा नही लगता। अलग खड़ी न हो मुझमें मिल जा। मै तुझे भी अपने साथ बढ़ा लूंगी, समाज में फैला लूंगी। भलाई ने शांति से उत्तर दिया, तुम्हारी हमदर्दी के लिए धन्यवाद, पर रहना मुझे तुमसे अलग ही है। क्यो? आश्चर्य भरी अप्रसन्नता से बुराई ने पूछा।अच्छाई ने और भी शांत होकर जवाब दिया। बात यह है कि मैं तुमसे मिल जांऊ तो फिर मैं कहां रहूंगी? तब तो तुम ही तुम होगी सब जगह। गुस्से से उफनकर बुराई ने अपनी झाड़ी अच्छाई के चारों ओर फैलाकर जकड़ लिया और फुंफकारकर कहा ले भोग मेरे निमंत्रण को ठुकराने का नतीजा! अब पड़ी रह मिट्टी में मुंह दुबकाए, दुनिया में तेरे फैलने का अब कोई मार्ग नही।अच्छाई ने अपने नन्हे अंकुर की आंख से जहां भी झांका उसे बुराई की जकड़ बंध, झाड़ी के तेज कांटे, भाले के समान तने हुए दिखाई दि
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